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मकरासन, शयनासन से कमर दर्द राहत
पीठ दर्द, सरवाइकल, कमर दर्द आदि में मकरासन और बाल शयन आसन बेहद फायदेमंद हो सकते हैं. ये आसन बेहद सरल हैं और लेटकर किए जाते हैं.शुरुआत हम मकरासन और बाल शयन आसन से करेंगे क्योंकि यह विश्रामात्मक भी है और हमारी रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों को दूर करते हैं.
यह आसन सभी उम्र के लोग कर सकते हैं. जब भी आप विश्राम के मूड में हों तो इन दोनों आसनों का भरपूर लाभ लीजिए.

कैसे करें मकरासन
पेट के बल लेट जाइए. दोनों पैरों को मिलाकर रखिए. अपने कंधे और सिर को उठाइए और दोनों हाथों की कलाई को मिलाकर ठुड्डी के नीचे रखें.
उंगलियों को गाल के साथ लगाकर रखिए. दोनों कोहनियों को मिलाकर रखिए. अगर गर्दन या रीढ़ में असहनीय खिंचाव आए तो उस स्थिति में आप दोनों कोहनियों के बीच में थोड़ा फासला दे सकते हैं. ऐसा करने पर खिंचाव को सहन किया जा सकेगा.
अगर सरवाइकल या गर्दन कि पिछले हिस्से पर दर्द है तो कोहनियों को ठुड्डी के आगे रखिए, अगर कमर में दर्द या थकान है तो कोहनियों को पीछे की ओर यानी ठुड्डी की सीध में ज़मीन पर रखिए.
ध्यान रीढ़ की ओर लगाकर रखें और खिंचाव को महसूस करें. खिंचाव सहन न किया जा सके तो दोनों हथेलियों को ठुड्डी से हटाकर ज़मीन पर रखिए.
ऐहतियात
एक-दूसरे के ऊपर और दाएँ गाल को हथेलियों पर रखें. इस स्थिति में दोनों पैरों में एक से दो फुट का अंतर रखें और पैरों को पलटकर इस प्रकार रखिए कि पैरों की उंगलियाँ बाहर की तरफ और एक-दूसरे की विपरीत दिशा में रहें.
मकरासन से स्लिप डिस्क, श्याटिका और सरवाइकल के दर्द में लाभ मिलता है. आप सुविधानुसार मकरासन की अवधि तय कर सकते हैं. इस आसन को दो-तीन बार दोहराया जा सकता है.
मकरासन सरल होते हुए भी स्लिप डिस्क, श्याटिका और सरवाइकल के दर्द में अच्छे परिणाम देता है क्योंकि मकरासन दो कशेरुकाओं के बीच के दबाव को कम करता है.
दमा या सांस संबंधी रोगों में लाभ मिलता है. मकरासन की स्थिति में फेफड़ों में फैलाव आता है और ज़्यादा शुद्ध हवा का आदान-प्रदान होता है.
बाल शयनासन
पेट के बल लेट जाएँ. दाएँ पैर के घुटने को दायीँ तरफ मोड़ें ताकि घुटना छाती के करीब आ जाए. दायीं बाजू को भी कोहनी से मोड़ें और दायीं हथेली को चेहरे के करीब रखें. गर्दन को भी दायीं ओर मोड़ें और ज़मीन पर टिकाकर आँखें बंद कर लें.
बायाँ पैर सीधा रहेगा, बायीं बाजू को भी शरीर के साथ सीधा रखें. आँखें बंद ही रखें और पूरे शरीर को ढीला छोड़ दीजिए. कुछ पल इसी अवस्था में विश्राम करें. इसके बाद बाल शयन आसन का अभ्यास बायीं ओर से भी करें. सांस सामान्य रहेगी, सांस की सजगता बनाए रखिए.
विश्राम की दृष्टि से जब तक चाहें आप बल शयन आसन कर सकते हैं. पेट के बल लेटकर इस आसन में नींद भी ले सकते हैं.
शयनासन के लाभ
इस आसन से आंतों में हल्का खिंचाव महसूस होगा जिससे आंतों की हरकत बढ़ जाती है और कब्ज दूर होता है. श्याटिका के दर्द में बाल शयन आसन करने से पैरों की नसों को आराम मिलता है.
जब भी हम लेटकर पीछे झुकने वाले आसन करते हैं तो हर आसन के अंतराल में हमें बाल शयन आसन करना चाहिए. उदाहरण के तौर पर अगर आप मकरासन या भुजंगासन करते हैं तो उसके पश्चात बालशयन आसन करने से संतुलन बना रहता है.
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[योग प्रशिक्षक सिद्धार्थ प्रसाद का विशेष कार्यक्रम आप हर शनिवार और रविवार सुन सकते हैं सुबह साढ़े छह बजे बीबीसी हिंदी सेवा के 'आज के दिन' कार्यक्रम में. यह कार्यक्रम और यह लेख आपको कैसा लगा. आप अपनी राय हमें [email protected] पर भेज सकते हैं]
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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