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Lung Cancer: स्मोक न करने वालों को भी हो रहा लंग कैंसर, जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय
Causes Of Lungs Cancer In Non Smokers: लंग कैंसर एक गंभीर बीमारी है जिसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल नवंबर माह को नेशनल लंग कैंसर मंथ (National Lung Cancer Month 2025) के रूप में मनाया जाता है। आमतौर पर लोगों को लगता है कि सिगरेट और तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों में लंग कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स भी स्मोकिंग को लंग कैंसर का सबसे बड़ा कारण मानते हैं। हालांकि, भारत में धूम्रपान न करने वाले लोगों में भी फेफड़ों के कैंसर के खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं। कई स्टडी में यह बात सामने आई है कि भारत में ज्यादातर नॉन-स्मोकर्स भी लंग कैंसर का शिकार हो रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि स्मोकिंग न करने बावजूद लोगों में लंग कैंसर का खतरा क्यों बढ़ रहा है? हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंग कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है, जिसके लिए धूम्रपान के अलावा कई अन्य कारण जिम्मेदार हैं। आइए, डॉ. शुभम शर्मा, कंसल्टेंट- पल्मोनोलॉजी, नारायणा अस्पताल, जयपुर, से जानते हैं धूम्रपान न करने वालों में फेफड़ों के कैंसर के कारण, लक्षण और बचाव के बारे में -

धूम्रपान न करने वालों में लंग कैंसर के कारण
भारत में वाहनों, उद्योगों और निर्माण कार्यों से होने वाला वायु प्रदूषण बहुत अधिक है। प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM2।5 और PM10) फेफड़ों तक जाकर वहां सूजन और कोशिकाओं में म्यूटेशन पैदा करते हैं, जिनसे कैंसर विकसित हो सकता है। विशेष रूप से, ग्रामीण भारत में महिलाएं लकड़ी, कोयला जैसे ठोस ईंधन जलाने के कारण घर के अंदर भी जहरीली गैसें और धुआं सांस लेती हैं, जो फेफड़ों के कैंसर का बड़ा कारण बनता है। इसके अलावा, राडॉन गैस, जो जमीन से निकलती है, बंद कमरों में जमा हो सकती है और लंबे समय तक सांस लेने पर कैंसर का खतरा बढ़ा देती है।
पेशेवर कारकों में भी जोखिम होता है। खनन, निर्माण और विनिर्माण उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारी एस्बेस्टस, सिलिका और डीजल धुआं जैसे कार्सिनोजेनिक पदार्थों के संपर्क में आते हैं। इसके अलावा, दूसरे लोगों के धूम्रपान का धुआं (पैसिव स्मोकिंग) भी गैर-धूम्रपान करने वालों में फेफड़ों के कैंसर की संभावना बढ़ाता है। कुछ लोग आनुवंशिक म्यूटेशन के कारण भी इस रोग के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
लंग कैंसर के लक्षण
गैर-धूम्रपान करने वालों में फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर मामूली लगते हैं और सामान्य सर्दी-खांसी या फेफड़ों की अन्य बीमारियों से मिलते-जुलते होते हैं। इनमें लगातार खांसी, खांसी में खून आना, सांस लेने में तकलीफ, छाती में दर्द, वजन घटना, थकावट और बार-बार फेफड़ों में संक्रमण शामिल हैं। चूंकि ये लक्षण जल्दी पहचान में नहीं आते, इसलिए रोग अक्सर एडवांस स्टेज में पता चलता है, जिससे उपचार चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
लंग कैंसर से बचाव के उपाय
धूम्रपान न करने वाले भी फेफड़ों के कैंसर से बचाव के लिए कुछ सावधानियां अपना सकते हैं। सबसे जरूरी है वायु प्रदूषण से बचाव। घर और कार्यस्थल में अच्छी वेंटिलेशन रखें, कमल प्रदूषित क्षेत्रों में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें तथा मास्क पहनें। लकड़ी या कोयला जलाने से बचें या साफ ईंधन का इस्तेमाल करें। अगर नौकरी में खतरनाक धूल व गैसें मौजूद हैं तो सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग अनिवार्य करें। इसके अलावा, दूसरे लोगों के धूम्रपान से बचाव बहुत आवश्यक है। सार्वजनिक और घरेलू जगहों पर तंबाकू-धूम्रपान पर नियंत्रण आवश्यक है। समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं ताकि फेफड़ों की समस्याओं का जल्द पता चल सके। सरकार को भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त नियम लागू करने चाहिए तथा जन जागरूकता बढ़ानी चाहिए।
लंग कैंसर का इलाज
लंग कैंसर का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज की स्थिति कैसी है और कैंसर किस स्टेज में है। शुरुआती स्टेज में सर्जरी की जाती है, जिसमें कैंसर वाले हिस्से को फेफड़ों से निकाल दिया जाता है। इसके बाद कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के माध्यम से कैंसर सेल्स को खत्म किया जाता है। इसके अलावा, आधुनिक इलाजों में इम्यूनोथेरेपी भी शामिल है, जो शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाकर कैंसर से लड़ने में मदद करती है। इसके अलावा, टारगेटेड थेरेपी में कैंसर कोशिकाओं के विशेष मॉलिक्यूल्स को निशाना बनाकर उन्हें खत्म किया जाता है, जिससे सामान्य कोशिकाओं को कम नुकसान होता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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