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डेंगू का सही समय पर इलाज नहीं होने से जा सकती है जान, जानें कितने तरह के होते हैं टेस्ट
मानसून आते ही डेंगू का बुखार भी दस्तक देने लगता हैं। डेंगू की बीमारी से कोई भी देश आज तक मुक्त नहीं हो पाया है। इससे होने वाले बुखार को 'हड्डीतोड़' बुखार भी कहा जाता है क्योंकि पीड़ित व्यक्ति को बहुत दर्द होता है, जैसे उनकी हड्डियां टूट रही हों। शुरुआत में यह बुखार सामान्य बुखार जैसा ही लगता है, लेकिन बाद में इसके लक्षण देर से समझ में आते हैं।
यदि डेंगू पीड़ित व्यक्ति को काटने के बाद कोई मच्छर आपको काटता है, तो आपको भी डेंगू हो सकता है। डेंगू से बचने के लिए सतर्कता रखना और बचाव के उपाय करना आवश्यक है। आइए जानते हैं कि डेंगू के लक्षण दिखने के बाद कौनसे आपको टेस्ट करवाने चाहिए -

डेंगू बुखार के लक्षण
- ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ना
- सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना
- आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना
- बहुत ज्यादा कमजोरी लगना
- भूख न लगना
- जी मितलाना और मुंह का स्वाद खराब होना
- गले में हल्का-सा दर्द होना
- शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग के रैशेज होना
- तेज महक वाली परफ्यूम लगाने से बचें क्योंकि मच्छर किसी भी तरह की तेज महक की तरफ आकर्षित होते हैं।
- कमरे में मच्छर भगानेवाले स्प्रे, मैट्स, कॉइल्स आदि का प्रयोग करें।
- मस्किटो रेपलेंट को जलाते समय सावधानी बरतें। इन्हें जलाकर कमरे को 1-2 घंटे के लिए बंद कर दें।

ये होते हैं डेंगू के टेस्ट
एनएस 1 - एनएस 1 टेस्ट डेंगू के लक्षण सामने आने पर शुरूआती पांच दिनों के अंदर किया जाना चाहिए, ताकि इसके सार्थक और सटीक परिणाम प्राप्त हो सके। एनएस1 टेस्ट प्रारंभिक 5 दिनों के भीतर बीमारी का पता लगाने में सक्षम होता है, लेकिन इसके अलावा इसके परिणामों की प्रमाणिकता संदेहास्पद होती है।
अगर आप यह जांच देरी से करवाते हैं, तो यह जरूरी नहीं है, कि इसके परिणामों में डेंगू बुखार की पुष्टि हो। कई बार ऐसी स्थितियां भी बनती है, जब मरीज को डेंगू होते हुए भी समय पर जांच नहीं करवाने के कारण गलत परिणाम सामने आते हैं और डेंगू की पुष्टि नहीं हो पाती। ऐसे में मरीज डेंगू का सामना जरूर करता है, लेकिन उसे सही इलाज नहीं मिल पाता और उसकी स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जाती है।
एलाइजा - डेंगू के लिए की जाने वाली यह एक ऐसी जांच है, जिसमें डेंगू की पुष्टि प्रमाणिक रूप से हो जाती है, जिससे डॉक्टर्स को मरीज का बेहतर तरीके से इलाज करने में आसानी होती है। एलाइजा टेस्ट में आईजीएम डेंगू के लक्षण सामने आने के लगभग 3 से 5 दिन के अंदर व आईजीजी 5 से 10 दिन के अंदर होता है। इसके परिणामों में सटीकता, जांच के समय पर आधारित होती है। मतलब समय रहते जांच करवाने पर डेंगू की पुष्टि प्रमाणिक हो जाती है और इलाज भी बेहतर होता है।
डेंगू के अधिकांश मामलों में डॉक्टर्स एनएस1 टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। इसका प्रमुख कारण है कि यह टेस्ट शुरूआती 5 दिनों में ही करवाया जाता है, जबकि एलाइजा टेस्ट में अधिक समय लगता है। ऐसे में मरीज अधिक समय तक इंतजार करने के बजाए, एनएस1 करवाना ही बेहतर समझते हैं। हालांकि एलाइजा टेस्ट के परिणाम एनएस1 की अपेक्षा अधिक प्रमाणिक होते हैं।
लेकिन डेंगू की जांच कराने के बाद परिणाम का इंतजार करने के स्थान पर लक्षणों के आधार पर प्राथमिक इलाज शुरू कर दिया जाना चाहिए। अन्यथा मरीज की हालत बिगड़ भी सकती है।

डेंगू बुखार से बचाव
बाहर जाने से पहले पूरी बांह की शर्ट, बूट, मोजे और फुल पैंट पहनें। खासकर बच्चों के लिए इस बात का जरूर ध्यान रखें। - मच्छर गाढ़े रंग की तरफ आकर्षित होते हैं इसलिए हल्के रंग के कपड़े पहनें।



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