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जरूरत से ज्यादा लेंगे विटामिन डी तो सेहत पर होगा कुछ ऐसा असर
जिस तरह शरीर के लिए अन्य विटामिन और मिनरल्स जरूरी होते हैं, ठीक उसी विटामिन डी भी उतना ही आवश्यक है। यह आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। विटामिन डी का मुख्य स्त्रोत सूरज की रोशनी को माना जाता है। इसके अलावा, कुछ फूड आइटम्स व फोर्टिफाइड फूड से भी आपको विटामिन डी मिलता है।
विटामिन डी ना केवल शरीर में कैल्शियम अब्जॉर्बशन में मदद करता है, बल्कि इससे आपका इम्यून सिस्टम भी अच्छा होता है। साथ ही साथ, इससे मूड, मेंटल हेल्थ, स्किन हेल्थ आदि पर भी पॉजिटिव असर पड़ता है। चूंकि वेजिटेरियन्स के पास विटामिन डी के पर्याप्त फूड सोर्स नहीं होते हैं, इसलिए वे विटामिन डी के सप्लीमेंट्स लेते हैं।

हालांकि, अगर शरीर में विटामिन डी बहुत अधिक हो जाता है तो इससे भी आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। विटामिन डी की टॉक्सिसिटी होने पर शरीर में कुछ बदलाव नजर आते हैं, जिसके बारे में आज हम आपको इस लेख में बता रहे हैं-
विटामिन डी के लाभ
विटामिन डी कई मायनों में महत्वपूर्ण माना गया है। मसलन-
• विटामिन डी आंतों में कैल्शियम और फास्फोरस के अवशोषण को बढ़ाकर हड्डियों को हेल्दी बनाता है।
• विटामिन डी इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करने, शरीर को इंफेक्शन और बीमारियों से बचाने में मदद करता है।
• मसल्स फंक्शन और स्ट्रेन्थ के लिए भी विटामिन डी बहुत जरूरी है।
• कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि विटामिन डी रक्तचाप को नियंत्रित करने और हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
• विटामिन डी मूड और मेंटल हेल्थ पर पॉजिटिव असर डाल सकता है।
• पर्याप्त विटामिन डी स्तन, प्रोस्टेट और पेट के कैंसर के रिस्क को कम कर सकता है।
• विटामिन डी इंसुलिन सेंसेटिविटी और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विटामिन डी टॉक्सिसिटी क्या है?
विटामिन डी टॉक्सिसिटी को हाइपरविटामिनोसिस डी भी कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जब आपके शरीर में विटामिन डी का स्तर आवश्यकता से अधिक हो जाता है। कई बार व्यक्ति जरूरत से ज्यादा विटामिन डी सप्लीमेंट्स लेने लगता है। लगातार ऐसा करने से विटामिन डी टॉक्सिसिटी हो सकती है।
विटामिन डी टॉक्सिसिटी से शरीर में बदलाव
किसी भी चीज की अति अच्छी नहीं होती है। ऐसा विटामिन डी के साथ भी होता है। जब जरूरत से ज्यादा विटामिन डी लिया जाता है तो यह कई तरह से इफेक्ट करता है और कुछ बदलाव शरीर में नजर आते हैं-
• जब शरीर में विटामिन डी जरूरत से ज्यादा हो जाता है तो इससे ब्लड में कैल्शियम का अतिरिक्त निर्माण होता है जिसे हाइपरकैल्सीमिया के रूप में भी जाना जाता है। जिससे व्यक्ति को मतली, उल्टी या कमजोरी महसूस होती है।
• जरूरत से ज्यादा विटामिन डी दस्त, कब्ज और पेट में ऐंठन जैसी पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है।
• अत्यधिक विटामिन डी के सेवन से भूख में कमी हो सकती है।
• हाइपरकैल्सीमिया के कारण बॉडी डिहाइड्रेटेड भी हो जाती है।
• विटामिन डी और कैल्शियम के अधिक होने पर बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है।
• लंबे समय तक विटामिन डी टॉक्सिसिटी गुर्दे पर भी असर डालती है। जिससे गुर्दे की पथरी या गुर्दे से संबंधित अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
• बहुत अधिक विटामिन डी मांसपेशियों में कमजोरी और दर्द का कारण बन सकता है। इससे जोड़ों के दर्द की शिकायत भी हो सकती है।
• हाइपरविटामिनोसिस डी से थकान और सामान्य कमजोरी महसूस हो सकती है।
• अत्यधिक विटामिन डी मूड पर असर डाल सकता है, जिससे चिड़चिड़ापन और मूड में बदलाव हो सकता है।
• गंभीर मामलों में, विटामिन डी की अधिकता हृदय को भी प्रभावित कर सकती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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