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आप भी सर्दियों में रजाई में सिर ढंककर सोते हैं, तो ये खबर आपके भले के लिए है
अलग-अलग तरह के लोगों का अलग-अलग तरह की सोने की आदतें हैं, क्योंकि वो अपनी कम्फर्ट के अनुसार सोना पसंद करते है, लेकिन क्या आप जानते है कि आपके सोने की आदत आपके लिए खतरनाक भी साबित हो सकती है। जैसे कि हम में से ज्यादात्तर लोग ऐसे होते है जो सर्दियों में रजाई या कंबल के अंदर मुंह ढककर सोते हैं। जहां कुछ लोग शोर और लाइट से बचने के लिए ऐसे सोते है, वहीं कुछ लोग आदतन ऐसे सोते है।
लेकिन रजाई के अंदर मुंह ढांककर सोने से आपको सिरदर्द, उल्टी और सफोकेशन जैसे समस्याएं घेर सकती है। अगर सुबह उठने पर आपको भी कुछ ऐसा ही महसूस होता है तो डॉक्टरों की इस सलाह पर अमल करें। डॉक्टरों हमेशा मुंह बिना ढंके सोने की सलाह देते हैं, आइए जानते है कि मुंह ढंककर सोने से क्या-क्या समस्याएं हो सकती है।

होने लगती है घुटन
सोते हुए अपने सिर को ढंककर सोना कई लोगों को आरामदायक लगता है क्योंकि आपको ऐसे सोने की आदत हो चुकी होती है। लेकिन अधिकांश व्यक्ति सिर ढंकने के बाद भी सांस लेने के लिए थोड़ी सी जगह छोड़ देते है ताकि ऑक्सीजन का प्रवाह बना रहें। जिन लोगों को स्लीप एपनिया, अस्थमा, हृदय रोग और फेफड़ों की समस्या है वो लोग मुंह ढंककर नहीं सो सकते है क्योंकि इससे घुटन की समस्या हो सकती है। बाकी बंद कमरों में भी मुंह ढंककर सोने से सफोकेशन की समस्या होती है।

स्लीप एपनिया का खतरा
स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है जब सोते हुए सांस लेने में एक थोड़ी दिक्कत आने लगी लगती है जिसकी वजह मोटापा और ओबेसिटी हो सकता है। हालांकि, कुछ और वजह से भी यह समस्या बढ़ती है जैसे कि सिर ढंक कर सोने से भी ये समस्या होती है।
इसलिए आपको सिर के ऊपर रजाई ढंककर नहीं सोना चाहिए। सिर ढंककर सोने से मुंह और नाक के माध्यम से हवा का प्रवाह प्रतिबंधित होता है और इस वजह से एपनिया की समस्या होती है। इसके अलावा, सिर को ढंकने से अनिद्रा हो सकती है या उन लोगों के लिए चीजें और भी बदतर हो सकती हैं जिन्हें सामान्य नींद आने की समस्या से जूझ रहे हैं।

ओवरहीटिंग सोने से सोने में समस्या
सोते समय शरीर में अधिक गर्मी उत्पन्न होने लगी, और सोते समय पूरे शरीर को ढंकने का मतलब है कि आप अपने शरीर को बाहर के वातावरण बचा रहे हैं। अगर आप ठंडी जलवायु में रहते है तो आपके लिए ये गर्मी ठीक है। लेकिन कुछ स्थितियों में ये गर्मी शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। अगर कमरे का टेम्परेचर बदलता है और आपका शरीर में अधिक गर्मी उत्पन्न होती है तो आप गर्म और चिपचिपा महसूस करेंगे जो आपकी नींद के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं।

थकावट भी हो सकती है
मुंह ढंककर सोने की वजह से ओवर हीटिंग से आपको अनिद्रा की समस्या हो सकती है, ओवरहीटिंग की वजह से सूजन, चक्कर आना, मांसपेशियों में ऐंठन जैसे अन्य प्रतिकूल प्रभाव भी हो सकते हैं और आप गर्मी की वजह से थकावट भी महसूस कर सकते हैं।

ब्रेन डैमेज का कारण
एक रिसर्च के अनुसार सिर ढंककर सोने से ब्रेन डैमेज की समस्या भी हो सकती है। कुछ रिसर्च के आधार पर 23% लोग सिर ढंककर सोना पसंद करते है। सोते समय सिर और नाक के माध्यम से ऑक्सीजन के प्रतिबंध से अल्जाइमर और डिमेंशिया का खतरे बढ़ने की सम्भावना रहती है।
ऊपर बताई गई दोनों स्थितियां मस्तिष्क (हाइपोक्सिया) को पर्याप्त ऑक्सीजन की कमी के परिणामस्वरूप होती हैं सोते समय सिर ढंकने से ऑक्सीजन की पूर्ति बाधक होती है इसलिए सोते समय सिर न ढंके।

वेंटिलेशन की हो सकती है समसया
जो लोग सर्दियों में ठंड से बचने के लिए बंद कमरे में हीटर, ब्लोअर जलाकर सोते हैं, ऐसे में मुंह ढंककर सोने से उन्हें अक्सर सिरदर्द, चक्कर आना, सांस फूलने जैसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। क्योंकि सोते समय शरीर से गर्मी उत्सर्जित होने लगती है। इससे बचने के लिए हमेशा कोशिश करें कि कमरे में वेंटिलेशन बना रहें। इसके अलावा कोशिश करें कि हमेशा बंद कमरों में ही हीटर ज्यादा देर के लिए नहीं चलाया या सोते समय बंद कर दें।

अकस्मात् शिशु मुत्यु सिंड्रोम या SIDS
दो वर्ष से कम उम्र के बच्चें अकस्मात् शिशु मुत्यु सिंड्रोम (sudden infant death syndrome) से मुत्यु हो सकती है। ऐसे है तब होता है। कमरे में अधिक ध्रूमपान करने से या बच्चें को सुलाते समय उनके चेहरे को ढंक दिया जाए या ज्यादा गर्म कपड़ें से ढंक दिया जाएं तो उनकी मेटाबॉलिज्म रेट अचानक बढ़ जाती है और उनके श्वसन क्रिया से नियंत्रण हट जाता है।



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