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आपके बच्चे को है डायबिटीज, तो इस तरह से इस्तेमाल करें इंसुलिन पंप
देश में डायबिटीज के मामले बढ़ रहे हैं, इसमें अब बड़ों के साथ-साथ बच्चों की संख्या भी बढ़ गई है। बच्चों में डायबिटीज को जुवेनाइल डायबिटीज मेलिटस कहा जाता है। जिसमें बच्चों को इंसुलिन लेने की जरूरत होती है। जब किसी व्यक्ति को टाइप 1 डायबिटीज होता है, तो उसके शरीर की इम्यून सिस्टम पेनक्रियाज में उत्पादित इंसुलिन कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। इंसुलिन कम होने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। यही कारण है कि व्यक्ति को ऊपर से इंसुलिन लेना पड़ता है। बच्चों के लिए इंसुलिन लेना एक कठिन काम है। बच्चों और बड़ों की इस समस्या को कम करने के लिए इन दिनों इंसुलिन पंप का इस्तेमाल किया जा रहा है। इंसुलिन पंप का यूज करने से ग्लूकोज को नियंत्रित करने के साथ-साथ लाइफ स्टाइल में सुधार लाने में भी मदद मिल सकती है। जानते हैं बच्चों के लिए इंसुलिन पंप का इस्तेमाल कैसे करें।
तेजी से काम करने वाले इंसुलिन, इंसुलिन लिस्प्रो की उपलब्धता के बाद 1990 के दशक के मध्य में टाइप 1 मधुमेह (T1D) वाले युवाओं के लिए इंसुलिन पंप व्यापक रूप से लोगों ने एक्सेप्ट कर लिया। पीडियाट्रिशन बच्चों में पंप के यूज के बारे में सतर्क थे। हलांकि इंसुलिन के विकास और पंप सुविधाओं में प्रगति के साथ, इनटेंसिव डायबिटीज से जुड़े गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया का डर कम हो गया है।

बच्चों के लिए इंसुलिन पंप का यूज-
जिनके बच्चों को डायबिटीज टाइप 1 हैं, इंसुलिन पंप का यूज करने से पहले कुछ बातों का खास खयाल रखना होता है। इस बात का ध्यान रखें कि इंसुलिन पंप के बटन का सीधे बॉडी से संपर्क न हों। जिससे की बॉडी की नमी उन पर ना आ सके। इंसुलिन पंप डिवाइस को बेल्ट क्लिप यूज कर सकते हैं।

पंप को सही से सेट करें
इस बात का ध्यान रखें कि पंप को सेट करने से पहले इंसुलिन पंप ठीक से जुड़ गया हो। क्योंकि बार -बार पंप को लगाने और उसे हटाने से पंप के जल्दी खराब होने का डर होता है। इसके साथ ही बॉडी को फायदा नही मिल पाता।

पंप यूज करने से पहले हाथों की सफाई
आपको इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि इंसुलिन पंप को यूज करने से पहले हाथों को धो लें और अगर आपके हाथों में लोशन, सनस्क्रीन और क्रीम लगी है तो उसे भी पूरी तरह साफ कर लें। जब पंप का इस्तेमाल कर लें, उसके बाद दोबारा हाथ धोएं।



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