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नवरात्रि में अखंड दीया जलाने से आती है शुभता, जानें ज्योत जलाने की वैज्ञानिक महत्ता
शारदीय नवरात्रि का त्योहार इस बार 26 सितंबर 2022 शुरू हो गया है। इसे त्योहार को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखता है। नवरात्रि के दौरान लोग साफ-सफाई और खान-पान की चीजों का विशेष ध्यान रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस महीने से शुभता और ऊर्जा की शरुआत होती है। ऐसे समय में मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। और घर में अखंड दीया जलाया जाता है, ताकि घर में सुख-समृद्धि का वास हो। अखंड ज्योति का अर्थ होता है ऐसी ज्योति जो खंडित ना हो। अखंड ज्योति से घर में खुशहाली आती है, देवी मां का आशीर्वाद आप पर बना रहता है। ऐसे मे चलिए जानते हैं आखिर क्या है नवरात्रि में अखंड दीया जलाने का वैज्ञानिक महत्व।

क्या है शारदीय नवरात्रि का महत्व
1- ज्योतिषीय दृष्टि से शारदीय नवरात्रि विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्रि में सूर्य का राशि परिवर्तन होता है।
2- सूर्य 12 राशियों का चक्र पूरा कर दोबारा मेष राशि में प्रवेश करते हैं और एक नये चक्र की शुरुआत करते हैं।
3- ऐसे में शारदीय नवरात्रि से ही हिन्दु नव वर्ष की शुरुआत होती है।

शारदीय नवरात्रि का वैज्ञानिक महत्व
शारदीय नवरात्रि के वैज्ञानिक महत्व की बात करें तो यह समय मौसम परिवर्तन का होता है, इसलिए मानसिक सेहत पर इसका खासा प्रभाव देखने को मिलता है। इस समय में अक्सर लोगों के बीमार पड़ने की आशंका रहती है ऐसे में का व्रत करना शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए लाभकारी हो सकता है।

धार्मिक कारण -
दीपक ज्ञान और रोशनी का प्रतीक है। दीपक को सकारात्मकता का प्रतीक व दरिद्रता को दूर करने वाला माना जाता है। दीपक जलाने का कारण यह है कि हम अज्ञान का अंधकार मिटाकर अपने जीवन में ज्ञान के प्रकाश के लिए पुरुषार्थ करें। हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार पूजा के समय दीपक लगाना अनिवार्य माना गया है। आमतौर पर विषम संख्या में दीप प्रज्जवलित करने की परंपरा चली आ रही है। घी का दीपक लगाने से घर में सुख समृद्धि आती है। इससे घर में लक्ष्मी का स्थाई रूप से निवास होता है। घी को पंचामृत यानी पांच अमृतों में से एक माना गया है। किसी भी सात्विक पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए घी का दीपक और तामसिक यानी तांत्रिक पूजा काे सफल बनाने के लिए तेल का दीपक लगाया जाता है।

वैज्ञानिक कारण -
गाय के घी में रोगाणुओं को भगाने की क्षमता होती है। यह घी जब दीपक में अग्नि के संपर्क में आता है तो वातावरण को पवित्र बना देता है। इससे प्रदूषण दूर होता है। दीपक जलाने से पूरे घर को फायदा मिलता है। चाहे वह पूजा में सम्मिलित हो या नहीं। दीप प्रज्जवलन घर को प्रदूषण मुक्त बनाने का एक क्रम है। अग्नि में कोई भी चीज जलने पर खत्म नहीं होती बल्कि छोटे-छोटे अदृश्य टुकड़ों में बंटकर वातावरण में फैल जाती है। इसलिए अग्नि से घी का फैलना वातावरण को शुद्ध करता है।

दिमाग को नकारात्मकता से रखें दूर
नवरात्र में घी या तेल का अखंड दीप जलाने दिमाग में कभी भी नकारात्मक सोच हावी नहीं होती है और चित्त खुश और शांत रहता है। नवरात्र में अंखड दीप जलाना स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है क्योंकि घी और कपूर की महक से इंसान की श्वास और नर्वस सिस्टम बढ़िया रहता है।

पूजा में ध्यान रखें दीपक से जुड़ी ये बातें -
- देवी-देवताओं को घी का दीपक अपने बाएं हाथ की ओर तथा तेल का दीपक दाएं हाथ की ओर लगाना चाहिए।
- पूजा करते वक्त दीपक बुझना नहीं चाहिए।
- घी के दीपक के लिए सफेद रुई की बत्ती उपयोग किया जाना चाहिए। जबकि तेल के दीपक के लिए लाल धागे की बत्ती श्रेष्ठ बताई गई है।
- पूजा में कभी भी खंडित दीपक नहीं जलाना चाहिए। धार्मिक कार्यों में खंडित सामग्री शुभ नहीं मानी जाती है।



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