Latest Updates
-
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Jayanti: छत्रपति संभाजी महाराज की जयंती पर अपनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal 14 May 2026: मेष और सिंह राशि वालों की चमकेगी किस्मत, जानें गुरुवार को किन राशियों पर होगी धन वर्षा -
Prateek Yadav Death: प्रतीक यादव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, इस मेडिकल कंडीशन के चलते हुई मौत -
PCOS का नाम बदलकर हुआ PMOS, जानिए क्या है इसका मतलब और क्यों रखा नया नाम -
प्रतीक यादव ने ऐसे किया था अपर्णा यादव को प्रपोज, 10 साल बाद हुई थी दोनों की शादी, बेहद फिल्मी है लव स्टोरी -
Sonia Gandhi Health Update: सोनिया गांधी की तबीयत बिगड़ी, गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती -
कौन थे प्रतीक यादव? जानें अखिलेश यादव के भाई की कैसे हुई मौत, कितनी संपत्ति के मालिक थे, परिवार में कौन-कौन -
Apara Ekadashi Vrat Katha: अपरा एकादशी के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, सभी पापों और प्रेत योनि से मिलेगी मुक्ति -
Apara Ekadashi 2026 Wishes In Sanskrit: अपरा एकादशी पर अपनों को भेजें ये मंगलकारी संस्कृत संदेश और दिव्य श्लोक -
Apara Ekadashi 2026 Wishes: अपरा एकादशी पर प्रियजनों को भेजें भगवान विष्णु के आशीर्वाद भरे ये शुभकामना संदेश
गुस्सा आता है, तो स्वस्थ हैं आप!
(आईएएनएस)| आम तौर पर यह माना जाता है कि क्रोध तन और मन दोनों के लिए नुकसानदायक होता है, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि कुछ संस्कृतियों में गुस्सा बुरे नहीं बल्कि अच्छे स्वास्थ्य का संकेत होता है। अध्ययन में पता चला है कि अत्यधिक क्रोध को जापानी लोग बेहतर जैविक स्वास्थ्य से जोड़कर देखते हैं।
गुस्सा कंट्रोल करने का उत्तम तरीका
यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के मनोविज्ञानी शिनोबु कितायामा के मुताबिक, "क्रोध को बुरे स्वास्थ्य से जोड़कर देखना आमतौर पर पश्चिमी संस्कृति का हिस्सा है, जहां गुस्से को निराशा, निर्धनता, निम्न जीवन स्तर और उन सभी कारकों से जोड़कर देखा जाता है, जो स्वास्थ को नुकसान पहुंचाते हैं।"

शोधकर्ताओं ने अमेरिका और जापान में एकत्र किए गए आंकड़ों का अध्ययन किया। उन्होंने अच्छे स्वास्थ्य के स्तर को मापने के लिए उत्तेजना और हृदय से जुड़ी गतिविधियों का अध्ययन किया, जिन्हें पूर्व में किए गए शोधों में क्रोध की भावना से जोड़कर देखा जाता रहा है।
पतियों की कौन सी बातों पर गुस्सा करती हैं पत्नियों
अध्ययन में पाया गया कि अमेरिका में अत्यधिक क्रोध को जैविक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है, जैसा कि पूर्व के शोधों में भी कहा गया है। वहीं, जापान में अत्यधिक क्रोध को जैविक स्वास्थ्य के खतरे के स्तर में गिरावट लाने और अच्छे स्वास्थ्य की निशानी से जोड़कर देखा जाता है।
कितायामा ने कहा, "इन अध्ययनों से पता चलता है कि सामाजिक-सांस्कृतिक कारक भी जैविक प्रक्रियाओं को महत्वपूर्ण ढंग से प्रभावित करते हैं।" यह अध्ययन जर्नल साइकोलॉजिकल साइंस में प्रकाशित हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications