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Rare Case : गुरुग्राम में एक महीने की बच्ची के पेट से निकले दो अधूरे जुड़वां भ्रूण, 5 लाख में 1 दुर्लभ मामला
What is 'Fetus in Fetu' : हरियाणा के नूंह जिले में जन्मी एक मासूम बच्ची बेहद दुर्लभ मेडिकल कंडीशन के साथ सामने आई। जन्म के कुछ सप्ताह बाद उसके पेट में असामान्य सूजन दिखी और वह ठीक से दूध नहीं पी रही थी। जब बच्ची को गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया, तो डॉक्टरों ने स्कैनिंग के बाद देखा कि उसके पेट में दो अधूरे भ्रूण मौजूद हैं। यह स्थिति, जिसे 'फीटस इन फीटू' कहा जाता है, 5 लाख बच्चों में से केवल एक में पाई जाती है और पूरी दुनिया में दर्ज मामलों में से यह बेहद दुर्लभ मामला है।
डॉक्टरों की टीम ने जटिल सर्जरी करके दोनों भ्रूण सफलतापूर्वक बच्ची के पेट से निकाल दिए, और अब बच्ची रिकवरी कर रही है। वैसे यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी महाराष्ट्र में एक ऐसा मामला सामने आ चुका है। इसे मेडिकल साइंस में बेहद दुर्लभ मामला माना जाता है, जो 5 लाख प्रेग्नेंसी में 1 देखा जाता है।

फीटस इन फीटू क्या है?
जब किसी बच्चे के पेट में भ्रूण पाया जाता है, तो इसे मेडिकल टर्म में फीटस इन फीटू (Fetus in Fetu) कहा जाता है। यह बेहद दुर्लभ स्थिति है, जो लगभग 5 लाख जन्मों में केवल एक बच्चे में पाई जाती है। हरियाणा का यह मामला और भी विशेष था, क्योंकि नवजात बच्ची के पेट में एक नहीं, बल्कि दो अधूरे भ्रूण पाए गए। इस वजह से इसे दुनियाभर में दर्ज 300 से भी कम मामलों में शामिल किया गया।
फीटस इन फीटू की स्थिति तब होती है जब गर्भावस्था के शुरुआती चरण में एक जुड़वां भ्रूण दूसरे को अपने अंदर समा लेता है। समाहित भ्रूण पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता और अधूरा रह जाता है। यह भ्रूण बच्चे के शरीर में एक असामान्य वृद्धि के रूप में मौजूद रहता है, लेकिन यह कैंसर या ट्यूमर की तरह नहीं होता।
सर्जिकल रिस्क रहता है
एक महीने के बच्चे पर सर्जरी करना हमेशा जोखिमभरा होता है। बच्ची को पहले स्थिर किया गया और फिर विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर सावधानीपूर्वक दोनों 'पैरासिटिक ट्विन्स' को हटाया। सर्जरी की सफलता ने डॉक्टरों और परिवार दोनों को राहत दी।
यह दुर्लभ मामला न केवल मेडिकल साइंस के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह यह भी दर्शाता है कि समय पर चिकित्सा सहायता और जागरूकता कितनी जरूरी है। फीटस इन फीटू जैसी स्थितियों में जल्दी इलाज कराने से बच्चे का जीवन सुरक्षित किया जा सकता है। सर्जरी के बाद बच्ची अब धीरे-धीरे रिकवरी कर रही है और डॉक्टरों की निगरानी में स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ रही है।
पहले भी आ चुके है मामले सामने
- 2011 में कोटा में न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक दो महीने की बच्ची में पेट के ऊपरी हिस्से में धीरे-धीरे बढ़ता हुआ गांठ पाया गया। जांच में यह फीटस इन फीटू का मामला निकला
- अरुणाचल प्रदेश में 2022 में एक 9 महीने के बच्चे में तीन अधूरे भ्रूण पाए गए। यह मामला एक क्वाड्रुपलेट प्रेग्नेंसी का परिणाम था, जिसमें एक भ्रूण दूसरे में समाहित हो गया था।
- इसी साल महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में एक 32 वर्षीय गर्भवती महिला में फीटस इन फीटू का मामला सामने आया। यह स्थिति गर्भावस्था के दौरान ही पहचान में आई और सर्जिकल प्रोसेस से भ्रूण को निकाला गया।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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