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6 सेकण्ड में एक व्यक्ति की मौत तम्बाकू सेवन से
कोलकाता: ऐसा माना जाता है की ध्रूमपान आत्महत्या का एक माध्यम है। एक आकलन के अनुसार हर 6 सेकण्ड में एक व्यक्ति की मौत तम्बाकू सेवन से होती है। और ये भी माना जाता है कि जो व्यक्ति तम्बाकू सेवन करते है उनमें से आधे लोग तम्बाकू से होने वाली बीमारी से मर जायेंगे। तम्बाकू उत्पादों जैसे कि सिगरेट पर दिखने वाली चेतावनी महज औपचारिकता रह गई है। और ये लोगों को तम्बाकू सेवन से रोकने में नाकाफी है।
आर जी स्टोन यूरोलाजी एण्ड लैप्रोस्कोपी हास्पिटल कोलकाता के चीफ यूरोलॉजिस्ट डा. अमितावा मुर्खजी के अनुसार तम्बाकू सेवन लोगों के लिये सबसे बड़ा अभिषाप है। तम्बाकू सेवन दुनिया भर में तकरीबन 6 मिलियन लोगों को मौत के घाट उतार देता है जिसमें 5 मिलियन लोग तम्बाकू के सेवन से व 6 लाख लोग गौण रूप से तम्बाकू के सेवन करने का कारण मौत को गले लगा लेते है।
सिगार, सिगरेट, बीड़ी या हुक्का वाले तम्बाकू के धूम्रपान से हानिकारक रसायन मूत्राशय में एकत्र होते है जिससे मूत्राशय के कैंसर की संभावना होती है। धूम्रपान के दौरान हमारा शरीर इन हानिकारक रसायनों को साथ क्रिया करके इन्हें मूत्राशय में जमा कर लेता है जो कि मूत्राशय की नली को नुकसान पहुंचाते हैं और कैंसर की संभावना बढ़ा देते हैं।
डा. अमितावा मुर्खजी ने बताया कि मूत्राशय के कैंसर की संभावना उम्र के साथ बढ़ जाती है। ये 40 से कम उम्र के लोगों में आम तौर पर नहीं पाया जाता है। ये तुलनात्मक रूप से पुरूषों में अधिक पाया जाता है। अतिरिक्त कारण जिनकी वजह से मूत्राशय कैंसर के होने की संभावना बढ़ती है वे हैं हानिकारक रसायन जोकि किडनियों से छन कर मूत्राशय तक पहुंच जाते हैं जिनमें कैंसर विरोधी दवा साइटोक्सान और विकिरण उपचार मुख्य है।

मूत्राशय कैंसर होने की संभावना
हालंकि धूम्रपान करने वालों को बाकी लोगों की तुलना में मूत्राशय का कैंसर होने का तीन गुना अधिक खतरा होता है। जब व्यक्ति धूम्रपान करता है तो कैंसर पैदा करने वाले रसायन धुयें से फेफड़ों के सहारे खून में मिल जाते हैं। खून से होते हुये ये हमारे गुर्दे में मिल जाता है जहां पर एकाग्र मात्रा में मूत्र बनता है। ये रसायन मूत्राशय की सेल लाइन को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

गुर्दे का कैंसर
डा. अमितावा मुर्खजी के अनुसार धूम्रपान से धीरे धीरे गुर्दे का कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होनें कहा कि धूम्रपान करने से धमनी के अस्तर में बदलाव आ जाता है जिससे जलन के कारण धमनीकलाकाठिन्य की बीमारी हो जाती है और मरीज के खून की आपूर्ति गुर्दों तक ठीक से नहीं हो पाती।

दिल्ली एवं मुंबई से अधिक युवा मरीज
पहले गुर्दें के कैंसर व अन्य गुर्दे की बीमारियों से केवल वृद्ध लोग ग्रसित होते थे लेकिन अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहा है। एक अध्ययन के अनुसार दिल्ली में 2.5 प्रतिषत से अधिक एवं मुंबई के 2.3 से अधिक युवा मरीज इन मरीज इन बीमारियों से ग्रस्त हैं। गुर्दे का कैंसर पुरूषों में स्त्रियों की तुलना अधिक पाया जाता है।

युवाओं में बढ़ता स्मोकिंग का क्रेज
युवाओं में धूमपान के बढ़ते क्रेज को समझते हुये डा. अमितावा मुर्खजी ने पाया कि धूम्रपान करने वालों में कमर हार्निया की बीमारी हो जाती है जिससे उनके पाचन क्रिया पर असर पड़ता है। हार्निया एक ऐसी अवस्था है जिसमें पेट की मांसपेषिया छाती को ओर बढ़ने लगती है।

क्या बोलते हैं डा. भीमसेन बंसल
आर जी स्टोन यूरोलाजी एण्ड लैप्रोस्कोपी हास्पिटल के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर डा. भीमसेन बंसल के अनुसार किसी प्रकार का भी तम्बाकू सेवन बीमारी को दावत देता है जिसमें दिल की बीमारी, फेफड़ों के कैंसर, अग्नाषय का कैंसर, किडनी के कैंसर, मूत्राशय के कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।

30-70 वर्ष उम्र के पुरुषों की मौत कैंसर से
एक विस्तृत अध्ययन की रिपोर्ट के बावजूद, कि भारत में 30-70 वर्ष उम्र के पुरुषों में कैंसर से होने वाली 42 प्रतिषत से अधिक मौत तम्बाकू से संबंधित थी जबकि महिलाओं में कैंसर से होने वाली 15 प्रतिषत से अधिक मौत इससे संबंधित थी ।

भारत में तंबाकू का बाजार बढ़ रहा है
भारत में तम्बाकू का बाजार विष्व स्तर पर सालाना 8.5 प्रतिषत की दर से बढ़ रहा है और संसद में पेष की गयी एक रिपोर्ट से पता चला है कि कई वर्ष में घरेलू सिगरेट की खपत में 4.5 प्रतिषत की वृद्धि हुई है।

तंबाकू छोड़ने के लिये कैंसर का इंतजार क्यों?
तंबाकू छोड़ने के उल्लेखनीय परिणाम देखे गये हैं और इसे जल्द से जल्द छोड़ना बेहतर है। एक अध्ययन के अनुसार 50 की उम्र में धूम्रपान को रोकने पर समग्र कैंसर का खतरा आधा हो जाता है जबकि 30 की उम्र में धूम्रपान को रोकने पर इसके सभी खतरों से बचा जा सकता है। वह कहते हैं, ‘‘हमें यह पता है कि हर कोई तंबाकू छोड़ सकता है लेकिन सवाल यह है कि हम इसे छोड़ने के लिए कैंसर का इंतजार क्यों कर रहे हैं।''



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