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Navratri Fasting: नवरात्री में मिलावटी कट्टू का आटा खाने से खंडित हो सकता है व्रत, ऐसे करें असली-नकली में फर्क
शारदीय नवरात्री में कई लोग 9 दिन तक मां को प्रसन्न करने के लिए उपवास रखते हैं। और इस दौरान कुट्टू के आटे का सेवन करते हैं। इस दौरान कुट्टू के आटे की बढ़ती डिमांड की वजह से मुनाफाखोर बाजार में नकली कट्टू के आटे को असली बताकर बेचना शुरु हो जाते हैं। नकली कट्टू के आटे को खाने से न सिर्फ सेहत बिगड़ती है बल्कि इसकी वजह से व्रत भी खंडित हो जाता है।
ऐसे में हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं जिससे आप नवरात्री में आसानी से कट्टू के आटे की मिलावट की पहचान करके व्रत को खंडित होने से बचा सकते हैं

क्या होता है कुट्टू का आटा
कुट्टू को अंग्रेजी में Buckwheat कहा जाता है। इसका किसी भी तरह के अनाज से कोई संबंध नहीं होता है। कुट्टू या बकवीट का लैटिन नाम फैगोपाइरम एस्कलूलेंट है और पोलीगोनेसिएइ परिवार का पौधा है। कुट्टू को उसी तरह से प्राप्त किया जाता है जैसे किसी पौधे से फल या बीजों को प्राप्त किया जाता है। कुट्टू के बीजों को पीसकर उसका आटा बनाया जाता है जिसे कुट्टू का आटा कहते हैं। भारत में कुट्टू को कई जगहों पर उगाया जाता है जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड।
कुट्टू के आटे में मौजूद पौषक तत्व
कुट्टू के आटे में प्रोटीन, मैग्नीशियम, आयरन, कैल्शियम, फॉलेट, मैंगनीज और फास्फोरस पाया है। कुट्टू का आटा ग्लूटन फ्री होता है और इसमें मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। साथ ही ये ब्लड शुगर लेवल को भी सुधारने का काम करता है। आपको बता दे...
कैलोरी- 343
पानी- 10 फीसदी
प्रोटीन-13.3 ग्राम
कार्ब्स- 71.5 ग्राम
शुगर-0 ग्राम
फाइबर- 10 ग्राम
फैट- 3.4 ग्राम
पानी से कैसे करें पहचान
पानी द्वारा कुट्टू के आटे की पहचान करना सबसे आसान तरीका है। एक कांच के ग्लास को आधा पानी से भरना होगा। इसके बाद पानी में एक चम्मच आटा डालें। अगर कुट्टू के आटे में किसी प्रकार की मिलावट की गई होगी तो अन्य चीजें पानी में तैरने लगेंगी और आटा नीचे बैठ जाएगा।
लेबल पढ़ें
अगर आप पैकेट वाला कुट्टू का आटा खरीद रही हैं तो लेबल पढ़ना न भूलें। साथ ही FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) का हॉलमार्क जरुर देखें। FSSAI खाद्य पदार्थो की शुद्धता का प्रमाण देता है। लेबल से पता चल जाएगा कि कुट्टू के आटे में क्या-क्या मिलाया गया है।
रंग से पहचानें
कुट्टू के असली आटे की पहचान उसके रंग से की जा सकती है। कुट्टू के आटे का रंग गहरा भूरा होता है। अगर कुट्टू के आटे में किसी प्रकार की मिलावट है या वो खराब हो गया है तो सबसे पहला उसका रंग बदल जाता है। इस स्थिति में कुट्टू के आटे का रंग ग्रे या हल्का हरा हो सकता है। इसके अलावा खराब या मिलावटी कुट्टू का आटा गूंथते वक्त बिखर जाता है।
ज्यादा दिन तक स्टोर न करें
कुट्टू एक प्रकार का अनाज है या एक प्रकार का चावल भी कह सकते हैं, जो ठंडे इलाकों में पाया जाता है। कुट्टू का मेडिकल नाम फैगोपाएरम एफक्यूलैंटम है। इसे अंग्रेजी में बकव्हीट कहते हैं। कुट्टू का आटा नवरात्र के व्रत में खाया जाता है। यह बहुत पोष्टिक माना जाता है लेकिन इसे ज्यादा दिन तक रखने से इसमें फंगस की समस्या भी आ सकती हैं। इसलिए इसे ज्यादा दिन स्टोर करने से बचें। अगर आप कुट्टू के आटे को फ्रिज में रखते हैं तो यह लगभग 3 महीने तक सही रह सकता है। इसके अलावा कुट्टू के आटे को हमेशा सूरज की रोशनी और मॉइश्चर से दूर रखना चाहिए। वहीं, कुट्टू के बीजों की शेल्फ लाइफ लगभग 6 महीना होती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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