मामूली सा दिखने वाले इस पेड़ के बीज में छ‍िपा है कुदरती खजाना, इसके 5 फायदे जान हैरान रह जाएंगे आप!

Health benefits of Nimboli: नीम के गुणों से तो हम सब ही अच्‍छे से वाक‍िफ है। ये कई बीमारियों से लड़ने में सहायक है। इसके अलावा आयुर्वेद के अनुसार नीम के फल कह‍िए या बीज यानी निंबोली भी कई सारी स्‍वास्‍थ्‍य और चेहरे से संबंधी समस्‍याओं को दूर करने कारगर होता है।

आप जानते ही होंगे कि प्राचीन समय से ही नीम के विभिन्‍न भागों जैसे पत्ते, बीज और छाल का उपयोग प्रमुख औषधि के रूप में होता आया है। आज हम इस पर लगने वाले छोटे से फल निंबोलियों से होने वाले फायदे पर बात करेंगे। आइए जानते हैं कि जीवाणुरोधी निंबोली के उपयोग से कौन-कौन सी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है...

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घाव भरें जल्‍दी

शरीर पर कहीं चोट लगने पर घाव से बैक्टीरिया प्रवेश करके संक्रमण को बढ़ा सकते हैं। इसके लिए आप निंबोली का इस्तेमाल कर सकते हैं। चोट वाले स्थान पर निंबोली का लेप लगाने अथवा इसका सेवन करने से आप संक्रमण से बच सकते हैं। क्योंकि इससे बैक्टीरिया को अंदर घुसने का रास्ता नहीं मिल पाएगा। नीम में घाव भरने के गुड होते हैं जिससे यह आपकी चोट को जल्द से जल्द ठीक होने में मदद करती है।

बालों में जूं हो जाएं तो

सिर में जूं हो जाने पर निंबोली का बहुत कारगर उपयोग किया जा सकता है। जूं होने पर नीम की निंबोली को पीसकर स्कैल्प पर लगाएं। इसे आप हफ्ते में 2 बार लगा सकते हैं। इससे आपके सिर के जूं गायब हो जाएंगे। गांव वगैरह में आज भी जूं भगाने के लिए निंबोली का इस्तेमाल किया जाता है।

इंफेक्शन से बचाव के लिए

मानसून के मौसम में नीम के फल यानी निंबोली का सेवन करने अथवा नीम के पत्तों से नहाने पर शरीर में बैक्टीरिया की प्रवेश करने या संक्रमण का खतरा बहुत कम हो जाता है। नीम की पत्तियों से लेकर इसकी छाल, इसके फल हर पदार्थ में एंटी-बैक्टेरियल गुण उपस्थित होते हैं, जो हमारी त्वचा में बैक्टीरिया की ग्रोथ होने से बचाता है।

मलेरिया में लाभदायक

मलेरिया से ग्रसित रोगी के लिए नीम के बीज के बहुत फायदे होते हैं। प्राचीन समय में नीम-हाक‍िम और वैद्य मलेरिया का घरेलू उपचार करने के लिए नीम को औषधि के रूप में इस्तेमाल करते थे। विशेषज्ञों की मानें तो, निंबोली को पीसकर इसका लेप लगाने से मच्‍छर पास में नहीं आते हैं। जिससे मलेरिया फैलाने वाले मच्‍छरों से होने वाले संक्रमण अथवा उनके काटने से बचा जा सकता है। साथ ही नीम के बीज से प्राप्‍त तेल का इस्तेमाल करने पर मच्‍छरों को पास में आने से रोका जा सकता है।

मु्ंह के छालों से बचाएं

मुंह में होने वाले छाले या माउथ अल्सर पेट की खराबी के कारण होते हैं और बहुत ही कष्टदायक होते हैं। पर जब आप निंबोलियों का सेवन करती हैं तो इसका मीठा और कसैला स्वाद और गुण छालों को जल्‍द ठीक करता है।

त्वचा समस्याओं के लिए

पुराने जमाने में दादी-नानी चेहरे की समस्‍याओं को दूर करने के ल‍िए नीम के बीज यानी निंबोली से निकाला गया तेल का उपयोग करने की सलाह देते हैं। अगर आप भी स्किन रिलेटेड समस्याओं जैसे कील-मुंहासे, फंगल इंफेक्शन, परतदार त्‍वचा आदि से परेशान हैं, तो आपको नीम के बीज यानी न‍िंबोली का इस्‍तेमाल करना चाह‍िए। इसके तेल में के तेल में एंटीऑक्‍सीडेंट, एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो पिंपल्स, एग्जिमा अथवा सोरायसिस जैसी विभिन्‍न प्रकार की त्‍वचा समस्‍याओं का उपचार करने में सहायक होते हैं।

खून को करता है शुद्ध

नीम के रक्तशोधक गुण होते हैं, आमतौर पर निंबोली भी उन्हीं तत्वों से बनी होती है जोकि नीम के अंदर होते हैं।‌‌‌ हालांकि यदि आप नीम के बीज यानी न‍िंबोली के अंदर मौजूद बीज के चूर्ण को शहद के साथ म‍िलाकर खाने से खून साफ होता हक्‍। खाते हैं तो रक्त शोधन की दर को आप बढ़ाता हैं।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

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