Latest Updates
-
Heatwave Alert: दिल्ली समेत कई राज्यों में हीटवेव का अलर्ट, जानें भीषण गर्मी का सेहत पर असर और बचाव के टिप्स -
Guru Bhairavaikya Mandira: कर्नाटक का गुरु भैरवैक्य मंदिर क्यों है इतना खास? जिसका पीएम मोदी ने किया उद्घाटन -
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर भूलकर भी न खरीदें ये 5 चीजें, दरवाजे से लौट जाएंगी मां लक्ष्मी -
डायबिटीज में चीकू खाना चाहिए या नहीं? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट -
Aaj Ka Rashifal 16 April 2026: सर्वार्थ सिद्धि योग से चमकेगा तुला और कुंभ का भाग्य, जानें अपना भविष्यफल -
Akshaya Tritiya पर किस भगवान की होती है पूजा? जानें इस दिन का महत्व और पौराणिक कथा -
Parshuram Jayanti 2026 Sanskrit Wishes: परशुराम जयंती पर इन संस्कृत श्लोकों व संदेशों से दें अपनों को बधाई -
कौन हैं जनाई भोंसले? जानें आशा भोसले की पोती और क्रिकेटर मोहम्मद सिराज का क्या है नाता? -
Amarnath Yatra Registration 2026: शुरू हुआ रजिस्ट्रेशन, घर बैठे कैसे करें आवेदन, क्या हैं जरूरी डॉक्यूमेट्स -
Akshaya Tritiya पर जन्म लेने वाले बच्चे होते हैं बेहद खास, क्या आप भी प्लान कर रहे हैं इस दिन डिलीवरी
सिर्फ पत्ता गोभी में ही नहीं इनमें भी पाया जाता है टेपवर्म, खाते हुए रहे सर्तक
टेपवर्म एक तरह का ऐसा कीड़ा है जो मनुष्य के शरीर में घुसकर दिमाग में पहुंचकर बीमार कर सकता है। इसे फीताकृमि भी कहा जाता है। ये कीड़ा खाने के साथ पेट में, आंतों में और फिर ब्लड फ्लो के जरिए मस्तिष्क तक पहुंच सकता है। मूलत: टेपवर्म जानवरों के मल में पाया जाता है। जानवरों के मल में पाया जाने वाला टेपवर्म पानी के ज़रिए जमीन में, और फिर वहां से कच्ची/अधपकी सब्जियों या अधपके एनिमल प्रोडक्ट के जरिए हमतक पहुंचता है। वैसे तो टेपवर्म की 5 हजार से ज्यादा प्रजातियां बताई जाती हैं लेकिन छह प्रकार के टेपवर्म मनुष्यों को ज्यादा प्रभावित करते हैं। आपको बता दें कि एक टेपवर्म की लंबाई 3.5 से 25 मीटर तक हो सकती है।
इसकी उम्र 30 साल तक होती है। शरीर में जब ये पहुंच जाते है तो इनका खात्मा दवाईयों जरिए न हो तो इसके लिए सर्जरी तक की जाती है। इसलिए प्रारम्भिक बचाव के तौर पर हमें खाने से पहले सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते है कि ये टेपवर्म पत्ता गोभी के अलावा और कौनसी सब्जियों और खाद्य पदार्थ में पाया जाता है।

पालक-
टेपवर्म का लार्वा यानी अंडे पालक में भी पाया जाता है। क्योंकि ये पेड़ पर न उगकर, सीधा ज़मीन में उगता है। पालक को ज़मीन से उखाड़कर इसे खाने में इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इससे बनी सब्जी के कम पके होने या कच्चा खाने पर टेपवर्म का लार्वा शरीर में जाने का डर बना रहता है। इसे खाने से पहले अच्छे तरीके से साफ करें।

मछली
मछली में Diphyllobothrium टेपवर्म पाया जाता है, ये टेपवर्म की एक जींस है। मछली से टेपवर्म ह्यूमन बॉडी में जाने के चांसेज तब ज्यादा होते हैं, जब मछली को अधपका खाया जाता है. इस तरह के टैपवार्म पानी के उन मेजबानों में पनपते हैं, जो पीनी के छोटे जीवों समते मछली को भी खा जाते हैं।

ब्रोकली-
ब्रोकली भी गोभी की परिवार की एक सब्जी है। ये दिखने में फूलगोभी की तरह ही होता है और ये भी जमीन में उगती है। ब्रोकली में भी टेपवर्म का लार्वा पाया जाता है।

हरा धनिया-
हरे धनिये में भी पत्ता गोभी वाला कीड़ा टेपवर्म पाया जाता है। टेपवर्म से होने वाला इन्फेक्शन टैनिएसिस (taeniasis) कहलाता है। शरीर में जाने के बाद, ये कीड़ा अंडे देता है। जिससे शरीर के अंदर जख्म बनने लगते हैं।

पोर्क
पोर्क में भी टेपवर्म और उसका लार्वा पाया जाता है इसलिए इसे अच्छी तरह पकाकर ही खाएं। क्योंकि पोर्क में सबसे ज्यादा टेपवर्म पाएं जाने के कैसेज सामने आते हैं। पोर्क टेपवर्म Taeni solium नाम से भी जाना जाता है।

फूल गोभी-
ज्यादात्तर लोगों को पाया जाता है टेपवर्म सिर्फ पत्ता गोभी में पाया जाता है क्योंकि वो पत्तेदार सब्जी होती है। इसलिए वो आसानी से नजर नहीं आती है लेकिन टेपवर्म न सिर्फ पत्ता गोभी में बल्कि फूल गोभी में भी पाया जाता है, बवह भी ज़मीन में ही उगती है। ये दोनों गोभी एक ही प्रजाति की सब्जी से बनी हैं। इसलिए इस सब्जी को बनाते समय विशेष ध्यान दें।

टेपवर्म के लक्षण
- मतली
- कमजोरी
- डायरिया
- पेट में दर्द
- अधिक भूख या भूख खत्म हो जाना
- थकान
- वजन कम होना
- विटामिन और मिनरल की कमी होना
- मलाशय में खुजली होना

सावधानियां
टेपवर्म से बचने के लिए आपको जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिये। खाना पकाने और खाने से पहले व शौच के बाद हाथ अच्छी तरह से धोयें। मीट, चिकन, मछली या किसी भी प्रकार के मांस को अच्छी तरह पकायें। जमीनी सब्जियों को 4 से 5 बार साफ पानी से धोएं, जरुरत पड़ने पर उबालकर ही खाएं।



Click it and Unblock the Notifications











