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छू हो जाए डिप्रेशन
आजकल लोंगो में इतना ज्यादा डिप्रेशन हो गया है कि वे ना अपने ऑफिस का काम सही ढंग से कर पाते हैं और ना ही घर पर सुकून से रह पाते हैं। ना केवल बडे़ ही लोग बल्कि छोटे बच्चे भी इस बीमारी का शिकार बहुत तेजी से हो रहे हैं। योगा ही एक ऐसी दवा है, जिसको प्रयोग करने से किसी भी प्रकार का नुक्सान नहीं होता। इसलिये आइये जानते हैं कुछ ऐसे आसन जिससे आप डिप्रेशन को झट से भगा सकते हैं।

मयूरासन
उकडू मुद्रा में बैठ जाएं। घुटने कुछ कुछ दूरी पर रखें। पैर पास में हों। आगे झुकें और हाथों को फर्श पर रखें जिससे उंगलियां पीछे पैरों की ओर इंगित करती हैं। बाजू के अग्रभाग को इकट्ठा दबाएं और पेट को कोहनियों का सहारा दें। छाती को भुजाओं के साथ रखें। टांगों को उठाएं और संतुलन बनाएं। शरीर के ऊपरी भाग और टांगों को एक सीध में ले आएं। शरीर का भार और संतुलन अब केवल हाथों पर ही निर्भर है। इस स्थिति में कुछ देर रहें और प्रारंभिक स्थिति में लौट आएं।
लाभः यह फेफडों, यकृत, अग्नाशय और गुर्दों का शक्तिवर्धन करता है। संतुलन और एकाग्रता सुधारता है।
संतुलासन
टांगों को सीधा करके बैठें और टांगों को इस प्रकार मोडें कि पैर के तलवे फर्श पर टिक जाएं! सिर के पीछे उंगलियों को पकड लें और कोहनियों को पीछे की ओर दबाएं! पीठ सीधी रहे! सांस लेते हुए धड को थोडा सा पीछे की ओर झुकाएं! दोंनो टांगों को सीधा करें और उन्हें तब तक उठाएं जब तक धड और टांगें समकोण ना बनाएं! सांस रोकते हुए इस स्थति में बनें रहें! सांस रोकते हुए इस स्थिति में लौट आएं!
लाभः यह आसन टांग, पेट और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करता है और नाडी तन्त्र को मजबूत करता है! जीवन उर्जा प्रवाह को बढाता है!
भ्रामरी प्राणायाम
पद्मासन में बैठ जाएं। आंखें बंद रखें और पहली उंगली से कान के छेदों को भी बंद कर दें। अब मुंह बंद कर के नाक से लंबा सांस लें। नाक से भंवरे की तरह आवाज करें और उसकी तंरगों को मस्तिष्क में महसूस करें।
प्राणमुद्रा
कनिष्ठा और अनामिका दोनों को मोड कर अंगूठे से स्पर्श करें।
लाभः शारीरिक मानसिक दृष्टि से इतना शक्तिशाली हो जाता है कि कोई भी बीमारी आक्रमण नहीं कर सकती। रक्त संचार बढ़ कर रक्त नलिकाओं की रूकावट दूर करता है।
अनुलोम विलोम
पदृमासन में बैठ जाएं। दांए हाथ से नासिकाग्र मुद्रा लगाएं, अंगूठे से दाईं नासिका को दबाएं और बाईं से सांस लें। अब बाईं नासिका को बंद कर के दाईं को खोलें और सांस बाहर निकालें। अब दाईं से लेकर बाई से निकालें। इस तरह से बहुत धीमी गति के साथ रोज अभ्यास करें।
शशांकासन
वज्रासन में बैठें, हाथ जांघों पर रखें। सिर सीधा और आराम में हो। श्वास लेते हुए दोंनों बाजुओं को सिर के उपर उठाएं। श्वास छोडते हुए पीठ को सीधा रखें और बाजुओं को आगे झुकाएं, जब तक बाजू और मस्तक फर्श को छूने न लगे। नितंब एडियों पर रहेंगे। सामान्य श्वास लेते हुए इस पोजीशन में कुछ देर तक रहें। श्वास लेते हुए पीठ सीधी रखें और धड तथा बाजुओं को ऊपर उठाएं। श्वास छोडते हुए प्रारंभिक स्थिति में लौट आएं।
लाभः सिर की रक्तापूर्ति में सुधार करता है इसलिये आंखों और दिमाग को पुष्ट करता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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