दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के मामले, जानें बच्चों में H1N1 के लक्षण और बचाव के उपाय

Swine Flu H1N1 Outbreak: देश में H1N1 इंफ्लूएंजा यानी स्वाइन फ्लू विकराल रूप लेने की कगार पर है। दिल्ली और बैंगलोर समेत कई राज्यों में H1N1 के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी के मद्देनजर स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्थिति पर नजर तेज कर दी है। खासतौर पर, दिल्ली में इस साल संक्रमण के मामलों में काफी तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है। दिल्ली में 12 अगस्त तक H1N1 के 1,449 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 21 अगस्त तक यह संख्या बढ़कर करीब 1,777 पहुंच गई। इसी को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 21 अगस्त को अधिकारियों के साथ बैठक कर मौजूदा स्थिति और अस्पतालों की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षणों (ILI), गंभीर श्वसन संक्रमण (SARI), टेस्टिंग, लैब सर्विलांस और मरीजों के इलाज की व्यवस्था पर चर्चा हुई। स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने लगातार निगरानी, समय पर बीमारी की पहचान और अस्पतालों को पहले से तैयार रखने पर जोर दिया।

Swine Flu In Children

H1N1 स्वाइन फ्लू इंफ्लूएंजा क्या है?

H1N1 एक तरह का इंफ्लूएंजा A वायरस है, जिसे आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू कहा जाता है। इसका नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इसके कुछ शुरुआती वायरस सूअरों में पाए गए थे। साल 2009 में H1N1 के एक नए स्ट्रेन के कारण दुनियाभर में महामारी फैली थी। WHO ने जून 2009 में इसे महामारी घोषित किया और अगस्त 2010 में महामारी का दौर खत्म होने की घोषणा की। इसके बाद यह वायरस मौसमी इंफ्लूएंजा के वायरस में शामिल हो गया। अधिकतर स्वस्थ लोग फ्लू से कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में संक्रमण गंभीर हो सकता है। खासकर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में जटिलताओं का खतरा ज्यादा हो सकता है।

H1N1 संक्रमण कैसे फैलता है?

H1N1 संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकलने वाली ड्रॉपलेट के जरिए दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। संक्रमित सतह को छूने के बाद बिना हाथ साफ किए आंख, नाक या मुंह छूने से भी संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। वायरस मुख्य रूप से सांस की नली को प्रभावित करता है। इसी वजह से इसके लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश और सांस से जुड़ी परेशानियां शामिल हो सकती हैं।

शरीर में पहुंचने के बाद क्या करता है वायरस?

H1N1 वायरस सांस के रास्ते शरीर में प्रवेश करता है और श्वसन तंत्र की कोशिकाओं को संक्रमित कर सकता है। संक्रमण के जवाब में शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र सक्रिय होता है। कुछ गंभीर मामलों में ज्यादा सूजन होने से फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में सांस लेने में परेशानी, ऑक्सीजन की कमी और निमोनिया जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। हालांकि, हर H1N1 मरीज में ऐसी गंभीर स्थिति नहीं बनती।

स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण क्या हैं?

H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के लक्षण आमतौर पर सामान्य सीजनल फ्लू जैसे ही होते हैं और कई बार अचानक शुरू होते हैं। इनमें शामिल हैं:
तेज बुखार और ठंड लगना
खांसी और गले में खराश
सिरदर्द
मांसपेशियों या शरीर में दर्द
कमजोरी और ज्यादा थकान
नाक बहना या बंद होना
कुछ बच्चों में उल्टी या दस्त जैसी शिकायत भी हो सकती है।

डॉक्टर के पास कब जाएं?

हल्के लक्षण होने पर स्वस्थ व्यक्ति को हर बार अस्पताल जाने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, लगातार चक्कर आना, बहुत ज्यादा कमजोरी, भ्रम की स्थिति या हालत तेजी से बिगड़ रही हो तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए। बच्चों में तेज सांस चलना, सांस लेने में परेशानी, होंठ या चेहरा नीला पड़ना, पानी की कमी, असामान्य सुस्ती या हालत बिगड़ना गंभीर संकेत हो सकते हैं। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और अस्थमा, डायबिटीज, हृदय रोग या कमजोर इम्यूनिटी जैसी स्थितियों वाले लोगों को फ्लू के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से जल्दी सलाह लेना बेहतर है।

बच्चे को स्वाइन फ्लू से कैसे बचाएं?

बच्चों में फ्लू का संक्रमण तेजी से फैल सकता है, इसलिए अगर आसपास H1N1 के मामले बढ़ रहे हों तो माता-पिता को कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।
बच्चे को बुखार, खांसी या फ्लू जैसे लक्षण हैं तो उसे स्कूल न भेजें और पर्याप्त आराम करने दें।
बच्चों को साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोने की आदत डालें।
खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या कोहनी से ढकना सिखाएं।
बच्चे को बार-बार आंख, नाक और मुंह छूने से रोकें।
फ्लू से बचाव के लिए उपलब्ध वैक्सीन के बारे में बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार टीकाकरण कराएं।
घर में किसी के बीमार होने पर बच्चे को उसके बहुत करीब जाने से बचाएं और इस्तेमाल की जाने वाली सतहों की सफाई रखें।
H1N1 संक्रमण होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न दें।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Saturday, August 22, 2026, 12:09 [IST]
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