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Pakhala Dibasa 2025: ओडिशा के पारंपारिक डिश पखाला भात को खाने से दूर रहती है गर्मी, एम्स ने माना इसे सुपरफूड
आज, 20 मार्च 2025, को ओडिशा में पखाला दिवस (Pakhala Dibasa) बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन ओडिशा के पारंपरिक और बेहद लोकप्रिय व्यंजन पखाला भात (Pakhala Bhata) जिसे आम भाषा में तोरानी भी कहते हैं, खास तौर पर बनाया जाता है। यह व्यंजन चावल और पानी का मिश्रण से तैयार होता है, जिसे उसकी सादगी और अनुकूलनशीलता के लिए जाना जाता है।
पखाला भात को कई अलग-अलग तरीकों से बनाया और परोसा जाता है। कुछ लोग इसे दही के साथ मिलाकर खाते हैं, तो कुछ लोग केवल चुटकी भर नमक डालकर इसका आनंद लेते हैं। ओडिशा के साथ-साथ दुनियाभर में फैले ओडिया समुदाय के लोग इस दिन को पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेकर और अपनी सांस्कृतिक जड़ों को याद कर मनाते हैं। आइए इस दिन जानते हैं इसे बनाने का तरीका और खाने के फायदे।

पखाला दिवस का महत्व
पखाला दिवस ओडिशा की समृद्ध पाक विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने का एक अनूठा अवसर है। यह न केवल पारंपरिक व्यंजन पखाला को लोकप्रिय बनाने में मदद करता है, बल्कि ओडिया संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने में भी योगदान देता है।
गर्मियों के मौसम में, जब तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो पखाला का सेवन शरीर को ठंडक देने में सहायक होता है। यह व्यंजन शरीर को गर्मी से राहत दिलाने और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके फर्मेंटेशन की प्रक्रिया के कारण यह आंतों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है। ओडिशा के लोगों के लिए यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि उनके खानपान और संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य इस पारंपरिक व्यंजन को अगली पीढ़ी तक पहुँचाना और इसकी उपयोगिता को आधुनिक जीवनशैली में बनाए रखना है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का पसंदीदा व्यंजन
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक साधारण जीवनशैली अपनाने के लिए जानी जाती हैं और उन्हें पारंपरिक ओडिया व्यंजन पखाला भात बेहद पसंद है। उनकी पसंद के चलते, इस व्यंजन को राष्ट्रपति भवन के मेन्यू में भी शामिल किया गया है।
इसी तरह, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को भी पखाला भात अत्यधिक प्रिय है और यह उनके पसंदीदा व्यंजनों में से एक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पखाला भात न केवल आम लोगों के बीच लोकप्रिय है, बल्कि प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के आहार का भी हिस्सा है।
पखाला भात बनाने की विधि
सामग्री
1 कप चावल
4 कप पानी
½ कटोरी दही
1 छोटा चम्मच नमक
1 छोटा चम्मच नींबू का रस
1 छोटा चम्मच तेल
1 छोटा चम्मच राई
5-6 करी पत्ते
2 सूखी लाल मिर्च
विधि
- सबसे पहले चावल को अच्छे से धोकर पकाएँ और फिर उसे ठंडा होने दें।
- अब चावल को एक बर्तन में डालें और रातभर पानी में भिगोकर रखें। इससे उसमें फर्मेंटेशन हो जाता है।
- अगले दिन, इसमें आधा कटोरी दही मिलाएँ और अच्छे से मिक्स करें।
- अब एक पैन में तेल गर्म करें, उसमें राई, करी पत्ते और सूखी लाल मिर्च डालकर तड़का तैयार करें।
- इस तड़के को पखाला भात में डालें और स्वादानुसार नमक व नींबू का रस मिलाएँ।
- इसे भिंडी भुजिया, आलू भुजिया, साग, पापड़ या अंबुल (खट्टे व्यंजन) के साथ परोसें।
एम्स ने माना इसे सुपरफूड
प्रोफेसर बालमुरुगन रामदास, एम्स के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर क्लीनिकल माइक्रोबायोम रिसर्च के प्रमुख के शोध में यह साबित हो चुका है कि ओडिशा के पारंपरिक व्यंजन 'पखाला' (फर्मेंटेड चावल का माड़) में शॉर्ट-चेन फैटी एसिड (SCFA) होता है। यह आंतों को स्वस्थ रखने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है।
इस व्यंजन में माइक्रोबियल कल्चर और प्रोबायोटिक गुण पाए गए, विशेष रूप से लैक्टोबैसिलस, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है और संक्रमण से बचाने में मदद करता है। उनका शोध कुपोषण और एचआईवी जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है।
पखाला भात के स्वास्थ्य लाभ
शरीर को ठंडक प्रदान करता है - गर्मियों में पखाला खाने से शरीर में ठंडक बनी रहती है और यह हीट स्ट्रोक से बचाव करता है।
प्रोबायोटिक्स से भरपूर - इसमें मौजूद फर्मेंटेड चावल आंतों के लिए फायदेमंद बैक्टीरिया प्रदान करता है, जिससे पाचन तंत्र मजबूत होता है।
इम्यूनिटी बढ़ाता है - यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है और संक्रमण से बचाव करता है।
पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है - इसका नियमित सेवन कब्ज, अपच और गैस जैसी समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है।
आंत संक्रमण से बचाता है - यह आंत में हानिकारक बैक्टीरिया के विकास को रोकता है और संक्रामक बीमारियों से बचाता है।
एंटीवायरल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर - यह शरीर में सूजन को कम करता है और वायरल संक्रमण से बचाव करता है।
डिहाइड्रेशन से बचाव करता है - गर्मियों में यह शरीर को हाइड्रेटेड रखता है और पानी की कमी नहीं होने देता।
हड्डियों को मजबूत बनाता है - इसमें मौजूद पोषक तत्व हड्डियों की मजबूती में सहायक होते हैं।
शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है - यह दिनभर शरीर को ऊर्जावान बनाए रखता है और कमजोरी महसूस नहीं होने देता।
वजन नियंत्रण में मदद करता है - यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे अधिक खाने की आदत कम होती है और वजन संतुलित रहता है।
कुपोषण और गंभीर बीमारियों से लड़ने में सहायक - यह एचआईवी और अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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