Latest Updates
-
गलती से भी पास-पास न रखें मनी प्लांट और तुलसी का पौधा, वरना कंगाली के साथ आ जाएंगी ये 3 बड़ी मुसीबतें -
इस एक श्राप की वजह से अविवाहित कपल्स नहीं कर सकते जगन्नाथ मंदिर में दर्शन, आप भी जान लें रहस्य -
Varalakshmi Vrat के दिन लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, जानें क्या करें, क्या न करें और सूतक के नियम -
क्या 1876 जैसी तबाही फिर होगी? 150 साल बाद लौट सकता है विनाशकारी अल नीनो! सूखा और अकाल का खतरा -
बरसात में भूलकर भी न खाएं ये 10 सब्जियां, वरना शरीर बन सकता है बीमारियों का घर -
अनचाहे गर्भ से बचने के लिए कौन-सा तरीका है सबसे सुरक्षित? एक्सपर्ट से जानें पूरी जानकारी -
World Population Day 2026 Quotes: 'आबादी पर लगाम, तरक्की को सलाम', इन कोट्स व स्लोगन से फैलाएं जागरूकता -
अमिताभ बच्चन बने पॉलिसीबाजार के ब्रांड एंबेसडर, शुरू हुआ भारत का सबसे बड़ा इंश्योरेंस जागरुकता अभियान -
बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगी ये दवाएं, अल्कोहल की मात्रा को लेकर सरकार ने लागू किया कड़ा नियम -
World Population Day 2026: 11 जुलाई को ही क्यों मनाया जाता है जनसंख्या दिवस? जानिए इतिहास-महत्व और थीम
सदमे के तुरंत बाद सोने से बना रहेगा तनाव
येरूशलम, अक्सर लोगों को जब कोई मानसिक आघात लगता है तो उसे भूलने के लिए वे सो जाते हैं। उन्हें लगता है कि सो जाने से उन्हें उस बुरी घटना को भूलने में मदद मिलेगी लेकिन एक अध्ययन में इससे बिल्कुल उलट बात सामने आई है।

अध्ययन में पाया गया है कि अगर आप कोई मानसिक आघात लगने के फौरन बाद के कुछ घंटे सोने से बचते हैं तो इससे सदमे के बाद के तनाव का खतरा कम करने में मदद मिलती है। नेगेव के बेन गुरिओं विश्वविद्यालय और तेल अवीव विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का यह अध्ययन न्यूरोसाइकोफार्मेसोलॉजी नामक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में छपा है।
अध्ययनकर्ता प्रोफेसर हैगिट कोहेन ने कहा, अक्सर किसी बुरी घटना से हुआ तनाव भुलाने के लिए लोग नींद का सहारा लेते हैं। उन्हें लगता है कि इससे उन्हें आराम मिल सकेगा। सदमे के बाद नींद का सहारा लेने से पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करने के लिए यह प्रयोग किया गया।
प्रयोगों में पाया गया कि जो चूहे किसी घातक घटना (शिकारी को देखकर उपजा तनाव) के तुरंत बाद सोए नहीं, उनके व्यवहार में बाद में उस घटना से उपजा तनाव देखने को नहीं मिला। जबकि जिन चूहों को ऐसी किसी घटना के तुरंत बाद सुला दिया गया उनके व्यवहार में उस घटना से उपजा तनाव साफ तौर पर देखने को मिल रहा था। कोहेन का कहना है कि इंसान को अपनी जिंदगी में कई तनावों से गुजरना पड़ता है और उनमें से लगभग 15 से 20 प्रतिशत ऐसे होते हैं जो इस तनाव को अपने व्यवहार में लंबे समय तक शामिल कर लेते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications