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Pneumonia: सर्दियों में इन लोगों में बढ़ जाता है निमोनिया का खतरा, ये लक्षण दिखें तो तुरंत हो जाएं सावधान
इस वक्त उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड हो रही है। सर्द हवाओं की वजह से लोगों को कई तरह की बीमारियां घेर रही है। अधिक सर्दी की वजह से लोगों में सर्दी खांसी जुकाम,आम बना हुआ है और डॉक्टरों के क्लिनिक और अस्पतालों में ऐसे मरीजों की भीड़ देखी जा रही है। सर्दी के मौसम निमोनिया के मरीज भी बढ़ रहे हैं। बच्चों के साथ ही बुजुर्गों को भी निमोनिया हो रहा है। निमोनिया बैक्टीरिया और वायरस की वजह से होता है, ये आपके फेफड़ो को डैमेज करता है। फेफड़ों की स्थिति खराब होने का रण सांस लेने में तकलीफ होने लगती है, साथ ही बलगम बनने लगता है।
अमेरिकन लंग एसोसिएशन ने निमोनिया से बचने के तरीकों के बारें मे जानकारी दी है। साथ ही निमोनिया के बड़े कारणों के बारें में भी बताया है-

आम फ्लू भी निमोनिया के होने का कारण
1.सर्दी के मौसम में होने वाला आम फ्लू भी निमोनिया के होने का कारण है। जिन लोगों को फ्लू की समस्या होती रहती है उन्हेंन न्यूमोकोकल न्यूमोनिया के बचाव के लिए वैक्सीन लगवानी चाहिए। बैक्टीरियल निमोनिया 2-5 साल के छोटे बच्चों को प्रभावित कर सकता है। वहीं फेफड़ों की बीमारी, हार्ट की बीमारी के रोगियों, जिनको डायबीटिज है उनपर अधिक अटैक कर सकता है।
2.अस्थमा, सीओपीडी, स्मोकिंग करने वालों में भी इसका जोखिम रहता है।
3. 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को न्यूमोकोकल न्यूमोनिया से बचाव के लिए वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए।

निमोनिया से बचाव के उपाय-
1.अपने हाथ धोते रहें-
अपने हाथों को साबुन या लिक्विड सोप से धोएं। जब आप अपनी नाक को साफ करें या जब आप को छींक या खांसी आए तब इस बात का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। बाथरूम जाने, खाना खाने से पहले भी हाथ जरूर धोएं।
स्मोकिंग से दूर रहें-
स्मोंकिंग से आपके फेफड़ों पर जोर पड़ता है साथ ही संक्रमण का खरता रहता है। जो लोग स्मोकिंग करते हैं उनको निमोनिया का खतरा ज्यादा होता है।

डेली रूटीन की आदतों में सुधार
अपनी डेली रूटीन की आदतों में सुधार करें। स्वस्थ आहार, आराम, डेली एक्सरसाइज करें। अपने हेल्थ को लेकर जागरूक रहें।
जब आपको सर्दी, जुकाम हो तो एतिहात बरतें।

इन लक्षणों पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें
अस्थमा, सीओपीडी, डायबीटीज रोगियों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
अगर खांसी कई दिनों से हैं तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करके इलाज शुरू करवाएं।
(सोर्स-https://www.lung.org/)



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