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हीटवेव क्या है और यह कैसे आपके शरीर पर प्रभाव डालती है?
जैसे ही भारत के बड़े हिस्से में सूरज की किरणे तेज और गर्म हवा के थपेड़े चलने लगते हैं तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है, घर से बाहर निकलना भारी लगता है। मार्च की शुरुआत से देशभर में भीषण गर्मी का कहर जारी है, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश सहित कई क्षेत्रों में अधिकतम तापमान में पारा 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर सकता है।
उत्तर पश्चिमी भारत में पिछले सप्ताह मार्च से सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया या है, मौसम विशेषज्ञों ने इसके लिए समय-समय पर हल्की बारिश और गरज के साथ बारिश की अनुपस्थिति को बढ़ते तापमान का जिम्मेदार ठहराया है। आइए जानते हैं कि क्या होता है हीटवेव और कैसे ये शरीर को प्रभावित करता है?

क्या होता है हीट वेव?
आईएमडी (भारत मौसम विज्ञान विभाग ) का कहना है कि हीट वेव तब होता है, जब किसी जगह का तापमान मैदानी इलाकों में 40 डिग्री सेल्सियस, तटीय क्षेत्रों में 37 डिग्री सेल्सियस और पहाड़ी क्षेत्रों में 30 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है। जब किसी जगह पर किसी ख़ास दिन उस क्षेत्र के सामान्य तापमान से 4.5 से 6.4 डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान दर्ज किया जाता है, तो मौसम एजेंसी हीट वेव की घोषणा करती है। यदि तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री सेल्सियस अधिक है, तो आईएमडी इसे 'गंभीर' हीट वेव घोषित करता है। आईएमडी हीट वेव घोषित करने के लिए एक अन्य मानदंड का भी उपयोग करता है, जो पूर्ण रूप से दर्ज तापमान पर आधारित होता है। यदि तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है, तो विभाग हीट वेव घोषित करता है। जब यह 47 डिग्री को पार करता है, तो 'गंभीर' हीट वेव की घोषणा की जाती है।

गर्मी की लहरें आपके शरीर को कैसे प्रभावित करती हैं?
कुछ स्तरों से ऊपर का तापमान न केवल शारीरिक क्रिया को प्रभावित कर सकता है, बल्कि अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह घातक भी साबित हो सकता है। एक व्यक्ति जितना अधिक समय तक बढ़े हुए तापमान में रहता है, उसके शरीर पर उतना ही बुरा प्रभाव पड़ता है।
जैसे-जैसे शरीर का तापमान बढ़ता है, रक्त वाहिकाएं भी खुल जाती हैं, जिससे रक्तचाप कम हो जाता है। यह पूरे शरीर में रक्त को प्रसारित करने के लिए हृदय को अधिक मेहनत करता है।
निम्न रक्तचाप के प्रभावों को चक्कर आना, सिरदर्द और मतली के माध्यम से महसूस किया जा सकता है।
गर्मी से लड़ने के लिए शरीर से भारी पसीना आने लगता है जिससे शरीर में नमक और तरल पदार्थ की कमी हो जाती है, जिससे डिहाइड्रेशन हो जाता है।
निम्न रक्तचाप और निर्जलीकरण से मांसपेशियों में ऐंठन, भ्रम और बेहोशी हो सकती है। यदि रक्तचाप बहुत अधिक गिरता है, तो इससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ सकता है।
सुरक्षित रहने के लिए क्या करें?
शरीर में तरल पदार्थ, नमक का संतुलन बनाए रखने के लिए पानी पीना चाहिए और ऐसे खाद्य पदार्थ खाने चाहिए जिनमें पानी की मात्रा अधिक हो।
बाहर निकलते समय ढीले-ढाले कपड़े पहनें और यात्रा के दौरान जितनी देर हो सके छाया में रहने की कोशिश करें। गर्मी की लहर के दौरान यात्रा और व्यायाम को भी सीमित करना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति गर्मी से प्रभावित दिखाई देता है, तो उसे तुरंत किसी ठंडी जगह पर ले जाकर लिटा देना चाहिए। प्रभावित व्यक्ति को पीने के लिए भरपूर पानी या पुनर्जलीकरण तरल दिया जाना चाहिए।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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