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जबलपुर कलेक्टर के बेटे की लू से मौत, जानें कैसे जानलेवा बन जाता है Heat Stroke
Jabalpur collector's son dies due to Heat Stroke : भीषण गर्मी और लू लगने की वजह से जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना के 21 साल के बेटे अमोल (21) की दिल्ली के एम्स अस्पताल में मुत्यू हो गई। जानकारी के मुताबिक अमोल को रविवार को लू लगने की वजह से काफी देर तक उल्टियां हुईं। इसके बाद उसे एम्स में भर्ती कराया गया था। जहां डॉक्टरों के काफी प्रयास के बाद भीद उसे नहीं बचाया जा सका।
इन वक्त गर्मी ने तापमान के मामले में सारे रिकॉर्ड तोड़ रखें है। राजस्थान में भीषण गर्मी के चलते 500 के आसपास गंभीर मामले दर्ज हो चुके है और 20 के आसपास लोगों की मुत्यु के मामले सामने आ चुके है। लू से बचाव के लिए केन्द्र सरकार से लेकर मौसम विभाग ने कई गाइडलाइन जारी की है।

इन दिनों उत्तर भारत के ज्यादात्तर जगहों में तापमान 45 डिग्री या उससे ज्यादा दर्ज किया गया है, जिसकी वजह से हीट स्ट्रोक का खतरा लगातार बढ़ रहा है और यह जानलेवा बनता जा रहा है। आइए जानते हैं कि किन हालातों में हीटवेव जानलेवा बन जाता है।
हीट स्ट्रोक का खतरा कब होता है ज्यादा?
एक स्वस्थ इंसान के शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस यानी (98.6 फारेनहाइट) होता है। हर मौसम में हमारा शरीर से अंदर से तापमान को मैंटेन रखने की कोशिश करता है। जब बॉडी टेम्परेचर इससे बढ़ जाता है तो वह गर्म होने लगता है, जिससे बुखार आ जाता है। तापमान 100 या 102 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने पर भी शरीर का इम्यून सिस्टम अंदर से लड़ने लगता है। लेकिन जब वह इससे ज्यादा बढ़ता है तो खतरनाक साबित हो सकता है।
कब खतरनाक बन जाता है हीट स्ट्रोक?
जब शरीर 40 डिग्री सेल्सियस तापमान के आसपास पहुंचता है, तो मस्तिष्क का तंत्रिका तंत्र बिगड़ने लगता है। इस वजह से खूब पसीना आना, चक्कर आना, बेहोश होना, प्यास लगने की समस्या होने लगती है। ज्यादा पसीना बहने से डिहाइड्रेशन की समस्या होने लगती है और शरीर में थकान सी आ जाती है। अगर इस स्थिति में भी शरीर का टेम्परेचर कंट्रोल होने की बजाय बढ़ने लगता है तो मरीज को ब्रेन डैमेज होने का खतरा रहता है।
ब्रेन फेल होने पर पसीना काफी तेजी से निकलता है और फिर धीरे-धीरे इसका असर स्किन, ब्रेन के अलावा किडनी, हार्ट पर भी होने लगता है।
हार्ट अटैक आने का ज्यादा खतरा
हीट स्ट्रोक की वजह से हार्ट अटैक आने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है और इससे जान जाने का खतरा ज्यादा रहता है। बाहर का तापमान ज्यादा होने से पसीना भी अधिक निकलने लगता है। जिससे शरीर में पानी की कमी होने लगती है और इस पसीने में शरीर के लिए आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स भी बाहर निकल जाते है। इस वजह से ब्लड का वॉल्यूम गिरने लगता है और दिल पर दवाब पड़ने लगता है, जिससे हार्ट अटैक आने का खतरा बढ़ जाता है।
कैसे बचाए खुद को हीटस्ट्रोक से
- ज्यादा गर्मी पड़ने पर या लू के आसार होने पर घर से बाहर न निकलें।
- गर्मी में बाहर निकलते हुए पूरी आस्तीन के सूती कपड़े ही पहनें।
- धूप में बाहर निकलते हुए छाता टोपी, चश्मा जरूर पहनें।
- डिहाइड्रेशन से बचने के लिए खूब पानी पिएं।
- मसालेदार खाना खाने से पूरी तरह बचें।
- कार्बोनेटेड ड्रिंक और कैफीन चाय-कॉफी पीने से बचें।
- नींबू पानी, छाछ, लस्सी और नारियल पानी का सेवन करें।
- हीट स्ट्रोक लगने पर इंसान को तुरंत अंधेरे और ठंडे कमरे में लेकर जाएं और शरीर के तापमान को सामान्य करने के लिए गीले और ठंडे कपड़े से शरीर को पोछें।
- भीषण गर्मी के चपेट में आने से परेशान व्यक्ति को ORS या नींबू-नमक पानी पिलाते रहें।
- हीट स्ट्रोक लगने पर बगलों यानी आर्म पिट और ग्रॉइन एरिया में आइस बैग्स रखें इससे आराम मिलेगा।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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