Latest Updates
-
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि में क्या करें और क्या नहीं? जानें सभी जरूरी नियम -
हरीश राणा का आखिरी 22 सेकेंड का वीडियो वायरल, अंतिम विदाई देख रो पड़े लोग -
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि से पहले घर ले आएं ये 5 चीजें, घर में बनी रहेगी सुख-समृद्धि -
बॉलीवुड एक्ट्रेस मधु मल्होत्रा का 72 की उम्र में निधन, 'सत्ते पे सत्ते' और 'हीरो' जैसी फिल्मों में किया था काम -
Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के पहले दिन कैसे करें घटस्थापना? जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूरी विधि -
इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं खाना चाहिए खीरा, सेहत को फायदे के बजाय हो सकता है गंभीर नुकसान -
Gudi Padwa 2026: 19 या 20 मार्च कब है गुड़ी पड़वा? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व -
Phool Dei 2026 Wishes: 'फूलदेई छम्मा देई'... पहाड़ी स्टाइल में दें बधाई, भेजें ये कुमाऊंनी और गढ़वाली विशेज -
Papmochani Ekadashi Vrat Katha: पापमोचनी एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, सभी पापों का होगा नाश और मिलेगी मुक्ति -
Papmochani Ekadashi Wishes: विष्णु जी का आशीर्वाद मिले...पापमोचनी एकादशी पर प्रियजनों को दें ये शुभकामना संदेश
विश्व कुष्ठ निवारण दिवस पर जानें इसके 7 लक्षण
हर साल 23 जनवरी को पूरे विश्व में कुष्ठ निवारण दिवस मनाया जाता है। कुष्ठ रोग या कोढ़ को पुराने जमाने से ही छुआ छूत का रोग माना जाता था।
हर साल 23 जनवरी को पूरे विश्व में कुष्ठ निवारण दिवस मनाया जाता है। कुष्ठ रोग या कोढ़ को पुराने जमाने से ही छुआ छूत का रोग माना जाता था इसलिये आज के दिवस को मनाने का सबसे बड़ा कारण है लोंगो के प्रति जागरूकता फैलाना।
यह न तो वंशागत है और न ही दैवीय प्रकोप बल्कि यह एक रोगाणु से होता है। साथ ही ना तो यह रोग छूने से फैलता है। आइये आज विश्व कुष्ठ निवारण दिवस पर हम जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर कुष्ठ रोग के लक्षण क्या होते हैं।

भौंहें गायब होना
सबसे पहला लक्षण जो देखने को मिलता है वह है कि रोगी की 1/3 तक भौंहें गायब होना शुरु हो जाती हैं।

घावों से हमेशा मवाद बहना
घावों से हमेशा मवाद का बहना। घाव का ठीक ना हो पाना। खून का घावों पर से निकलते रहना

त्वचा पर दाग
त्वचा पर एक रंगहीन दाग जो थोड़ा या पूरी तरह स्पर्शहीन हो या उस दाग पर किसी चुभन का अनुभव नहीं होना।

उंगलियां और अंगूठे सुन्न हो जाना
नसों के संक्रमण की वजह से उंगलियों और अंगूठों में सुन्नपन आ जाना। बाद में इनमें स्पर्श महसूस ना होना।

हाथ पैर कमजोर होना
नसों की खराबी की वजह से हाथों और पैरों में ताकत ना रहना, जिस वजह से कोई भी चीज़ आसानी से पकड़ने की शक्ती खतम हो जाना।

आंखे ना झपका पाना
आंखों की पलको को झपकाने में दिक्कत होना। ऐसा इसलिये क्योंकि वाइरस का अटैक नसों पर हो चुका होता है और नसें कमजोर हो चुकी होती हैं।

श्वसन संक्रमण
कुछ मामलों में, यहां तक कि श्वसन संक्रमण की वजह से नाक की श्लैष्मिक परत को नुकसान पहुंच सकता है।



Click it and Unblock the Notifications











