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रंगीन और खुशबुदार टॉयलेट पेपर इस्तेमाल करने के दुष्परिणाम
कुछ दशकों पहले तक भारत में टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल कुछेक वर्ग के द्वारा ही किया जाता था। उस समय इसके फायदे और नुकसान करने के बारे में न ही किसी को जानकारी थी और न ही इसके बारे में जानने क दिलचस्पी।
समय बदला और भारत में शौच सम्बंधी जागरूकता के बाद यहां के लोग भी पश्िचमी देशों की तरह टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल करने लगे।
इन दिनों कॉर्पोरेट स्थानों, मॉल, एयरपोर्ट, होटल या रेस्टोरेंट में इनका इस्तेमाल काफी बढ़ गया है।

हाईजीन के हिसाब से भी लोग अब इनका इस्तेमाल घरों में करने लगे हैं। इन दिनों टॉयलेट पेपर का कारोबार इस कदर बढ़ गया है कि कई देशों में इसका निर्माण तेजी से होता है और इसकी बिक्री भी काफी बढ़ गई है। इसे कई रंगों और खुशबुओं में बनाया जाने लगा है। ऐसा लोगों को ज्यादा से ज्यादा आकर्षित करने के लिए किया जा रहा है।
हालांकि, हाल ही में एक रिसर्च से स्पष्ट हुआ है कि कलर्ड टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल करने से कई प्रकार की शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं। इससे निम्न समस्याएं हो सकती हैं:

1. यूरेथ्रा में संक्रमण -
इस प्रकार के टॉयलेट पेपर में सेंट और कलर मौजूद होता है जोकि आपके यूरेथ्रा जैसे नाजुक हिस्से को नुकसान पहुँचा सकता है और यहां संक्रमण, सूजन या दर्द दे सकता है।

2. यीस्ट संक्रमण -
महिलाओं में ये संक्रमण टॉयलेट पेपर, खासकर रंगीन टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल करने से हो सकता है। इससे योनि वाले हिस्से में फंगस संक्रमण हो सकता है और खुजली आदि भी हो सकती है। साथ ही पेट में दर्द और गंदी सी बदबू वाला सफेद चिपचिपा पदार्थ भी योनि से निकल सकता है।

3. रेक्टल संक्रमण -
खुशबुदार और कलर्ड टॉयलेट पेपर से रेक्टल संक्रमण हो सकता है और ये कैमिकल वहां की त्वचा पर भी दाने या खुजली पैदा कर सकता है।

4. सर्विकल कैंसर -
शोधों से यह पता चला है कि कलर्ड और सेंटेड पेपर के इस्तेमाल सर्विकल कैंसर का खतरा बहुत बढ़ जाता है।



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