काइरोप्रैक्टिक थेरेपी से क्‍या ठीक हो सकती है स्‍पाइन की दिक्‍कत?

पूरा दिन कुर्सी पर बैठने, गलत पोस्‍चर में सोने या कमर की मांसपेशियों को बहुत ज्‍यादा खींचने की वजह से कमर दर्द और स्‍पाइन से संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। दवाओं से इस दिक्‍कत को कम तो किया जा सकता है लेकिन हर समय दवा लेना संभव नहीं है। इससे आपको दर्द निवारक दवाओं की आदत भी पड़ सकती है। बेहतर होगा इस समस्‍या के समाधान के लिए आप प्राकृतिक तरीकों की मदद लें। स्‍पाइन के तनाव से राहत दिलाने वाली दवाओं के विकल्‍प के रूप में काइरोप्रैक्टिक थेरेपी का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।

ये कैसे करती है मदद

ये कैसे करती है मदद

काइरोप्रैक्टिक थेरेपी ज्‍यादातर कमर, हड्डी और जोड़ों से संबंधी समस्‍याओं और विकारों का इलाज करती है। प्रभावित हिस्‍से में आ रही दिक्‍कत को दूर करने के अलावा ये थेरेपी रीढ़ की पोजीशन को ठीक कर पूरी संरचना को दुरुस्‍त करती है। रीढ़ से जुड़ी दिक्‍कत को जड़ से खत्‍म करने के लिए सही पोषण और व्‍यायाम की भी जरूरत पड़ती है।

उपचार के दौरान स्‍पाइन के हिसाब से हीलर डोज में बदलाव किया जाता है। ऐसा प्रभावित हिस्‍से में गतिशीलता और लचीलापन लाने के लिए किया जाता है। ये थेरेपी हाथों से की जाती है।

ये थेरेपी देने वाला काइरोप्रैक्‍टर कमर और स्‍पाइन की पोजीशन की जांच करता है और फिर उसके हिसाब से उपचार का चयन करता है। हीलर को समस्‍या के निदान और उपचार में 5 से 6 सेशन लगते हैं। हीलर आपको निम्‍न तरह से मदद कर सकता है:

सॉफ्ट टिश्‍यू थेरेपी

सॉफ्ट टिश्‍यू थेरेपी

अगर दिक्‍कत बहुत ज्‍यादा है और मांसपेशियों के आसपास अकड़न एवं घाव बन रहे हैं तो उस स्थिति में सॉफ्ट टिश्‍यू थेरेपी दी जाती है जिससे मांसपेशियों को आराम एवं दर्द से छुटकारा मिलता है। इसमें प्रभावित हिस्‍से पर सीधे दबाव बनाया जाता है। चिकित्‍सक ये थेरेपी अपने हाथों या किसी उपकरण की मदद से प्रभावित हिस्‍से पर दबाव बनाता है।

एक्‍सरसाइज थेरेपी

एक्‍सरसाइज थेरेपी

अगर समस्‍या ज्‍यादा गंभीर नहीं है तो चिकित्‍सक कुछ व्‍यायाम करने की सलाह देते हैं जिससे मरीज को आसानी से दर्द से राहत मिलती है और दोबारा ये दिक्‍कत होने का खतरा भी कम हो जाता है। सही पोस्‍चर में रहकर इस दिक्‍कत को दूर किया जा सकता है। उचित संतुलन और पोस्‍चर में रहने के लिए चिकित्‍सक आपको कुछ तरीकों की सलाह दे सकता है।

मैनुअल थेरेपी

मैनुअल थेरेपी

ये थेरेपी जोड़ों में दर्द और अकड़न को दूर करती है। इसमें हल्‍के हाथों से प्रभावित हिस्‍से की मालिश की जाती है।

नोट:

इस लेख में बताई गई बातें चिकित्‍सकीय सलाह का विकल्‍प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए अपने चिकित्‍सक से परामर्श करें।

Story first published: Tuesday, August 20, 2019, 11:03 [IST]
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