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अच्छी लड़की बनने की आदत आपको कर सकता है परेशान, जानें क्या होता गुड गर्ल सिंड्रोम और इसके लक्षण
Good Girl Syndrome: क्या आप भी उन लड़कियों की तरह है जो दूसरों की नजरों में अच्छा बनने का प्रयास करती है। क्या आप सभी का ध्यान और प्यार पाने के लिए हमेशा अच्छी बनी रहना चाहती हैं। तो संभल जाइए, क्यूंकि आपका ये स्वभाव सामान्य नहीं है, बल्कि ये 'गुड गर्ल सिंड्रोम' का संकेत हो सकता है।
यानी अच्छा बनने की कोशिश में अपनी वास्तविक क्षमताओं को भुला देना। ऐसे हालात न सिर्फ एक औरत के व्यक्तित्व पर, बल्कि खुद से जुड़े उनके फैसले लेने की क्षमता पर भी बुरा असर डालते हैं। यहां हम आपको बताएंगे कि इस सिंड्रोम के विभिन्न रूप क्या है और इससे बाहर कैसे निकला जाए।

कैसे बढ़ता है ये सिंड्रोम
गुड गर्ल सिंड्रोम अक्सर बचपन के आघात से उत्पन्न होता है। जिसमें परिवार से वो प्यार और दुलार नहीं मिलता जिसके हम बचपन में हकदार थे। इस तरह की स्थिति में माता-पिता और देखभाल करने वाले अक्सर अपने प्यार को सशर्त और लेन-देन का एहसास कराते हैं। इसलिए, हम यह मानने लगते हैं कि उनसे प्यार पाने के लिए, हमें उन्हें कुछ न कुछ देना होगा या ऐसा कुछ करना होगा जिससे उन्हें खुशी मिले। इसलिए, हम दूसरों, उनकी पसंद, उनके निर्णयों को प्राथमिकता देने लगते हैं और इस प्रक्रिया में अपना आत्म-सम्मान खो देते हैं।
गुड गर्ल सिंड्रोम के लक्षण
दूसरों को खुश रखना : इस प्रकार के गुड गर्ल सिंड्रोम में, दूसरों से मिलने वाले एप्रूवल पर फोकस रहता है। इनकी स्वयं की भावना और खुद पर विश्वास बाहरी मान्यता पर निर्भर होती है।
परफेक्शनिस्ट: इस तरह के सिंड्रोम से पीड़ित उन गलतियों और असफलताओं के डर से प्रेरित होती है जो दूसरों को निराश कर सकता है। इसलिए, वे परफेक्ट बनने के लिए हर कोशिश करती हैं।
विशिष्ट पहचान : इस सिंड्रोम में, एक महिला लगातार अपनी उपलब्धियों और सफलताओं के माध्यम से मान्यता चाहती है।
दूसरों की जरूरतों पर फोकस: इस सिंड्रोम से पीड़ित दूसरों की ज़रूरतों और व्यवहारों के साथ एडजस्टमेंट करने पर अत्यधिक फोकस करती है, और इस चक्कर में वो अक्सर अपनी प्राथमिकताओं तक को दरकिनार कर देती है।
सीमित दायरा: इस प्रकार की महिला नियमों के अनुसार रहने में विश्वास करती है, और अपने लिए कोई स्टैंड नहीं ले पाती। ये दूसरों द्वारा आलोचना और नापसंद किए जाने के डर से प्रेरित होती हैं।
कैसे पाए गुड गर्ल सिंड्रोम से आजादी
अपनी क्षमता से आगे ना बढ़ें : देखा जाए, तो किसी की मदद करना बुरी बात नहीं है। लेकिन एक बार जब हम किसी की मदद कर देते है, तो लोग हमेशा ही आपकी मदद लेने का इंतजार करने लगते है। लेकिन एक बात हमेशा याद रखें कि अपनी क्षमता के हिसाब से ही दूसरों की मदद को आगे बढ़ें। केवल तारीफ पाने के लिए या दूसरों के दिल में अपनी जगह बनाने की कोशिश में क्षमता से आगे बढ़कर काम न करें।
अपना पक्ष रखें : हमेशा दूसरों की बात पर सहमति जताना आपके निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है, खासकर जब बात आपसे जुड़ी हो। इसलिए अपने अधिकार के लिए हर स्तर पर आवाज़ उठाना जरूरी है। चाहे घर के कामकाज के बीच अपने लिए समय निकालने की हो या ऑफिस मीटिंग में अपनी बात रखने की। अपनी आवाज़ उठाना ही अपने साथ खड़े होने का पहला संकेत है।
जो है उसी में खुश ना रहें : जो मिल जाए उसे ही मुकदर समझने की गलती ना करें। बल्कि जो आपको चाहिए उसकी डिमांड करें। क्यूंकि आपके इसी स्वभाव के कारण आप उस चीज तक नहीं पहुंच पाती हैं, जो आप डिजर्व करती हैं। इसलिए जो मिल रहा है उसी में सेटल ना हो। अगर आपको लगता है कि आपकी सैलरी आपके काम के हिसाब से कम है, तो अपने लिए आवाज उठाए।
सही गलत का फर्क समझें : आपको अपनी वैल्यूज के मुताबिक जिंदगी जीने का पूरा अधिकार है। इसलिए जो चीज आपके लिए सही है उन्हें चुनने में पीछे ना हटे या हिचकिचाएं नहीं। बल्कि ये बात हमेशा ध्यान रखें कि लोग तो आपकी जिंदगी को अपने शर्तो पर चलाने की और बदलने की कोशिश करेंगे, लेकिन आपको आपकी जिंदगी कैसे जीनी है, ये आपकी मर्जी के अनुसार होनी चाहिए। इसलिए किसी अन्य को अपनी जिंदगी और सपनों के बीच में न आने दें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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