Latest Updates
-
कौन हैं हरीश राणा, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने दी इच्छामृत्यु की अनुमति? जानिए 13 साल से कोमा में क्यों थे -
Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी पर चाय पी सकते हैं या नहीं? जानें व्रत से जुड़े सभी जरूरी नियम -
Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी के दिन झाड़ू लगाना शुभ या अशुभ? बसौड़ा पर भूलकर भी न करें ये गलतियां -
Sheetala Ashtami 2026: 11 या 12 मार्च, कब है शीतला अष्टमी? जानिए सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
Sheetala Ashtami Vrat Katha: शीतला अष्टमी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, घर में आएगी सुख-समृद्धि -
Sheetala Ashtami 2026 Wishes: मां शीतला का आशीर्वाद बना रहे...इन संदेशों के साथ अपनों को दें बसौड़ा की बधाई -
कौन हैं संजू सैमसन की पत्नी चारुलता रमेश? टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद क्रिकेटर ने लिखा भावुक पोस्ट -
रणदीप हुड्डा बने पापा, लिन लैशराम ने बेटी को दिया जन्म, इंस्टाग्राम पर शेयर की क्यूट फोटो -
Kalashtami 2026: 11 या 12 मार्च, कब है कालाष्टमी का व्रत? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
गर्मियों में वजन घटाने के लिए पिएं ये 5 ड्रिंक्स, कुछ ही दिनों में लटकती तोंद हो जाएगी अंदर
रिसर्च में हुआ खुलासा शराब की वजह से किशोरों बढ़ रहा है फैटी लीवर डिजीज
एक अध्ययन के अनुसार, समय से पहले फार्मूला मिल्क शुरू करने वाले शिशुओं को किशोरों की तुलना में लीवर डिजीज का खतरा अधिक रहता है।
एक अध्ययन के अनुसार, समय से पहले फार्मूला मिल्क शुरू करने वाले शिशुओं को किशोरों की तुलना में लीवर डिजीज का खतरा अधिक रहता है।
नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज (एनएफ़एडीडी) एक ऐसी बीमारी है, जिसने हर चार में से एक युवा को अपनी चपेट में लिया हुआ है।
ऐसा तब होता है, जब उन लोगों की लीवर सेल्स में फैट जमा हो जाता है, जो अत्यधिक शराब का सेवन नहीं करते हैं और इसे आमतौर पर मोटापे व इंसुलिन रेसिस्टेंट से जोड़ा जाता है।

ऐसा माना जाता है कि जो बच्चे छह महीनों तक ब्रेस्टफीडिंग नहीं करते और इस समय से पहले फार्मूला मिल्क लेना शुरू कर देते हैं उनके इस बीमारी से पीड़ित होने की 40 फीसदी संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा गर्भावस्था के प्रारंभ में मोटापे से ग्रस्त बच्चों को इस रोग का खतरा अधिक होता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख शोधकर्ता ओयोकॉआ टी अयोनरिन्डे के अनुसार, मां का स्वस्थ वजन और ब्रेस्टफीडिंग कराने के साथ देखभाल से बच्चे के लीवर को लाभ होता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, कम से कम छह महीने तक ब्रेस्टफीड कराने से बच्चे को अधिक सपोर्ट मिलता है और इस तरह के रोगों का खतरा कम रहता है।

इस अध्ययन की दिलचस्प बात यह है कि, गर्भावस्था के शुरू होने पर जो महिलाएं स्मोकिंग करती थी, उनके बच्चे में एनएफ़एडीडी के काफी अधिक जोखिम देखे गए थे।
हेपेटोलॉजी के जर्नल में दिए गए इस अध्ययन के लिए, टीम ने 17 वर्ष से अधिक आयु के 1,100 से अधिक किशोरों पर लीवर अल्ट्रासाउंड किया।
अध्ययन में इस बात पर जोर दिया गया कि महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान और बाद में हेल्दी लाइफस्टाइल जरूरी है। इसके अलावा ब्रेस्टफीडिंग कराने के कई स्वास्थ्य फायदे हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











