Latest Updates
-
Mother’s Day 2026: इस मदर्स डे मां को दें स्टाइल और खूबसूरती का तोहफा, ये ट्रेंडी साड़ियां जीत लेंगी उनका दिल -
World Ovarian Cancer Day 2026: ओवेरियन कैंसर से बचने के लिए महिलाएं करें ये काम, डॉक्टर ने बताए बचाव के तरीके -
World Ovarian Cancer Day 2026: ओवेरियन कैंसर होने पर शरीर में दिखाई देते हैं ये 5 लक्षण, तुरंत करवाएं जांच -
World Thalassemia Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व थैलेसीमिया दिवस? जानें इसका महत्व और इस साल की थीम -
Mother's Day 2026: डिलीवरी के बाद हर महिला को करने चाहिए ये योगासन, जल्दी रिकवरी में मिलेगी मदद -
Mother's Day 2026: मदर्स डे पर मां को दें सेहत का तोहफा, 50 के बाद जरूर करवाएं उनके ये 5 जरूरी टेस्ट -
Mother’s Day Special: बेटे की जिद्द ने 70 साल की उम्र में मां को दी हिम्मत, वायरल हैं Weightlifter Mummy -
कौन हैं अरुणाचलम मुरुगनाथम? जिन्हें नोबेल शांति पुरस्कार 2026 के लिए किया गया नॉमिनेट -
सुबह खाली पेट भीगी हुई किशमिश खाने से सेहत को मिलेंगे ये 5 फायदे, कब्ज से लेकर एनीमिया से मिलेगी राहत -
Rabindranath Tagore Jayanti 2026 Quotes: रवींद्रनाथ टैगोर जयंती के मौके पर शेयर करें उनके ये अनमोल विचार
कोरोना संक्रमितों के साथ रहने से विकसित हो रही साइलेंट इम्युनिटी, वैज्ञानिकों का दावा
कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए लंबे समय से हर्ड इम्यूनिटी की चर्चा हो रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बहुत सुरक्षित तरीका नहीं है। हर्ड इम्यूनिटी यानी अगर एक बड़ी आबादी कोरोना से संक्रमित हो जाए तो उनमें पैदा हुई इम्यूनिटी की बदौलत बाकी लोग भी इस संक्रमण से सुरक्षित हो जाते हैं। इसी तरह का एक दावा फ्रांस के वैज्ञानिकों ने लंबे अध्ययन के बाद किया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि कोरोना मरीजों के साथ रहने वाले लोग इस महामारी से बच सकते हैं। फ्रांस के स्ट्रासबर्ग यूनिवर्सिटी अस्पताल के शोधकर्ताओं ने इसे 'साइलेंट इम्यूनिटी' नाम दिया है।

फ्रांस के वैज्ञानिकों ने लंबे अध्ययन के बाद यह दावा किया है कि एक घर में किसी के कोरोना पॉजिटिव होने के बाद वहां के तीन चौथाई सदस्यों के शरीर में साइलेंट इम्यूनिटी विकसित हो जाती है। इसके बाद अगर कहीं वे संक्रमण की चपेट में आ गए तो शरीर में पैदा हुई इसी रक्षा कवच की वजह से खुद-ब-खुद ठीक भी हो जाएंगे।
फ्रांस के स्ट्रासबर्ग यूनिवर्सिटी अस्पताल के शोधकर्ताओं ने इसे साइलेंट इम्यूनिटी नाम दिया है। उनके मुताबिक, ब्लड की एंटीबॉडी जांच से यह पता नहीं लग पाता कि कोरोना के खिलाफ शरीर में इम्यूनिटी विकसित हो चुकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कोरोना वायरस के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी बन रही है तो आप जल्दी इस महामारी से ठीक हो सकते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि दुनिया की 10 फीसदी आबादी में कोरोना वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा विकसित हो चुकी है। एंटीबॉडी जांच के आधार पर उनका यह आकलन है कि 10 फीसदी आबादी कोरोना वायरस के हल्के लक्षणों से संक्रमित होकर खुद ही ठीक हो चुकी है। हालांकि हालिया शोध के मुताबिक, दुनिया में संक्रमित हो चुके लोगों की संख्या अनुमान से ज्यादा हो सकती है क्योंकि उनमें साइलेंट इम्यूनिटी विकसित हो चुकी है।

शोधकर्ताओं ने शोध अध्ययन के दौरान कोरोना संक्रमित एक परिवार के सात लोगों में विशेष तरह की एंटीबॉडी का पता लगाया जो कि चौंकाने वाला था। एक परिवार के आठ में से छह सदस्यों यानी एक चौथाई सदस्यों का एंटीबॉडी टेस्ट निगेटिव निकला, जिससे वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि ये संक्रमित नहीं हुए थे। लेकिन उनके बोन मैरो में टी-कोशिकाओं की जांच करने पर पाया कि उनमें कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी मिली। जिन सदस्यों के बोन मैरो में टी-कोशिकाओं की जांच के दौरान कोरोना की एंटीबॉडी मिली, उस आधार पर शोधकर्ताओं का कहना था कि उनके शरीर में साइलेंट इम्यूनिटी विकसित हो चुकी थी। इसका मतलब है कि पूर्व में ये सभी कोरोना वायरस के संक्रमण की जद में आए। भले ही लक्षण बहुत हल्के हों, लेकिन ये सभी खुद-ब-खुद ठीक हो गए।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब शरीर के इम्यून सिस्टम को वायरस से लड़ने के लिए अतिरिक्त सहायता की जरूरत होती है तब ब्लड की श्वेत रक्त कणों से टी-सेल निकलकर बोन मैरो में पहुंचते हैं। इस तरह वायरस से लड़ने के लिए यह शरीर का प्रमुख हथियार हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications