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जानिए क्या होती है ऑटम एंग्जाइटी और कैसे निपटें इससे
मौसम में बदलाव का असर व्यक्ति के रहन-सहन, पहनावे या आहार पर ही दिखाई नहीं देता है, बल्कि व्यक्ति मानसिक तौर पर भी इससे प्रभावित होता है। शरद ऋतु या ऑटम सीजन वर्ष के सबसे अच्छे मौसमों में से एक है। पतझड़ का मौसम आनंद से भरा होता है, रंग बदलते हैं, छोटे दिन होते हैं, ठंडी हवाएं एक अलग ही अहसास करवाती हैं। अधिकतर लोगों को इस मौसम में आनंद ही अनुभूति होती है। लेकिन वहीं, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनके लिए यह समस्या का कारण बन सकता है। इस मौसम में लोगों को अपने व्यवहार, तनाव का अधिक स्तर और एंग्जाइटी का अनुभव होता है, जिससे ऑटम एंग्जाइटी कहा जाता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको इस एंग्जाइटी के कारण व उपायों के बारे में विस्तारपूर्वक बता रहे हैं-

ऑटम एंग्जाइटी क्या है?
ऑटम एंग्जाइटी के कारणों व उपचार के बारे में चर्चा करने से पूर्व आपको इसके बारे में जान लेना चाहिए। ऑटम एंग्जाइटी वास्तव में बदलते मौसम के कारण होने वाले नेगेटिव इमोशन हैं, जिसे व्यक्ति को चिंता, भय और अन्य नकारात्मक भावनाओं में वृद्धि होती है। यह ऑटम एंग्जाइटी आमतौर पर सितंबर से दिसंबर तक होती हैं। यह ऐसे कुछ माह होते हैं, जब व्यक्ति लो फील करता है और उसके तनाव का स्तर बढ़ जाता है।

ऑटम एंग्जाइटी के लक्षण क्या हैं?
ऑटम एंग्जाइटी होने पर व्यक्ति को कुछ लक्षण नजर आ सकते हैं। हालांकि, यह लक्षण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकते हैं-
• डर, एंग्जाइटी और अत्यधिक चिंता
• लो फील करना
• डिप्रेशन
• दैनिक गतिविधियों में कम रुचि
• थकान
• चिड़चिड़ापन

ऑटम एंग्जाइटी के कारण
ऑटम एंग्जाइटी होने के कई कारण हो सकते हैं। मसलन-
• कभी-कभी नई जिम्मेदारियां व्यक्ति को परेशान कर सकती हैं। माता-पिता नए स्कूल वर्ष के खर्च, काम और परिवार के समय के बीच संतुलन के बारे में चिंतित महसूस कर सकते हैं।
• जर्नल ऑफ अफेक्टिव डिसऑर्डर के एक अध्ययन के अनुसार, एलर्जी से पीड़ित लोगों में इस मौसम में अवसाद और उदासी की संभावना हो सकती है। एलर्जी मस्तिष्क को भी प्रभावित करती है जिसके परिणामस्वरूप हल्के अवसादग्रस्त के लक्षण नजर आ सकते हैं।
• ऑटम सीजन में एंग्जाइटी का एक प्रमुख कारण सूर्य की रोशनी की कमी भी है। कम तापमान के कारण, व्यक्ति शरीर के लिए आवश्यक मात्रा में धूप प्राप्त करने में विफल हो सकता है। जिससे विटामिन डी की कमी से व्यक्ति को चिंता, अवसाद और उदासी हो सकती है। सूरज की रोशनी कम होने से सेरोटोनिन का स्तर भी गिर सकता है, एक हार्मोन जो मूड और नींद के पैटर्न को प्रभावित करता है।
• लंबी रातें और ठंडी जलवायु के कारण व्यक्ति अधिक आलस महसूस करता है। हो सकता है कि इस मौसम में आपकी शारीरिक गतिविधि कम हो जाए। जिससे व्यक्ति को एंग्जाइटी की समस्या हो सकती है।

ऑटम एंग्जाइटी को कैसे नियंत्रित करें
मौसम में बदलाव का असर व्यक्ति के तन-मन पर पड़ता है, लेकिन इसे नियंत्रित करने के लिए आप कुछ आसान उपायों को अपनाया जा सकता है। मसलन-
• सुबह की धूप हमारे शरीर के लिए एक प्राकृतिक विटामिन सप्लीमेंट मानी जाती है। इसलिए, सूरज की रोशनी के लिए जल्दी उठने की कोशिश करें और थोड़ी देर के लिए बाहर की सैर करें।
• अगर आपको पर्याप्त धूप नहीं मिल रही है तो ऐसे में आप लाइट थेरेपी बॉक्स को अपनाएं। यह एक ऐसी थेरेपी है जिसमें आंखों को अतिरिक्त रोशनी प्रदान करने के लिए 30 मिनट के लिए एक उज्ज्वल दीपक के सामने बैठना चाहिए।
• भले ही इस मौसम में व्यक्ति लो फील करता है, लेकिन फिर भी आप ऑटम एंग्जाइटी से बचने के लिए खुद को अधिक एक्टिव रखने का प्रयास करें। यह सुनिश्चित करें कि आप दिन में कम से कम आधे घंटे के लिए व्यायाम अवश्य करें। यह आपके मानसिक स्वास्थ्य को अधिक बेहतर बनाने में मदद करेगा।
• इस मौसम में अक्सर कई तरह के त्योहारों की तैयारी के कारण व्यक्ति खुद को बहुत अधिक थका हुआ महसूस करता है। कभी-कभी इन तैयारियों की चिंता भी व्यक्ति को व्यथित करती हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप पहले योजना बनाएं और फिर उसके आधार पर कार्य करें। इससे आपको तनाव को मैनेज करने में आसानी होगी। साथ ही, काम की व्यस्तताओं के बीच भी कुछ वक्त अवश्य निकालें और रिलैक्स करें।
• मौसम में बदलाव से आहार में बदलाव आता है। लेकिन आपका खान-पान आपके स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। इसलिए, आप इस मौसम में टेस्टी सूप और अन्य गर्म फूड्स को अपने आहार का हिस्सा बनाएं।



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