Latest Updates
-
Paryushana Mahaparva 2026: आज से शुरू हुआ हुआ पर्युषण महापर्व, जानें आठ दिनों का महत्व और नियम -
पेरिस में बना फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर, 1970 के संकल्प से 2026 तक ऐसे पूरा हुआ सफर -
International Literacy Day 2026: क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस? जानें इतिहास, महत्व और थीम -
International Literacy Day 2026: साक्षरता दिवस पर ये संदेश भेज सबको करें जागरूक, बताएं पढ़ने-लिखने का महत्व -
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य -
Aja Ekadashi 2026: नारायण की कृपा...इन संदेशों के साथ अपने प्रियजनों को भेजें अजा एकादशी की शुभकामनाएं -
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व -
Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: इन संस्कृत श्लोकोंं के जरिए गुरुजनों को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं
Gandhi Jyanti : हफ्ते में एक बार मौनव्रत धारण करते थे गांधी जी, चुप रहने से सेहत को मिलते हैं ये लाभ
Health Benefits of Maun Vart : महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। वो हमेशा किसी बात का विरोध जाहिर करने के लिए मौन व्रत का सहारा लेते थे। मौन व्रत उनके जीवनचर्या का हिस्सा भी था। महात्मा गांधी ने अपनी ऑटोबायोग्राफी 'My Experiment with Truth' में मौन व्रत के फायदों के बारे में जिक्र किया है।
महात्मा गांधी प्रत्येक सोमवार को मौन रखा करते थे। । उस दौरान वो कोई बात नहीं करते थे। बहुत जरूरी बात होने पर वो अपनी बात लिख कर आगे वाले तक पहुंचा देते थे।
मौन व्रत के दौरान वह प्रार्थना करते थे, कोई पुस्तक पढ़ते थे और सप्ताह के लंबित कार्यों को पूरा करते थे। इस प्रकार, उन्हें आंतरिक शांति और शक्ति मिलती थी। जिससे उन्हें भविष्य में अहिंसा की नीति विकसित करने में मदद मिली। वैसे जैन धर्म में भी मौनव्रत को सबसे बड़ा व्रत माना जाता है। आइए जानते हैं गांधी जयंती के मौके पर मौनव्रत रखने के फायदे

मौन पर गांधीजी के विचार
गांधीजी के अनुसार मौन का मूल्य बहुत बड़ा है । वह कहते हैं कि अगर हम लगातार बोलते हैं तो हम कभी भी अपनी आंतरिक आवाज़ नहीं सुन सकते। इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति कम बोलता है तो उसका एक-एक शब्द वजनदार होता है। अगर हम चुप रहने का महत्व समझ लें तो आधी समस्याएं हल हो जाएंगी।
भावनाओं पर रहता हैं कंट्रोल
अगर आपको जल्दी गुस्सा आ जाता है या आप आवेश में आकर ऐसी चीजें कर देते हैं। जिसके बाद आपको पछताना पड़े तो अपनी भावनाओं पर पकड़ बनाए रखने के लिए मौन व्रत बहुत अच्छी साधना है। मौन रहते समय आप अपने आप को बेहतर तरीके से समझते हैं खुद के साथ समय बिताते हैं। जब आप अकेले कुछ पल के लिए मौन रहते हैं पका दिमाग आपकी भावनाओं को बेहतर स्तर पर प्रॉसेस करता है। उस समय आपके ऊपर किसी स्थिति या इंसान का दबाव नहीं होता। आप अपनी भावनाओं को समझकर आगे के लिए किस जगह पर किस तरह भावनाओं को काबू करना है ये आप सीख पाते हैं।

एनर्जी नहीं होती है खराब
आपने अक्सर बुजुर्गों को यह कहते हुए सुना होगा कि उतना ही बोलो जितना जरुरत हो। मौन व्रत मानसिक ऊर्जा बचाने का एक बहुत अच्छा तरीका है। एनर्जी वेस्ट होने का सबसे बड़ा कारण है बातें ज्यादा करना। बातें करने से सबसे अधिक ऊर्जा वेस्ट होती है। फालतू और बेमतलब की बातों में दिन भर हम ना जाने खुद को कितना थकाते है। इसलिए मौन व्रत धारण कर ऊर्जा को बचना चाहिए।
एकाग्रता बढ़ाने में मददगार
मौन व्रत का एकाग्रता को बेहतर बनाने में भी मदद करता है। मौन रहते समय दिमाग शांत रहता है। इससे आपका फोकस बना रहता है आपकी एकाग्रता क्षमता बढ़ती है। शोर हमारे हमारी एकाग्रता को भंग करता है। इसलिए आपने अक्सर सुना होगाकि सुबह 4 से 5 बजे पढ़ने से सब याद रहता है? ऐसा इसलिए क्योंकि इस समय वातावरण और आसपास शांति का माहौल होता है।
कम होता है तनाव
मौन व्रत तनाव दूर करने में मदद करता है। मौन व्रत रखने वाला व्यक्ति कभी तनाव में नहीं रहता यानी बहुत कम बोलने वाला दिमाग से शांत रहता है। दिमागी तौर से बीमार मरीजों को डॉक्टर्स अक्सर मेडिटेशन करने की सलाह देते है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
