Latest Updates
-
Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं? जानें जरूरी नियम और पारण का समय -
Jitiya Vrat Katha: जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत में जरूर करें इस कथा का पाठ, पूरे साल सुरक्षित रहेगी संतान -
Jitiya Vrat 2025 Wishes: संतान की लंबी उम्र...जितिया व्रत के अवसर पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026: क्या आप जानते हैं लाल बहादुर शास्त्री का असली नाम? जानें 10 रोचक तथ्य -
Gandhi Jayanti 2026: गांधी जी को 'बापू' क्यों कहा जाता है? जानें किसने दी थी 'महात्मा' की उपाधि -
Gandhi Jayanti Wishes 2026: हाथ में लाठी थी...गांधी जयंती पर अपनों को ये खास मैसेज भेजकर दें शुभकामनाएं -
Gandhi Jayanti 2026 Essay, Speech: गांधी जयंती पर ऐसे करें भाषण और निबंध की तैयारी, मिलेगा इनाम -
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में खीर बनाते समय न करें ये गलती, नहीं तो नाराज हो सकते हैं पितर, जानें सही विधि -
Koffee With Karan 9: करण जौहर का ‘कॉफी विद करण’ 22 साल बाद होगा खत्म, जानें कब और कहां स्ट्रीम होगा आखिरी सीजन -
Jitiya Vrat 2026: कब है जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत? जानें सही तारीख, और नहाय-खाय से लेकर पारण तक का समय
Shy Bladder Syndrome: भीड़ में टॉयलेट यूज करने में होती है हिचक, तो आपको है ये सोशल एंग्जायटी
कभी आपने सुना है कि कोई शख्स सोशल एंग्जायटी की वजह से टॉयलेट जाने से कतराता हैं। खासकर तब, जब वहां कुछ लोग मौजूद होते हैं। ऐसी स्थिति में वो शर्म और डर की वजह से यूरिन को कई देर तक रोक कर रखते हैं, जिस वजह धीरे-धीरे इस चीज के आदी हो जाते हैं, जो आगे चलकर कई परेशानियां खड़ी कर सकती हैं। इस स्थिति को मेडिकल टर्म में 'शाय ब्लैडर सिंड्रोम' या 'पैरुरिसिस' कहा जाता हैं।
सुनने में अजीब लगेगा लेकिन ये सच है। आजकल लोग शाय ब्लैडर सिंड्रोम की गिरफ्त में आ गए हैं। कारण सिर्फ इतना है कि लोग पब्लिक टॉयलेट में जाने से कतराते हैं। उन्हें लगता है कि आसपास खड़े लोग मजाक उड़ाएंगे। महिलाओं में इस तरह की बीमारी ज्यादा देखने को मिलती है क्योंकि वो गंदे टॉयलेट और यूरिन इंफेक्शन की वजह से वो पब्लिक टॉयलेट यूज करने से डरती हैं या घबराती है, इन कारणों की वजह से भी ये समस्या सोशल एंग्जायटी का रुप लेने लगी हैं।
पैरुरिसिस यानी शाय ब्लैडर सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति को अन्य लोगों के आसपास मौजूद होने पर पेशाब करना मुश्किल या असंभव लगता है। इंटरनेशनल पैरुरिसिस एसोसिएशन की एक रिपोर्ट अनुसार दुनिया में करीब 2 करोड़ लोग शाय ब्लैडर सिंड्रोम से जूझ रहे हैं। आइए जानते हैं शाय ब्लैडर सिंड्रोम या पैरुरिसिस क्या होती है और जानिए इसके बारे में सब कुछ।

पैरुरिसिस के लक्षण
पैरुरिसिस के हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकता है, ये होते हैं इसके लक्षण
- टॉयलेट का उपयोग करते समय प्राइवेसी की आवश्यकता होती हैं।
- ये डर कहीं न कहीं रहता है कि टॉयलेट का उपयोग करते समय दूसरे लोग आपकी बात न सुन लें।
- घर के अलावा अन्य शौचालयों का उपयोग करने में असहज महसूस करना।
- पब्लिक टॉयलेट का उपयोग करने के बारे में सोचकर ही चिंतित महसूस करना।
- शराब या अन्य ड्रिंक को पीने से परहेज करना ताकि आपको टॉयलेट का इस्तेमाल न करना पड़े।
पार्टी-फंक्शन में जाना सिर्फ इस वजह से अवॉइड करना ताकि वहां पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल करना।

पैरुरिसिस की वजह
इस स्थिति का आपकी यूरिनरी सिस्टम से कोई लेना देना नहीं हैं। ये एक प्रकार का सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर हैं। जब अन्य लोगों के आस-पास होने के वजह से टॉयलेट में जाकर पेशाब करने में आपको घबराहट या हिचकिचाहट महसूस होती है। हो सकती है कि इसकी एक वजह ये भी हो कि बचपन में टॉयलेट ट्रेनिंग के दौरान पेट से आने वाली आवाज सुनकर आपके माता-पिता ने या स्कूल में किसी ने आपकी आलोचना की हो। या किसी ने टॉयलेट में आपका मजाक उड़ाया हो। हो सकता है कि टॉयलेट से जुड़ा कोई बुरा हादसा आपके जेहन में रह गया हो तो इन हालातों में पैरुरिसिस यानि शाय ब्लैडर जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती हैं।
क्योंकि आपको हर बार एक ही चीज परेशान करती है कि ऐसा फिर से दोबारा हो सकता है। ये चिंता ही धीरे-धीरे आपके तंत्रिका तंत्र के एक हिस्से को एड्रेनालाईन से भर देती है, और जो मांसपेशियां आपके मूत्राशय को खाली करने में मदद करती है वो भी आपके इस डिसऑर्डर की वजह से जम जाती हैं।

शाय ब्लैडर की वजह से होने वाली समस्याएं
- ब्लैडर में दर्द होना।
- यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी यूटीआई का जोखिम।
- पेशाब की गति धीमी होना
- पूरी तरह से ब्लैडर खाली नहीं कर पाना।
- पेशाब के दौरान तनाव होना।
- पेशाब लीक होना।
- किडनी स्टोन का होना।

इस समस्या का इलाज
इस समस्या से उबरने के लिए कई तरह के थैरेपीज आपकी मदद कर सकती हैं। गंभीर मामलों में, मनोवैज्ञानिक से मिलना और परामर्श लेना काफी हद तक मददगार साबित हो सकता है।
रिलैक्सेशन तकनीक - चिंता को कम करने में मदद करने के लिए कई तरह की रणनीतियां सिखाई जाती हैं।
मनोचिकित्सा - एक प्रकार की मनोवैज्ञानिक परामर्श जो आपको मौजूदा हालातों से निपटने में मदद करती है, और समस्या को हल करना सिखाती है।
संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी - आपके सोचने और व्यवहार करने के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव लाना।
ग्रेजुएटेड एक्सपोज़र थेरेपी - इस थेरेपी में स्टेप बाई स्टेप प्रोग्राम होते हैं जिसमें जानबूझकर अधिक कठिन स्थानों में पेशाब करने की कोशिश करना सिखाया जाता है। हर 10 में से लगभग आठ लोगों को पैरुरिसिस के साथ स्नातक एक्सपोजर थेरेपी द्वारा मदद की जाती है।



Click it and Unblock the Notifications
