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आयुर्वेद के अनुसार जानें भस्म में छुपे हैं कौन-कौन से गुण
आयुर्वेद के एक्सपर्ट का मानना है कि इसके पीछे वैज्ञानिक महत्ता भी है। भस्म का उपयोग एक औषधि के रूप में भी होता है |
पूजा के बाद मस्तक पर लगाई जाने वाली भस्म या विभूति का अपना ही महत्व है। भस्म को घी, जड़ी बूटियां, अनाज और कई अन्य पवित्र चीजों के साथ जलाकर बनाया जाता है।
सांस्कृतिक रूप से हम इसे काफी पवित्र मानते हैं और इसे अपने माथे पर लगाते हैं और यह भारत में हिंदू धर्म में काफी प्रचलित परंपरा है।सामान्य मान्यता यह है कि यह पवित्र भस्म हमें अशुभ ताकतों से बचाती है, लेकिन आयुर्वेद के एक्सपर्ट का मानना है कि इसके पीछे वैज्ञानिक महत्ता भी है।
भस्म का उपयोग एक औषधि के रूप में भी होता है | बहुत सी आयुर्वेदिक औषधियों में इसका इस्तमाल काफी बढ़ चढ़ कर किया जाता है। यह शारीर कि नमी को सोख लेती है और सर्दी, जुकाम, सिरदर्द आदि नहीं होने देती। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि पवित्र भस्म में क्या क्या गुण चुपे हुए हैं तो जरुर पढ़ें नीचे।

सिरदर्द में कारगर
चीन की एक्युप्रेशर विज्ञान के अनुसार हमारी आईब्रो के बीच की जगह अभिसरण तंत्रिकाएं होती हैं और इस जगह पर मसाज करने से सिरदर्द में राहत मिलती है। माथे पर भस्म लगाने से आपको सिर दर्द में राहत मिलती है क्योंकि भस्म लगाने से आपके माथे पर सूर्य की किरणें अधिक पहुंचती हैं।

आपको सकारात्मक रखती है
तीसरी आंख आपके भीतर अचेतन मन को दर्शाती है जहां तमाम विचार इकट्ठा होते हैं। ऐसे में यहां नकारात्मक उर्जा की वजह से नकारात्मक विचार इकट्ठा होते हैं। लिहाजा जब आप यहां भस्म को लगाते हैं तो आपके भीतर नकारात्मक विचार नहीं आते हैं।

ठंड से बचाता है
आयुर्वेद में भस्म की तासीर को ठंडा माना जाता है और यह शरीर के भीतर की अतिरिक्त ठंड को खीच लेती है जो आपको ठंड से बचाता है।

शरीर के भीतर उर्जा के माध्यमों को खोलता है
शरीर के भीतर कई उर्जा के चैनल होते हैं, ऐसे में भस्म लगाने से यह उन चैनल्स को खोलने का काम करता है जिसके बाद आपके शरीर के भीतर नई उर्जा का संचार होता है और आपके शरीर के भीतर मौजूद सभी सातों चक्र सक्रिय हो जाते हैं। सभी चक्र के सक्रिय होने से आपका स्वास्थ्य बेहतर रहता है।



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