पैर के अंगूठे में काला धागा बांधने से खत्‍म हो जाएगी ये पुरानी बीमारी, मिलेगा ये चमत्‍कारी फायदा

nabhi khiskane ko kaise roke: आपने कई बार देखा होगा कि लोग अपने पांव के अंगूठे के पर काला धागा बांधते हैं लेकिन आप जानते हैं कि लोग ऐसा क्यों करते हैं। आपको बता दें कि कई लोगों का मानना है क‍ि काला धागा पहनने से व्यक्ति को बुरी नजर और क‍िसी तरह दोष नहीं लगता है।

वैसे आपको बता दे क‍ि पांव के अंगूठे में काला धागा बांधने से न सिर्फ बुरी नजर से बचाव होता है बल्कि ये एक तरह का उपचार भी है जो नाभि खिसकना या धरण बैठ जाने जैसे स्थित‍ि को भी दूर करता है। आइए जानते हैं पांव के अंगूठे में काला धागा बांधने के स्‍वास्‍थ्‍य और धार्मिक दृष्टि से फायदे।

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नाभि नहीं खिसके इसल‍िए बांधते है

नाभि को मानव शरीर का केंद्र माना जाता है। नाभि स्थान से शरीर की बहत्तर हजार नाड़ियों जुड़ी होती है। यदि नाभि अपने स्थान से खिसक जाती है तो शरीर में कई प्रकार की समस्या पैदा हो सकती है। कहा जाता है कि नाभि खिसकने से रोकने के लिए पैर के अंगूठे में काला धागा बांधने से नाभि बार बार नहीं खिसकती है। इस उपाय से आपकी नाभि खिसकने की समस्‍या नहीं होगी।

कैसे खिसक जाती है नाभि

चलते- फिरते हुए हाथ -पांव में किसी प्रकार झटका लग जाए या फिर सीढि़या चढ़ते-उतरते चलते समय ढीला पांव पड़ने से नाभि में स्थित समान वायु चक्र अपने स्थान से दाएं-बाएं या उपर-नीचे खिसक जाती है तो इसे नाभि का टलना भी कहा जाता है। जिसकी वजह पेट दर्द ,पेचिस-पतले दस्त ,पेट आम जाना पेट फूलना जैसी प्रॉब्‍लम हो सकती है। वैसे नाभि पुरुषो में बायीं तरफ और स्त्रियों में दायी ओर टला करती है।

nabhi khiskane ko kaise roke

नाभि खिसकने की वजह

- यदि पेट की मांसपेशियां कमजोर होती है तो नाभि खिसकने की समस्या ज्यादा होती है।
- इसके अलावा शरीर की मांस पेशियों पर एक तरफ अधिक भार पड़ने से भी धरण यानी नाभि खिसक जाती है।
- सावधानी से दाएं या बाएं झुकना।
- संतुलित हुए बिना अचानक एक हाथ से वजन उठाना।
- चलते हुए अचानक ऊंची नीची जगह पर पैर पड़ना।
- खेलते समय गलत तरीके से उछलना।
- तेजी से सीढ़ी चढ़ना या उतरना।
- ऊंचाई से छलांग लगाना।

ऐसे बांधे

जिस हाथ की छोटी अंगुली की लंबाई कम हो उस हाथ सीधा करें। हथेली ऊपर की तरफ हो। अब इस हाथ को दुसरे हाथ से कोहनी के जोड़ के पास से पकड़ें। अब पहले वाले हाथ की मुट्ठी कस कर बंद करें। इस मुट्ठी से झटके से अपने इसी तरफ वाले कंधे पर मारने की कोशिश करें। कोहनी थोड़ी ऊंची रखें। ऐसा दस बार करें। अब अंगुलियों की लंबाई फिर से चेक करें। लंबाई का फर्क मिट गया होगा। यानि नाभि अपने स्थान पर आ गई है। यही ऐसा नहीं हुआ तो एक बार फिर से यही क्रिया दोहराएं।

ज्‍योतिषीय कारण

-काला धागा धारण करने से हमें रात को कोई भी डरावने सपने नहीं आते हैं। कभी भी हमें बुरी आत्माए परेशान नहीं करती है।

- इससे हम सभी दोष से भी पीछे रहते हैं जिससे कि शनि का प्रकोप हमारे ऊपर नहीं पड़ता।

वैज्ञानिकों ने भी यह माना है कि काला रंग ऊष्मा का अवशोषक होता है। इसीलिए काले रंग का धागा धारण करने से ये हमको बुरी नज़र से बचाता है। जिससे कि काला धागा हमारे शरीर के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करता है।

वैज्ञानिक कारण

काला धागा बांधने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। हमारा शरीर पंच तत्वों से मिलकर बना है। ये पंच तत्व हैं- पृथ्वी, वायु, अग्नि, जल और आकाश। इनसे मिलने वाली ऊर्जा हमारे शरीर का संचालन करती हैं। इनसे मिलने वाली ऊर्जा से ही हम सभी सुविधाओं को प्राप्त करते हैं। जब किसी इंसान की बुरी नजर हमें लगती है तब इन पंच तत्वों से मिलने वाली संबंधित सकारात्मक ऊर्जा हम तक नहीं पहुंच पाती है। इसीलिए गले में काला धागा बांधा जाता है। दरअसल कुछ लोग काले धागे में भगवान के लॉकेट भी धारण करते हैं जिसे बेहद शुभ माना जाता है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Sunday, July 9, 2023, 11:00 [IST]
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