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योग के प्रति दीवानगी पूरे विश्व में देखने को मिलती है। हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक कई सेलेब्स की फिटनेस का राज योग ही है। योग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 21 जून को हर साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। आजकल हम घर की छत हो या फिर गार्डन, हर किसी को हाथों में योगा मैट लिए देखते हैं। मॉर्डन योग कल्चर में मैट चलन काफी बढ़ गया है।
प्राचीन काल में साधु-संत योग मैट जैसी चीजों का इस्तेमाल नहीं करते थे। लेकिन अब योगाभ्यास करने वालों के लिए योग मैट का होना जरूरी होता है। लेकिन क्या आपको पता है कि योग में कब से मैट की जरूरत महसूस होने लगी? योग मैट का इस्तेमाल कब और किसने पहली बार किया? चलिए जानते हैं योग मैट का इतिहास।

योग मैट क्या है
नियमित योगाभ्यास करने वालों को योगा मैट की जरूरत होती है। योगा मैट गिरने या किसी तरह की चोट से बचाने में काम आता है। योग के दौरान बैलेंस रखने के लिए भी योग मैट काम आता है। योग मैट रबर का, सूती कपड़े का पतला और मोटा दोनों तरीका का हो सकता है। योग के लेवल के हिसाब से आप सही योगा मैट का चयन कर सकते हैं।
योग मैट का इतिहास
प्राचीन समय में ऋषि मुनियों के युग में ही योग की शुरुआत हो गई थी। साधु-संत पहाड़ियों, हिमालय की चोटी, जंगलों और गुफाओं आदि में योग किया करते थे। लेकिन उस समय योग मैट नहीं हुआ करती थी। वह जमीन पर ही योग करते थे। 1970 के दशक में लोग योग करने के लिए दरी या चटाई का उपयोग करते थे। उस समय योग करने के लिए लोग जमीन पर दरी बिछाया करते थे।
बीकेएस अयंगर ने लेकर आए योगा मैट का कॉन्सेप्ट
पहली बार योग गुरु बीकेएस आयंगर ने योग मैट की जरूरत को महसूस किया। पहले वह भी अन्य लोगों की तरह की जमीन में कंबल बिछाकर योग किया करते थे। लेकिन 1960 में योग गुरु बी के एस आयंगर यूरोप में योग की कक्षाएं लेने के दौरान उन्होंने देखा कि यूरोपियन छात्रों को योग करते समय फर्श पर खड़े होकर आसन करने में फिसलन जैसी परेशानी होती थी। वह योग में ध्यान नहीं लगा पाते थे क्योंकि उनका ध्यान गिरने से बचने पर लगा रहता था।
योग गुरु विदेशी योगा छात्रों की इस मुश्किल को समझते थे और इसका कुछ हल निकालना चाहते थे। एक बार योग गुरु जर्मनी में थे, जहां फर्श से फिसलकर वह गिरने वाले थे लेकिन कार्पेट के नीचे रखी रबर की चटाई ने उन्हें गिरते-गिरते बचा लिया। यहां से उन्हें योग मैट का विचार आया कि योग मैट छात्रों का आसन के दौरान फिसलने से बचाएगी। इस विचार के साथ कंबल को हटाकर उन्होंने रबर की चटाई का इस्तेमाल मैट के तौर पर किया।

योग खरीदते हुए इन बातों का रखें ध्यान
- कई बार योगा मैट खरीदते समय इसकी मोटाई पर ध्यान देना चाहिए। सख्त फ्लोर पर पतले योगा मैट का इस्तेमाल करने से हड्डियों को परेशानी हो सकती है। कम से कम 1.5 इंच मोटाई होनी चाहिए।
- खरीदने से पहले आप मैट पर आसन कर के देखें। अगर उस मैट पर योगा करते समय सहज महसूस कर रहे हैं तो आप उस मैट को खरीद सकते हैं।
- योगा मैट की बनावट और टेक्सचर को जरुर देखें, कॉटन के मैट में फिसलन की संभावना ज्यादा रहती है तो वहीं रबर के मैट से कुछ दिनों तक रबर की गंध आती रहती है, लेकिन इसमें फिसलन नहीं होती है।
- योगा मैट खरीदते उसका कैरी बैग जरूर लें ताकि कहीं घूमने जाने पर इसे आसानी से ले जा सकें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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