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शास्त्रों में कहा है पितृपक्ष में खाएं सात्विक आहार, जानें श्राद्ध में क्या खाए और क्या नहीं?
Pitru Paksha 2023 Do's and Don't Eat : इस साल 29 सितंबर से पितृपक्ष शुरु हो रहे हैं। 15 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष के दौरान हम मृत पूर्वजों की आत्माओं को धन्यवाद देने और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं।
इस समय खानपान से जुड़े कई नियमों की पालना करनी पड़ती है। जिसके पीछे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों ही कारण जुड़े हुए हैं। शास्त्रों के अनुसार इन 15 दिनों तामसिक भोजन से परहेज करने की सलाह दी जाती है। और सात्विक भोजन का ही सेवन करना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार इन दिनों तामसिक खाद्य पदार्थ खाने के बाद शरीर जो यौगिक पैदा करता है, वह पितृ पक्ष संस्कार के दौरान ध्यान को ख़राब कर सकता है। आइए जानते हैं पितृ पक्ष कैसा सात्विक भोजन खाना चाहिए और कैसा नहीं?
पितरों के लिए बनाया जाने वाला भोजन पूर्ण रुप से सात्विक होना चाहिए। सात्विक भोजन यानी संतुलित आहार। ये 15 दिन तामसिक भोजन का त्याग करना चाहिए। क्योंकि इस दिन पितरों के नाम का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है।

सात्विक भोजन का सेवन करें
पितृपक्ष के दौरान हमें सात्विक भोजन का सेवन ही करना चाहिए। सात्विक भोजन में पुड़ी-सब्जी, खीर, मिठाई बनाई जा सकती है। श्राद्ध कर्म बहुत साधारण तरीके से करना चाहिए। लेकिन बात करें सात्विक खाद्य पदार्थों की, तो आप इसमें ये सारी चीजें शामिल होती है-
ब्रेड/साबुत अनाज
फल और सब्जियां
फलों का जूस
दूध
मक्खन और चीज
नट्स
स्प्राउट्स
शहद
हर्बल चाय
बिना प्याज, लहसुन वाली दाल-सब्जियां
ये भोजन होते हैं मान्य
पितृपक्ष में लहसुन व प्याज रहित सात्विक भोजन घर की रसोई में बनाने की सलाह शास्त्र देते हैं। इसमें उड़द की दाल के बड़े, चावल, गाय व भैंस के दूध-घी से बने पकवान, खीर, मौसमी सब्जी (तोरई, लौकी, सीताफल, भिंडी व कच्चे केले की सब्जी) ही भोजन में मान्य है। कई लोगों के यहां पूए भी बनते हैं। श्राद्ध के दौरान सिर्फ भोजन बनाने का महत्व ही नहीं बल्कि आप किस अवस्था में भोजन पका रहे हैं और आप क्या खा रहे हैं। इस पर ध्यान देना बहुत ही जरूरी है।
तिल है जरुरी
भोजन में गंगाजल, दूध, शहद, कुश और तिल सबसे ज्यादा जरूरी है, तिल होने से उसका फल अक्षय होता है। कहा जाता है कि तिल पिशाचों से श्राद्ध की रक्षा करते हैं, इसलिए खाने में तिल का इस्तेमाल किया जाता है।
इन खानें से करें परहेज
पितृपक्ष के दौरान तामसिक खाद्य पदार्थ खाने की मनाही होती है, ये हमारे शरीर में तामसिक तत्वों, जैसे क्रोध, आलस, लोभ, इत्यादि को बढ़ावा देते हैं। इसलिए हमें इन तामसिक खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए।
इस दिन घर में भी मांसाहारी भोजन नहीं बनाना चाहिए और न ही कहीं बाहर सेवन करना चाहिए। इसके अलावा
तामसिक गुण वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करने से बचना चाहिए मांसाहारी या उसकी तरह नजर आने वाले खाद्य पदार्थों जैसे कटहल, सोयाबीन बड़ी और मशरुम आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
इन चीजों से करें परहेज
- मीट
- मछली
- प्याज
- लहसुन
- मशरूम
- ज्यादा या कम पके फल
- एवोकैडो
- तरबूज
- खुबानी
- बेर
- गेंहू
- ब्राउन राइस
- उड़द दाल
- पनीर
- कटहल

कब से हैं पितृपक्ष
हिंदू पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष हिंदी महीने के अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ता है, जिसकी शुरुआत पूर्णिमा से होती है और अमावस्या पर खत्म होती है। इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत 29 सितंबर, शुक्रवार से होने जा रही है और इसका समापन 14 अक्टूबर को होगा। पितृ पक्ष की अवधि में पूर्वजों के निमित्त पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Boldsky इसकी पुष्टि नहीं करता है।)



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