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अमेरिका में टीनएजर्स को शिकार बना रहा है पॉपकॉर्न लंग्स, वेपिंग बनी वजह, जानें क्या है ये डिजीज
What Is Popcorn Lung : हाल ही में अमेरिका में एक 17 वर्षीय किशोरी को पॉपकॉर्न लंग्स (Popcorn Lung) नामक गंभीर फेफड़ों की बीमारी से ग्रस्त पाया गया। वह पिछले तीन वर्षों से वेपिंग कर रही थी। अचानक उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी और जब अस्पताल में जांच कराई गई, तो डॉक्टरों ने पाया कि वह ब्रोंकियोलाइटिस ऑब्लिटरन्स से पीड़ित है, जिसे आमतौर पर 'पॉपकॉर्न लंग्स' कहा जाता है।

पॉपकॉर्न लंग्स क्या है?
पॉपकॉर्न लंग्स एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक फेफड़ों की बीमारी है, जिसे मेडिकल भाषा में Bronchiolitis Obliterans कहा जाता है। यह बीमारी तब होती है जब फेफड़ों की सबसे छोटी वायुमार्ग, यानी ब्रोंकियोल्स में सूजन आ जाती है और वहां स्कार टिश्यू (घाव जैसा टिश्यू) बन जाता है। यह स्थिति वायुप्रवाह को रोकती है और व्यक्ति को सामान्य रूप से सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है।
इस बीमारी का नाम 'पॉपकॉर्न लंग्स' इसलिए पड़ा क्योंकि यह पहली बार उन श्रमिकों में देखा गया था जो माइक्रोवेव पॉपकॉर्न फैक्ट्री में काम करते थे। वे लंबे समय तक एक फ्लेवरिंग एजेंट 'डायसिटिल' (Diacetyl) के संपर्क में रहे थे, जिससे उनके फेफड़ों को नुकसान पहुंचा। डायसिटिल का उपयोग कई फ्लेवरड वेपिंग लिक्विड्स में भी किया जाता है, जिससे आजकल यह बीमारी युवा वेपिंग करने वालों में पाई जा रही है।
लक्षण क्या हैं?
पॉपकॉर्न लंग्स के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं और समय के साथ गंभीर हो सकते हैं। इसके मुख्य लक्षण हैं:
- सांस लेने में तकलीफ, खासकर शारीरिक गतिविधि के दौरान
- सूखी खांसी जो लंबे समय तक बनी रहती है
- थकान और कमजोरी, ऑक्सीजन की कमी के कारण
- सीने में जकड़न या दर्द
- बुखार और त्वचा पर रैश
- सीने में घरघराहट जैसी आवाज
ये लक्षण अस्थमा या क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) जैसे रोगों से मिलते-जुलते हैं, इसलिए सही निदान के लिए डॉक्टर से मिलना बेहद जरूरी होता है।
पॉपकॉर्न लंग्स के कारण और जोखिम कारक
डायसिटिल और अन्य हानिकारक रसायन: यह केमिकल मुख्य रूप से फ्लेवरड ई-सिगरेट्स, पॉपकॉर्न बनाने वाले फैक्ट्रियों और कुछ औद्योगिक सेटअप में पाया जाता है।
वेपिंग या ई-सिगरेट का उपयोग: विशेषकर फ्लेवरड वेप लिक्विड्स में डायसिटिल की मौजूदगी पाई जाती है, जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है।
फेफड़ों का इन्फेक्शन या ट्रांसप्लांट: कुछ मामलों में गंभीर फेफड़ों के संक्रमण या लंग ट्रांसप्लांट के बाद भी ब्रोंकियोलाइटिस ऑब्लिटरन्स हो सकता है।
क्लीनिंग एजेंट्स और धूल के कणों से संपर्क: ऐसे वातावरण में रहने या काम करने से भी यह बीमारी हो सकती है।
इससे बचाव कैसे करें?
वेपिंग और ई-सिगरेट से दूर रहें: यह आदत युवाओं में तेजी से बढ़ रही है लेकिन इसके दुष्परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं।
हानिकारक केमिकल्स से बचाव करें: यदि कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के रसायनों से संपर्क होता है, तो मास्क और सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग करें।
धूम्रपान से परहेज करें: सिगरेट और तंबाकू से भी फेफड़ों को नुकसान होता है, जिससे पॉपकॉर्न लंग्स जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
नियमित हेल्थ चेकअप कराएं: अगर सांस लेने में दिक्कत या लगातार खांसी हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें। तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
निष्कर्ष
पॉपकॉर्न लंग्स एक गंभीर लेकिन रोकी जा सकने वाली बीमारी है, जिसका मुख्य कारण वेपिंग और हानिकारक रसायनों का संपर्क है। युवाओं में बढ़ती वेपिंग की आदत से इस बीमारी के मामले भी बढ़ रहे हैं। जागरूकता और समय पर सावधानी बरतने से इस घातक स्थिति से बचा जा सकता है। अगर आप या आपके आसपास कोई व्यक्ति वेपिंग करता है, तो इस विषय पर खुलकर बात करें और उन्हें इसके खतरों से अवगत कराएं। स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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