विश्व कुष्ठ निवारण दिवस पर जानें इसके 7 लक्षण

हर साल 23 जनवरी को पूरे विश्‍व में कुष्ठ निवारण दिवस मनाया जाता है। कुष्ठ रोग या कोढ़ को पुराने जमाने से ही छुआ छूत का रोग माना जाता था।

हर साल 23 जनवरी को पूरे विश्‍व में कुष्ठ निवारण दिवस मनाया जाता है। कुष्ठ रोग या कोढ़ को पुराने जमाने से ही छुआ छूत का रोग माना जाता था इसलिये आज के दिवस को मनाने का सबसे बड़ा कारण है लोंगो के प्रति जागरूकता फैलाना।

यह न तो वंशागत है और न ही दैवीय प्रकोप बल्कि यह एक रोगाणु से होता है। साथ ही ना तो यह रोग छूने से फैलता है। आइये आज विश्व कुष्ठ निवारण दिवस पर हम जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर कुष्ठ रोग के लक्षण क्‍या होते हैं।

 भौंहें गायब होना

भौंहें गायब होना

सबसे पहला लक्षण जो देखने को मिलता है वह है कि रोगी की 1/3 तक भौंहें गायब होना शुरु हो जाती हैं।

 घावों से हमेशा मवाद बहना

घावों से हमेशा मवाद बहना

घावों से हमेशा मवाद का बहना। घाव का ठीक ना हो पाना। खून का घावों पर से निकलते रहना

त्‍वचा पर दाग

त्‍वचा पर दाग

त्‍वचा पर एक रंगहीन दाग जो थोड़ा या पूरी तरह स्‍पर्शहीन हो या उस दाग पर किसी चुभन का अनुभव नहीं होना।

उंगलियां और अंगूठे सुन्‍न हो जाना

उंगलियां और अंगूठे सुन्‍न हो जाना

नसों के संक्रमण की वजह से उंगलियों और अंगूठों में सुन्‍नपन आ जाना। बाद में इनमें स्‍पर्श महसूस ना होना।

हाथ पैर कमजोर होना

हाथ पैर कमजोर होना

नसों की खराबी की वजह से हाथों और पैरों में ताकत ना रहना, जिस वजह से कोई भी चीज़ आसानी से पकड़ने की शक्‍ती खतम हो जाना।

आंखे ना झपका पाना

आंखे ना झपका पाना

आंखों की पलको को झपकाने में दिक्‍कत होना। ऐसा इसलिये क्‍योंकि वाइरस का अटैक नसों पर हो चुका होता है और नसें कमजोर हो चुकी होती हैं।

 श्वसन संक्रमण

श्वसन संक्रमण

कुछ मामलों में, यहां तक कि श्वसन संक्रमण की वजह से नाक की श्लैष्मिक परत को नुकसान पहुंच सकता है।

Story first published: Monday, January 30, 2017, 13:55 [IST]
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