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Prediabetes Symptoms: शरीर में दिख रहे ये 5 लक्षण होते हैं प्री-डायबिटीज का संकेत, इग्नोर करना पड़ सकता है भारी
Prediabetes Symptoms: भारत में डायबिटीज यानी मधुमेह तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। जहां पहले यह समस्या ज्यादातर बुजुर्गों में देखने को मिलती थी, वहीं आजकल युवा और बच्चे भी इसका तेजी से शिकार हो रहे हैं। लेकिन यह बीमारी अचानक नहीं होती, बल्कि इसके पहले एक अवस्था आती है जिसे प्री-डायबिटीज कहा जाता है। यह वह स्थिति है जब आपके रक्त में शुगर का स्तर सामान्य से अधिक होता है, लेकिन इतना नहीं कि उसे डायबिटीज कहा जाए। प्रीडायबिटीज को चेतावनी संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह बताता है कि शरीर में इंसुलिन का प्रभाव कम हो रहा है और ब्लड शुगर नियंत्रण से बाहर जाने लगा है। आज इस लेख में डॉ. अभिनव कुमार गुप्ता, वरिष्ठ सलाहकार - एंडोक्रिनोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली से जानते हैं प्री-डायबिटीज के लक्षण और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से -

किस व्यक्ति को प्री-डायबिटिक कहा जाएगा?
प्री-डायबिटीज की पहचान ब्लड शुगर टेस्ट से की जाती है। यदि किसी व्यक्ति की फास्टिंग ब्लड शुगर 100 से 125 mg/dL के बीच है, HbA1c (पिछले तीन महीनों की औसत शुगर) 5.7% से 6।4% के बीच है, या OGTT टेस्ट में खाने के दो घंटे बाद शुगर लेवल 140 से 199 mg/dL के बीच आता है, तो वह व्यक्ति प्री-डायबिटिक माना जाता है। यह रेंज बताती है कि व्यक्ति डायबिटीज के खतरे के करीब है और उसे अपने जीवनशैली में तुरंत बदलाव की जरूरत है।
प्री-डायबिटीज के लक्षण
प्री-डायबिटीज के लक्षण अक्सर बहुत हल्के होते हैं या कई बार नजर ही नहीं आते। फिर भी कुछ संकेत हैं जो इस स्थिति की ओर इशारा करते हैं, जैसे बार-बार प्यास लगना, पेशाब आना, थकान महसूस होना, पेट के आसपास चर्बी बढ़ना, या स्किन पर काले धब्बे दिखना (खासकर गर्दन या बगल में)। अगर ऐसे लक्षण बार-बार महसूस हों, तो डॉक्टर से सलाह लेकर ब्लड शुगर की जांच जरूर करवानी चाहिए।
किन लोगों में प्री-डायबिटीज का रिस्क ज्यादा होता है?
कुछ लोगों में प्री-डायबिटीज का खतरा अधिक होता है, जैसे जिनके परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, जिनका वजन अधिक है (BMI 25 से ऊपर), जो बहुत कम शारीरिक गतिविधि करते हैं, जिन्हें ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है या जिनकी उम्र 45 वर्ष से अधिक है। महिलाओं में, गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज (Gestational Diabetes) या पीसीओएस होने पर भी यह खतरा बढ़ जाता है।
प्री-डायबिटीज से बचाव के उपाय
वजन कंट्रोल करें
अच्छी बात यह है कि प्री-डायबिटीज को डायबिटीज में बदलने से रोका जा सकता है। इसके लिए सबसे जरूरी है वजन पर नियंत्रण रखना। शोध बताते हैं कि शरीर का सिर्फ 5-7% वजन घटाने से डायबिटीज का खतरा लगभग आधा हो जाता है। उदाहरण के लिए, यदि आपका वजन 80 किलो है, तो सिर्फ 4-5 किलो कम करना भी बड़ा फर्क डाल सकता है।
व्यायाम करें
इसके साथ ही नियमित व्यायाम बहुत जरूरी है। हर दिन कम से कम 30 मिनट तेज़ चलना, साइकिल चलाना, योग या स्ट्रेचिंग करना ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद करता है। व्यायाम से शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है और ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया सुधरती है।
खानपान पर ध्यान दें
खानपान में बदलाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अपने आहार में साबुत अनाज, दालें, हरी सब्जियाँ और फल शामिल करें। प्रोसेस्ड फूड, सफेद ब्रेड, मीठे पेय और जंक फूड से परहेज करें। दिनभर में छोटे-छोटे हिस्सों में 4-5 बार संतुलित खाना खाएँ। भोजन में फाइबर और प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा शामिल करें। यह ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से रोकता है और लंबे समय तक ऊर्जा देता है।
तनाव करें
साथ ही, पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करने के लिए ध्यान, मेडिटेशन या प्राणायाम करें। तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल ब्लड शुगर बढ़ा सकता है, इसलिए मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी है। इसके अलावा, धूम्रपान और शराब से दूरी रखना बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये दोनों इंसुलिन की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं और डायबिटीज का खतरा बढ़ाते हैं।
मेडिकल टेस्ट करवाएं
प्री-डायबिटीज के दौरान नियमित मेडिकल निगरानी भी जरूरी है। हर 3-6 महीने में ब्लड शुगर की जांच करवाई जा सकती है। इसके अलावा, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की निगरानी भी जरूरी है। कुछ मामलों में डॉक्टर समय रहते दवा या सप्लीमेंट्स की सलाह दे सकते हैं।
प्री-डायबिटिक व्यक्ति की दिनचर्या कैसी होना चाहिए?
एक उदाहरण के तौर पर प्री-डायबिटिक व्यक्ति के लिए दिनचर्या इस प्रकार हो सकती है: सुबह उठकर हल्का व्यायाम या तेज़ चलना, नाश्ते में ओट्स, दलिया या फलों का सेवन, दोपहर में सलाद और साबुत अनाज के साथ दाल या चपाती, शाम को हल्का स्नैक और शाम के समय सैर या योग। रात का भोजन हल्का और जल्दी करें। इस तरह की दिनचर्या ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करती है।
प्री-डायबिटीज कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक अवसर है अपने स्वास्थ्य को सुधारने और डायबिटीज जैसी जीवनभर की समस्या से बचने का। अगर आप अभी से अपनी आदतों में सुधार करते हैं, तो आप न केवल डायबिटीज बल्कि उससे जुड़ी हृदय, किडनी और अन्य बीमारियों से भी सुरक्षित रह सकते हैं। डॉक्टरों की सलाह और नियमित जांच के साथ ही सही खानपान और व्यायाम को अपनाकर जीवनशैली को स्वस्थ और सक्रिय बनाया जा सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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