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हिचकी में रानी मुखर्जी को है टॉरेट सिंड्रोम, अखिर ये है क्या?
बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी हाल ही में रिलीज हुई अपनी नई फिल्म हिचकी को लेकर काफी चर्चा में हैं। इस फिल्म में वह एक ऐसे महिला के चरित्र भूमिका में है जिसे टॉरेट सिंड्रोम है।
इस बीमारी नाम चर्चा में आने के बाद हर कोई जानना चाहता है कि टॉरेट सिंड्रोम क्या है। टॉरेट सिंड्रोम एक ऐसी बीमारी है जो तंत्रिक तंत्र को प्रभावित करती है।

इसके कारण लोग अचानक ही हरकत या आवाज करने लगते हैं, जिसे टिक्स कहा जाता है और इसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति टॉरेट सिंड्रोम से पीड़ित है तो वह अपनी पलकों को बार-बार झपकाएगा या हर समय अपना गला साफ करता रहेगा।
इस बीमारी से पीड़ित कुछ लोग अचानक ही जोर से बोलने लगते हैं जबकि वे ऐसा जानबूझकर नहीं करते हैं।

टॉरेट सिंड्रोम का कारण क्या है?
टॉरेट सिंड्रोम होने का सटीक कारणों अभी तक पता नहीं चल पाया है।लेकिन यह एक जटिल तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारी है जोकि बचपन में ही शुरू होती है। यह सिंड्रोम मस्तिष्क के विभिन्न भागों से जुड़ा होता है, जिसमें बेसल ग्रैंग्लिया नामक क्षेत्र भी शामिल है, जोकि शरीर की चाल को नियंत्रित करने का काम करता है। यह सिंड्रोम मस्तिष्क को संदेश पहुंचाने वाली तंत्रिका कोशिकाओं और रसायनों को प्रभावित करता है। टॉरेट सिंड्रोम होने का कारण आनुवांशिक और पर्यावरणीय कारक हो सकते हैं।

टॉरेट सिंड्रोम कैसे होता है?
टॉरेट सिंड्रोम एक आनुवांशिक बीमारी है। यह कोई संक्रामक बीमारी नहीं है जो टॉरेट सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैल जाये। यह आमतौर पर वंशानुगत बीमारी है और यह शिशुओं में अधिक आम है।

टॉरेट सिंड्रोम के लक्षण
इस बीमारी का शुरूआती लक्षण टिक्स है। इसके लक्षण हल्का और काफी गंभीर हो सकते हैं। इस बीमारी के हल्के लक्षण जल्दी पहचान में नहीं आते हैं।जबकि बातचीत करने में दिक्कत, दैनिक क्रियाकलापों को करने में परेशानी इस बीमारी के गंभीर लक्षण हैं।

टिक्स दो तरह के होते हैं
-सिंपल टिक्स
ये अचानक, थोड़े समय के लिए और बार-बार होते हैं, जो सीमित संख्या में मांसपेशियों के समूह में शामिल रहते हैं।

-कॉम्पलेक्स टिक्स
ये अलग-अलग और कोऑर्डिनेटेड पैटर्न वाली गति के होते हैं जो कई मांसपेशियों के समूह में शामिल होते हैं।
इसके अलावा टिक्स के प्रकार, फ्रीक्वेंसी और गंभीरता की स्थिति भिन्न-भिन्न होती है। यदि आप बीमार, तनाव और चिंता में हैं या अधिक उत्तेजित हैं तो यह और अधिक गंभीर हो जाता है। नींद के दौरान टिक्स हो सकता है और यह समय के साथ बदलता रहता है। टीनएज के शुरूआत में टिक्स अधिक घातक होता है और वयस्क होते-होते इसमें सुधार आने लगता है।
टॉरेट सिंड्रोम का लक्षण भी एडीएचडी का हो सकता है। एक व्यक्ति को ध्यान देने में परेशानी हो सकती है, साथ ही इसके कारण डिस्लेक्सिया, चिंता, और ओसीडी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

टॉरेट सिंड्रोम का इलाज
यदि आपका बच्चा अजीब हरकतें या आवाज कर रहा है तो उसे तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट के पास ले जाएं। यदि यह बीमारी गंभीर नहीं हुई तो दवाएं के जरिए टॉरेट सिंड्रोम के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।



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