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Gandhi Diet: सेहत को लेकर फिक्रमंद थे गांधी जी, फास्टिंग और पैलियो डाइट से 79 में खुद को रखते थे फिट
Health Lessons To Learn From Bapu Life: महात्मा गांधी का जीवनकाल 79 साल तक रहा। अपने जीवन में 29 बार अनशन किया जिस में कुल 154 दिन तक अनशन पर रहें, इनमें तीन बार 21-21 दिन के थे।
1921 में प्रण किया कि आजादी मिलने तक हर सोमवार उपवास करूंगा, यानी 1341 दिन उपवास किया। पूरे जीवनकाल में गांधीजी ने अपनी डाइट के साथ कई तरह के प्रयोग किए।
नतीजा ये रहा है कि वे जीवनभर फिट रहे। डायबिटीज, हार्ट डिजीज और ब्लडप्रेशर जैसी बीमारियां छू भी नहीं पाई। गांधी जी सादा और पौष्टिक खाना पसंद करते थे, उन्होंने भोजन के साथ खूब प्रयोग किए। यंग इंडिया और हरिजन समाचार पत्रों में गांधीजी ने अपनी डाइट पर किए गए प्रयोगों पर लिखा है। जानते हैं उनके खानपान से जुड़ी बातें...

फास्टिंग पर करते थे विश्वास
गांधी जी सप्ताह में एक बार उपवास रखा करते थे। पाचन तंत्र को आराम देने के साधन के रूप में उपवास में दृढ़ विश्वास रखने वाले, गांधीजी ने इसे जीवन का एक तरीका बना दिया था। उन्होंने अनशन को एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। वे उपवास को स्वस्थ रहने के लिए सबसे शक्तिशाली तरीकों में से एक बताते थे।
नहीं लेते थे डेयरी फूड्स
गांधी जी ने अपनी पुस्तक द मोरल बेसिस ऑफ वेजिटेरियनिज्म में कहा, "मैंने छह साल तक दूध को अपने आहार से बाहर कर दिया। साल 1917 में मुझे गंभीर पेचिश की समस्या हो गई, मैं कंकाल बनकर रह गया लेकिन मैंने दूध या छाछ लेने से मना कर दिया।
ऐसे अपनाया शाकाहार
महात्मा गांधी ने अपनी मां से वादा किया था कि वह इंग्लैंड में मांस नहीं खाएंगे। लेकिन साथियों के दबाव और शाकाहारी विकल्पों की उपलब्धता में कठिनाई के कारण यह उनके लिए बेहद मुश्किल हो रहा था। हालांकि उन्हें बाद में एक शाकाहारी रेंस्त्रा मिला जो कि किताबें भी बेचता था। इसी बीच उनकी नजर दुकान में रखीं किताबों पर पड़ी और उन्होंने देखा एक बुक में शाकाहार के लिए नमक की दलील दी गई है। उन्होंने इस पुस्तक को पढ़ने के बाद अपनी पसंद से शाकाहारी बनने का दावा किया। ये बातें उन्होंने अपनी बुक Diet and Diet Reforms में लिखी हैं।
मीठे से परहेज, गुड़ पर जोर
गांधी जी अपनी आत्मकथा में बताया है कि वो मिठाइयां और मसालों से परहेज किया करते थे। उन्होंने चीनी को हानिकारक स्वीटनर माना और गुड़ के इस्तेमाल पर जोर दिया। 'गुड़ जिसमें 2 से 1 के अनुपात में गन्ना-चीनी और फल-शर्करा होता है, इसलिए, गुड़ का पोषक मूल्य रिफाइंड चीनी की तुलना में कम से कम 33 प्रतिशत बेहतर है।' गांधीजी ने हरिजन में लिखा है कि शहद को गर्म पानी के साथ नहीं लिया जाना चाहिए। जैसा कि बहुत से आयुर्वेदिक डॉक्टर भी दावा करते हैं।
नहीं खाते थे पॉलिश्ड फूड
अपनी पुस्तक हरिजन में गांधीजी ने लिखा है कि, 'गेहूं की भूसी निकालने पर पोषण का भयानक नुकसान होता है। ग्रामीण और अन्य जो अपनी चक्की में साबुत गेहूं का आटा खाते हैं, वे अपना पैसा बचाने के साथ स्वास्थ्य भी सुरक्षित रखते है।' गांधी जी पूरी तरह से पॉलिश किए गए अनाज के खिलाफ थे और उनका मानना था कि रिफांइड होने के बाद सफेद और छिलके वाले अनाज अपना सारा पोषण खो देते हैं।
उबली हुई सब्जियां
गांधीजी को सादा खाना पसंद था। वो उन चीजों को खाने से परहेज करते थे, जिससे गुस्सा तेज आता हो। इसलिए वो बिना तेल और नमक के उबली सब्जियां खाते थे। इसमें उबला हुआ चुकंदर भी शामिल था।
फलों और स्प्राउट पर देते थे जोर
गांधी जी का मानना था, बिना पका हुआ भोजन या कच्चा भोजन, अपने शुद्धतम रूप में भोजन है। इसमें शामिल सलाद, स्प्राउट्स, कई फल और सब्जियां काफी सस्ते और स्वास्थ्यवर्धक भी हैं।
रहें हाइड्रेड
आपको हमेशा खुद को हाइड्रेट रखना चाहिए। इसके लिए दिन भर मे पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। पानी पैलियो डाइट प्लान का मुख्य हिस्सा है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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