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नींद से जुड़ी इस बीमारी के वजह से हुई बप्पी लहरी की मुत्यु, जानें क्या है OSA और इसके लक्षण
डिस्को किंग के नाम से बॉलीवुड के मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर बप्पी लहरी (जिन्हें प्यार से बप्पी दा भी बुलाते थे) ने बीते मंगलवार को देर रात आखिरी सांस ली। अभी स्वर कोकिला लता मंगेशकर को इस दुनिया से विदा लिए 10 दिन ही हो रहे थे। ऐसे में इस बप्पी दा के निधन की खबर आने के बाद से बॉलीवुड और म्यूजिक इंडस्ट्री में निराशा की लहर छा गई है। बप्पी दा पिछले साल कोविड पॉजिटिव हो गए थे। इसके बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी मौत ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया की वजह से हुई है।
अस्पताल के निदेशक डॉक्टर दीपक नामजोशी ने अपने बयान में बताया, "बप्पी लहरी को फेफड़ों में संक्रमण के कारण एक महीने के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जो ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया ( OSA) के कारण हुआ था। सोमवार यानी 15 फरवरी को उन्हें डिस्चार्ज किया गया था जिसके बाद उनकी तबीयत फिर से खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल में मंगलवार को फिर से भर्ती करवाया गया। जहां उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वे पिछले एक साल से ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) से पीड़ित थे। आइए जानते हैं कि ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया क्या है और इसके लक्षण और इलाज के बारे में।

क्या होता है ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया
मेयो क्लिनिक के अनुसार, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea) नींद से संबंधित सांस से जुड़ी एक बीमारी है। इसकी वजह से सोते समय सांस बार-बार रुकती और चलती है। इस बीमारी मे व्यक्ति की सांस नींद में ही रुक जाती है और उसे पता भी नहीं चलता है। नींद में सांस रुकने की ये दिक्कत कुछ सेकंड्स से लेकर 1 मिनट तक हो सकती हैं। स्लीप एपनिया कई तरह के होते हैं, लेकिन इनमे सबसे आम ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया है। ये तब होता है जब गले की मांसपेशियां नींद के दौरान ढीली पड़ जाती हैं और एयर फ्लो में रुकावट डालती हैं। इसकी वजह से मरीज तेज-तेज खर्राटे लेता है लेकिन खर्राटे लेने वाला हर व्यक्ति इस बीमारी से ग्रस्त नहीं होता है। इस बीमारी में सांस लेने वाली नली के ऊपरी मार्ग में रुकावट आने से वायु का प्रवाह सही तरीके से नहीं हो पाता है। सांस लेन में रुकवट की देरी होने से खून में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है और नतीजन मरीज की मौत हो जाती है।

लक्षण
दिन में बहुत नींद आना
जोर-जोर से खर्राटे लेना
सोते-सोते सांस रुकी हुई महसूस होना
हांफने या घुटन कि साथ अचानक जागना
मूड चेंज और डिप्रेशन
सुबह के समय सिरदर्द रहना
हाई ब्लड प्रेशर
सेक्स ड्राइव में कमी
ध्यान लगाने में परेशानी आना
मुंह सूखना या गले में खराश

वजह
मोटापा - वयस्क लोगों में यह समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। अकसर गर्दन में ज्यादा फैट होने की वजह सेसोते समय वायुमार्ग ब्लॉक हो जाता है, जिससे सांस लेने में मुश्किल होने लगती है।
जेनेटिक - अगर आपके परिवार के लोगों में किसी को यह समस्या पहले से है, तो हो सकता है कि आगे चलकर आपको भी यह समस्या हो सकती है।
ज्यादा उम्र- 60 की उम्र के बाद स्लीप एनपिया होने की संभावना बढ़ जाती है।
न्यूरोमस्कुलर- न्यूरोमस्कुलर एक ऐसी स्थिति है, जिसमें दिमाग वायुमार्ग और सीने की मांसपेशियों तक संदेश पहुंचाने में असमर्थ हो जाता है। यह स्थिति ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का कारण बन सकता है।
दिल और गुर्दों की समस्या- दिल और गुर्दों की समस्या होने पर भी ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का खतरा बेहद बढ़ जाता है। जो दिल और किडनी की बीमारी से पीड़ित होते हैं, उनके गर्दन में तरल पदार्थ जमा हो जाते हैं, जो वायुमार्ग को ब्लॉक कर देते हैं। वायुमार्ग के ब्लॉकेज से यह समस्या होने लगती है।

किन्हें ज्यादा खतरा
ये बीमारी किसी को भी हो सकती है। लेकिन इसका ज्यादा खतरा मोटापे से पीड़ित लोगों, उम्रदराज लोगों, हाइपरटेंशन के मरीजों, क्रोनिक नेजल कंजेशन, डायबिटीज, स्मोकिंग करने वालों और पारिवारिक इतिहास वाले लोगों को अधिक रहता हैं।

इसका इलाज
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का इलाज संभव है। इसमें एक ऐसे डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है जो सोते समय आपके वायुमार्ग को खुला रखता है। इसके इलाज का एक और तरीका है जिसमें एक माउथपीस के जरिए निचले जबड़े पर दबाव डाला जाता है। कुछ मामलों में इसकी सर्जरी भी करानी पड़ती है। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया में पीठ के बल सोने पर खर्राट ज्यादा आते हैं और करवट लेने पर शांत हो जाते हैं।

ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया के प्रभाव क्या हैं?
ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया एक गंभीर बीमारी है। नींद न पूरी होने की वजह से कई दिक्कतें हो सकती हैं। इस समस्या के वजह से दिन में काम करने के दौरान कभी भी नींद आ सकती है। गाड़ी चलाते वक्त या टीवी देखते हुए कहीं भी अचानक से नींद आने के वजह से कोई अनहोनी भी हो सकती हैं। अगर इस बीमारी का समय रहते इलाज नहीं किया गया तो परिणामस्वरूप हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक, असामान्य धड़कन, कार्डियोमायोपैथी (हृदय की मांसपेशियों के ऊतकों का बढ़ना), हृदय गति रुकना, मधुमेह, मोटापा और दिल के दौरे सहित कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया के दौरान खून मेंऑक्सीजन लेवलमें अचानक गिरावट से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और इससे कार्डियो सिस्टम पर जोर पड़ता है। जिसकी वजह हार्ट फैलियर हो सकता है। इस वजह से हाई ब्लडप्रेशर भी होता है। स्लीप एपनिया की समस्या 50% तक दिल की बीमारियों से जूझ रहें लोगों में देखी जाती हैं।



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