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नवरात्रि में अखंड दीया जलाने से आती है शुभता, जानें ज्‍योत जलाने की वैज्ञान‍िक महत्ता

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चैत्र नवरात्रि इस बार 13 अप्रेल शुरू हो रह है। इसे सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है। चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म में विशेष स्‍थान रखता है। नवरात्र के दौरान लोग साफ-सफाई और खान-पान की चीजों का विशेष ध्यान रखते हैं। माना जाता है इस महीने से शुभता और ऊर्जा का आरंभ होता है और ऐसे समय में मां के विभिन्‍न स्‍वरूपों की पूजा की जाती है और घर में अखंड दीया जलाया जाता है ताकि घर में सुख-समृद्धि का वास हो। ऐसे मे चलिए जानते हैं आखिर क्या है नवरात्रि में अखंड दीया जलाने का वैज्ञान‍िक महत्‍व।

क्या है चैत्र नवरात्रि का महत्‍व

क्या है चैत्र नवरात्रि का महत्‍व

1- ज्‍योतिषीय दृष्‍ट‍ि से चैत्र नवरात्रि विशेष महत्‍व है। चैत्र नवरात्रि में सूर्य का राशि परिवर्तन होता है।

2- सूर्य 12 राशियों का चक्र पूरा कर दोबारा मेष राशि में प्रवेश करते हैं और एक नये चक्र की शुरुआत करते हैं।

3- ऐसे में चैत्र नवरात्रि से ही हिन्दु नव वर्ष की शुरुआत होती है।

चैत्र नवरात्रि का वैज्ञानिक महत्व

चैत्र नवरात्रि का वैज्ञानिक महत्व

चैत्र नवरात्रि के वैज्ञानिक महत्‍व की बात करें तो यह समय मौसम परिवर्तन का होता है, इसलिए मानसिक सेहत पर इसका खासा प्रभाव देखने को मिलता है। इस समय में अक्सर लोगों के बीमार पड़ने की आशंका रहती है ऐसे में का व्रत करना शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए लाभकारी हो सकता है।

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Chaitra Navratri 2021: बिना चैत्र नवरात्रि व्रत के अखंड ज्योति जला सकते है कि नहीं | Boldsky
धार्मिक कारण -

धार्मिक कारण -

दीपक ज्ञान और रोशनी का प्रतीक है। दीपक को सकारात्मकता का प्रतीक व दरिद्रता को दूर करने वाला माना जाता है। दीपक जलाने का कारण यह है कि हम अज्ञान का अंधकार मिटाकर अपने जीवन में ज्ञान के प्रकाश के लिए पुरुषार्थ करें। हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार पूजा के समय दीपक लगाना अनिवार्य माना गया है। आमतौर पर विषम संख्या में दीप प्रज्जवलित करने की परंपरा चली आ रही है। घी का दीपक लगाने से घर में सुख समृद्धि आती है। इससे घर में लक्ष्मी का स्थाई रूप से निवास होता है। घी को पंचामृत यानी पांच अमृतों में से एक माना गया है। किसी भी सात्विक पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए घी का दीपक और तामसिक यानी तांत्रिक पूजा काे सफल बनाने के लिए तेल का दीपक लगाया जाता है।

वैज्ञानिक कारण -

वैज्ञानिक कारण -

गाय के घी में रोगाणुओं को भगाने की क्षमता होती है। यह घी जब दीपक में अग्नि के संपर्क में आता है तो वातावरण को पवित्र बना देता है। इससे प्रदूषण दूर होता है। दीपक जलाने से पूरे घर को फायदा मिलता है। चाहे वह पूजा में सम्मिलित हो या नहीं। दीप प्रज्जवलन घर को प्रदूषण मुक्त बनाने का एक क्रम है। अग्नि में कोई भी चीज जलने पर खत्म नहीं होती बल्कि छोटे-छोटे अदृश्य टुकड़ों में बंटकर वातावरण में फैल जाती है। इसलिए अग्नि से घी का फैलना वातावरण को शुद्ध करता है।

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दिमाग को नकारात्‍मकता से रखें दूर

दिमाग को नकारात्‍मकता से रखें दूर

नवरात्र में घी या तेल का अखंड दीप जलाने दिमाग में कभी भी नकारात्मक सोच हावी नहीं होती है और चित्त खुश और शांत रहता है। नवरात्र में अंखड दीप जलाना स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है क्योंकि घी और कपूर की महक से इंसान की श्वास और नर्वस सिस्टम बढ़िया रहता है।

पूजा में ध्यान रखें दीपक से जुड़ी ये बातें -

पूजा में ध्यान रखें दीपक से जुड़ी ये बातें -

- देवी-देवताओं को घी का दीपक अपने बाएं हाथ की ओर तथा तेल का दीपक दाएं हाथ की ओर लगाना चाहिए।

- पूजा करते वक्त दीपक बुझना नहीं चाहिए।

- घी के दीपक के लिए सफेद रुई की बत्ती उपयोग किया जाना चाहिए। जबकि तेल के दीपक के लिए लाल धागे की बत्ती श्रेष्ठ बताई गई है।

- पूजा में कभी भी खंडित दीपक नहीं जलाना चाहिए। धार्मिक कार्यों में खंडित सामग्री शुभ नहीं मानी जाती है।

English summary

Navratri 2021: Why does Akhand Jyoti burn on Navratri? Know The Sciencetic Reason

Every pooja is incomplete without a lamp. The lamp is a symbol of wisdom, light, devotion and devotion. In the nine days of Navratri, unbroken Jyoti is lit. This means that the lamp that is lit in these nine days keeps on burning day and night.