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9 महीने से पहले ही क्यों हो जाती है डिलीवरी? जानें कैसे करें प्रीमैच्योर बेबी की देखभाल
Premature Delivery Causes: मां बनना हर महिला के लिए सबसे सुखद एहसास होता है। प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद से ही गर्भवती महिला अपने आने वाले बच्चे के बारे में चिंतित रहती है। हर गर्भवती महिला का सपना होता है कि उसका बच्चा पूरी तरह स्वस्थ जन्म ले। सामान्य तौर पर गर्भावस्था की अवधि 40 सप्ताह मानी जाती है। लेकिन कई बार कुछ कारणों की वजह से शिशु 37 हफ्तों से पहले ही जन्म ले लेता है। इसे प्रीमैच्योर बर्थ (Premature Birth) कहा जाता है। यह स्थिति मां और शिशु दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि ऐसे बच्चों को कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने का खतरा रहता है। ऐसे में, प्रीमैच्योर बर्थ वाले बच्चों को जन्म के बाद विशेष चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जागरूकता, सही इलाज और समय पर सावधानी से प्रीमैच्योर बच्चों के जीवन को सुरक्षित बनाया जा सकता है। आज इस लेख में डॉ विद्या वी भट्ट, मेडिकल डायरेक्टर, राधाकृष्ण मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, बेंगलुरु से जानते हैं कि प्रीमैच्योर बच्चों की देखभाल कैसे करें?
प्रीमैच्योर (समय से पहले) डिलीवरी के प्रमुख कारण
गर्भावस्था के दौरान कई चिकित्सीय, शारीरिक और जीवनशैली संबंधी कारण प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा बढ़ा सकते हैं। इनमें मुख्य कारण हैं -
मां का स्वास्थ्य: प्रेग्नेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, थायरॉयड असंतुलन या इंफेक्शन के कारण प्रीमेच्योर डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है।
मल्टीपल प्रेग्नेंसी: एक साथ दो या तीन बच्चों की गर्भावस्था में प्रीटर्म लेबर का खतरा अधिक रहता है।
प्लेसेंटा से जुड़ी जटिलताएं: प्लेसेंटा प्रिविया (जब प्लेसेंटा नीचे की ओर होता है) या प्लेसेंटल एब्रप्शन (प्लेसेंटा का समय से पहले अलग होना) जैसी प्लेसेंटा से जुड़ी समस्याएं प्रीटर्म डिलीवरी का कारण बन सकती हैं।
पानी की थैली का फटना (PROM): जब एम्नियोटिक फ्लूड प्रसव शुरू होने से पहले ही निकल जाए।
गर्भाशय या सर्विक्स की कमजोरी: कमजोर गर्भाशय ग्रीवा (cervix) गर्भ को लंबे समय तक संभाल नहीं पाती है, जिससे समयपूर्व डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है।
गलत जीवनशैली की आदतें: जैसे धूम्रपान, शराब सेवन, पोषण की कमी या अधिक मानसिक तनाव।
पहले से समयपूर्व डिलीवरी का इतिहास: जिससे दोबारा जोखिम बढ़ जाता है।
इनमें से कई कारणों की पहचान गर्भावस्था के शुरुआती चरणों में की जा सकती है, जिससे समय रहते प्रबंधन किया जा सके।

प्रीमैच्योर बेबी में आम स्वास्थ्य समस्याएं
जितना कम सप्ताह में बच्चा जन्म लेता है, उतना ही उसका शरीर विकास के शुरुआती चरण में होता है। इससे कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे -
फेफड़े पूरी तरह विकसित न होने के कारण सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
कमजोर निगलने की क्षमता और मांसपेशियों की कमजोरी के कारण खाने-पीने में मुश्किल।
शरीर का तापमान नियंत्रित न कर पाना, जिससे हाइपोथर्मिया का खतरा रहता है।
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण संक्रमण का जोखिम ज्यादा रहता है।
मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं, जैसे ब्रेन ब्लीड या विकास में देरी।
आंख और कान से जुड़ी समस्याएं, जैसे Retinopathy of Prematurity (ROP)।
धीमा विकास, सीखने में कठिनाई या बार-बार बीमार होना।
समय से पहले जन्मे बच्चे की देखभाल कैसे करें?
प्रीमैच्योर बच्चे को जन्म के बाद विशेष चिकित्सा और भावनात्मक देखभाल की जरूरत होती है।
1. एनआईसीयू में देखभाल
ऐसे बच्चे को एनआईसीयू में रखा जाता है, जहां उसकी सांस, तापमान और पोषण की निगरानी की जाती है।
2. कंगारू मदर केयर
मां और बच्चे का त्वचा से त्वचा का संपर्क बच्चे के तापमान को बनाए रखने, वजन बढ़ाने और बंधन मजबूत करने में मदद करता है।
3. ब्रेस्टफीडिंग
मां का दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और संक्रमण से बचाव करता है और। यदि बच्चा सीधे स्तनपान नहीं कर पा रहा हो, तो मां का दूध पंप करके दिया जा सकता है।
4. संक्रमण से सुरक्षा
हाथ धोना, बच्चे को भीड़ से दूर रखना और साफ वातावरण बनाए रखना बेहद जरूरी है।
5. डॉक्टर से फॉलो-अप करें
बच्चे के विकास, वजन, टीकाकरण और माइलस्टोन्स की निगरानी के लिए नियमित डॉक्टर से फॉलो-अप करें।
6. माता-पिता को मानसिक सपोर्ट
प्रीमैच्योर जन्म माता-पिता के लिए भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण समय होता है। ऐसे में परिवार, डॉक्टर और सपोर्ट ग्रुप की मदद लेना जरूरी है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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