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30 की उम्र में आवश्यक मेडिकल जाँचें
अगर आपकी उम्र 30 के आसपास है तो तीस की उम्र पहुँचने से पहले आपकी जाँचों की पूरी सूची होती है। उस सूची में ऐसी चीजें हैं जिनके लिये हमारे पास कभी वक्त नहीं रहा। अब शायद छुट्टियाँ बिताने, नृत्य सीखने, स्काई डाइविंग करने या फिर मेडिकल जाँचे करवाने का वक्त आ गया है।
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लेकिन जब आप मेडिकल जाँचों के बारे में सोचते हैं तो यह समझ में नहीं आता कि कौन सी जाँचे करवायें। परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है, डॉ ध्वनिका कपाडिया और डॉ प्रकाश लुल्ला हमें 30 वर्षीय वयस्क के लिये मेडिकल जाँचों सम्बन्धी सभी जानकारियाँ दे रहे हैं।
पुरूषों और महिलाओं के लिये मेडिकल जाँचें

1. खून की मूल जाँचें
अपना ब्लड काउन्ट, हीमोग्लॉबिन मात्रा श्वेत रक्त कणिकाओं की संख्या जानना जरूरी होता है। खून की जाँच विटामिन बी12 या डी3 जैसी किसी प्रकार की पोषण सम्बन्धी कमी को भी उजागर कर देगी।

2. रक्त शर्करा जाँच
मधुमेह की सम्भावनाओं को नकारने के लिये रक्त शर्करा की जाँच जरूरी है। हीमोग्लॉबिन के ग्लाइकेशन की जाँच (रक्त में प्लास्मा शर्करा की मात्रा को चिन्हित करता है)। हीमोग्लॉबिन का ग्लाइकेशन मधुमेह और हृदय सम्बन्धी रोगों से सम्बन्धित होता है।

3. मूत्र की जाँच
किसी प्रकार के संक्रमण को नकारने के लिये।

4. यूरिक अम्ल की जाँच
खासतौर से यदि आपके जोड़ों में दर्द हो। यूरिक अम्ल की उच्च मात्रा से गाउट (जोड़ों की सूजन) हो जाता है जोकि युवा पुरूषों में सामान्य समस्या है।

5. यकृत और गुर्दे की जाँच
इनकी जाँच इस बात के लिये ये भलीभाँति कार्य कर रहें हैं। इससे यह पता चल जायेगा कि आपके शरीर में हार्मोन स्तर सामान्य है और आपके एन्जाइम भी क्रियाशील हैं या नहीं।

6. क्रियेटिनिन स्तर की जाँच
यह जानने के लिये कि आपके गुर्दे भलीभाँति कार्य कर रहें हैं या नहीं। इसमें क्रियेटिनिन स्तर को जाँचने के लिये रक्त की जाँच की जाती है।

7. लिपिड प्रोफाइल और ईसीजी
यदि आप बहुत क्रियाशील नहीं हैं तो लिपिड प्रोफाइल की जाँच करायें। आरम्भ से ही अपने ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्राल पर नजर रखने से भविष्य में होने वाली किसी प्रकार हृदय सम्बन्धी रोग को रोका जा सकता है। ईसीजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम) की सलाह तभी दी जाती है जबकि आप के शरीर में थकावट, पसीना आना, बेचैनी और हृदय में दर्द जैसे लक्षण हों। इसे भविष्य में सन्दर्भ के रूप में प्रयोग करने के लिये किया जाता है।

8. सामान्य शारीरिक परीक्षण
रक्तचाप और भार जैसे जरूरी जाँचें भी करवायें।

9. महलियाओं के लिये खास जाँचें- थायरॉइड की जाँच
महिलाओं में थायराइड एक सामान्य समस्या है। थायरॉइड ग्रन्थि में हार्मोन की कमी या अधिकता से थायरॉइड की समस्या या बिमारी होती है। इससे तेजी से भार बढ़ता या घटता है। यदि आपको थकावट और तेजी से भार में कमी या अधिकता लगे तो इस जाँच को अवश्य करायें।

10. सोनोग्राफी
सोनोग्राफी से यह पता चलता है कि यकृत, गुर्दे, अण्डाशय और गर्भाशय सही कार्य कर रहे हैं। इससे यह भी पता चलता है कि आपके सभी एन्जाइम सही काम कर रहे हैं। सोनोग्राफी से पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज़ (पीसीओडी) या ओवेरियन सिस्ट की सम्भावनाओं को नकारा जा सकता है।



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