Latest Updates
-
'कांटे' और 'शूटआउट एट वडाला' के निर्देशक संजय गुप्ता का 57 साल की उम्र में निधन, सामने आई मौत की वजह -
Ahoi Ashtami Vrat Me Pani Kab Piye: अहोई अष्टमी के व्रत में पानी पीना चाहिए या नहीं? जानें व्रत के जरूरी नियम -
Namakpara Recipe: दिवाली पर घर पर बनाएं बिना मैदा के कुरकुरे नमकपारे, निशा मधुलिका ने बताई आसान रेसिपी -
Halloween 2026: क्यों मनाया जाता है हैलोवीन? जानिए कहां और कैसे शुरू हुआ यह 'डरावना त्योहार' -
National Unity Day 2026 Wishes: हमारी पहचान हमारी एकता...राष्ट्रीय एकता दिवस पर आप भी भेजें ये शुभकामना संदेश -
Halloween 2026: हैलोवीन पार्टी के लिए ट्राई करें ये 5 स्पूकी मेकअप आइडियाज, दिखेंगी सबसे अलग -
बार-बार होने वाला सिरदर्द कहीं ब्रेन ट्यूमर तो नहीं? डॉक्टर ने बताए 5 वार्निंग संकेत जिन्हें पहचानना है जरूरी -
Ahoi Ashtami 2026: 1 या 2 नवंबर, अहोई अष्टमी कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Karwa Chauth Wishes For Saasu Maa: आपके आशीर्वाद से...करवा चौथ पर सासू मां को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Happy Karwa Chauth Wishes For Husband: चांद से भी प्यारा...करवाचौथ पर जीवनसाथी को भेजें ये प्यार भरे संदेश
घड़े या मटके में पानी भरते हुए रखें विशेष ख्याल, छोटी सी चूक से हो सकती है ये गंभीर बीमारियां
पीढ़ियों से पानी को ठंडा रखने के लिए मिट्टी के घड़े या मटके का इस्तेमाल किया जाता रहा है। मटके या सुराहियों में स्टोर किया हुआ पानी नियमित नल या फ़िल्टर्ड पानी की तुलना में अधिक ठंडा होता है और इसमें एक अलग तरह का, ताज़ा स्वाद होता है। कई लोगों को पानी का तापमान पीने के लिए सही लगता है - न ज्यादा गर्म और न ज्यादा ठंडा।

परंपरागत रूप से मटका का पानी गले के लिए कोमल और फ्रिज का ठंडा पानी पीने से बेहतर माना जाता है। आप परिवार के सदस्यों को सुझाव दे सकते हैं कि आप केवल मटका का पानी पिएं ताकि आप बीमार न पड़ें। अगर आपको सर्दी-खांसी या गले में खराश होने का खतरा है, तो उन्हें लग सकता है कि मटका पानी आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है। लेकिन, मटके में स्टोर करने से पहले पानी को उबालकर छान लिया जाए। फिर पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा होने दें। एक बार जब यह रुम टेम्परेचर तक पहुंच जाए, तो आप इसे एक साफ मटका या सुराही में स्टोर कर सकते हैं।
ध्यान रखने योग्य कुछ टिप्स:
- अपने मटका या सुराही को साफ और रोगाणु मुक्त रखें। मिट्टी के बर्तन पानी को रोक सकते हैं और मैल को जल्दी से जमा कर सकते हैं। मटका को फिर से भरने से पहले प्रत्येक उपयोग के बाद साफ़ करना, साफ़ करना और सुखाना सबसे अच्छा है।

- हम से ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि घड़े या मटके में पानी ऊपर से भरते रहते हैं और पानी खत्म होने पर ऊपर से भर देते हैं। इस तरह हम कई दिनों तक मटके को धोकर पूरा पानी नहीं बदल पाते। इस प्रोसेस में होता ये है कि कई बार पुराना पानी मटके में ही संग्रहितरहता है और पुराना होता जाता है। ये पानी पेट में इंफेक्शन, टाइफाइड और हैजा जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए सही तरीका ये है कि रोज मटके को साफ पानी से धो कर, पुराना पानी फेंक कर नया और ताजा पानी भरें।
- मटके को किसी मज़बूत टेबल पर रखें या खिड़की के पास रखें। हवा पानी को ठंडा रखने में मदद करेगी। गर्म महीनों के दौरान, आप मटके को जल्दी ठंडा करने के लिए एक साफ नम कपड़े से लपेटकर रख सकते हैं।
- एक मटके से पानी निकालने के लिए एक साफ, लंबे हैंडल वाली कलछी (कलची) का प्रयोग करें। गिलास डुबोने या अपने हाथ डुबाने से पानी को छूने से वह दूषित हो सकता है।
- मटके पर कोई भी दरार या चिप्स होने की स्थिति पर घड़ा लीक हो सकता है। ऐसे मटके को तुरंत बदल दें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
