Latest Updates
-
Easter Sunday 2026: क्यों मनाया जाता है 'ईस्टर संडे'? जानें ईसाई धर्म में इसका महत्व और इतिहास -
लाल, काली या नारंगी, सेहत के लिए कौन सी गाजर है सबसे ज्यादा पावरफुल? -
Delhi-NCR में भूकंप के झटको से कांपी धरती, क्या बाबा वेंगा की खौफनाक भविष्यवाणी सच होने वाली है? -
Aaj Ka Rashifal 4 April 2026: शनिवार को इन 5 राशियों पर होगी धनवर्षा, जानें अपनी राशि का भाग्य -
चेहरे पर पड़े चेचक के दाग हटाने के 5 घरेलू उपाय, जिद्दी गड्ढों और माता के निशान से पाएं छुटकारा -
क्यों मनाया जाता है World Rat Day? सबसे पहले किस देश में पैदा हुए चूहे, कैसे पूरी दुनिया में पहुंचे? -
International Carrot Day 2026: 4 अप्रैल को ही क्यों मनाया जाता है विश्व गाजर दिवस? जानें रोचक कहानी -
Bridal Blouse Designs: लेटेस्ट ब्राइडल ब्लाउज बैक डिजाइन, डोरी से लेकर हैवी एम्ब्रॉयडरी तक, देखें 7 पैटर्न्स -
कंडोम की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? जानें ईरान-इजरायल युद्ध का असर और कपल्स के लिए सेफ्टी टिप्स -
Musibat ki Dua: दुख, तंगी और गम से निजात की इस्लामी दुआएं, इनके जरिए होती है अल्लाह से सीधी फरियाद
देर रात तक जागने से टीनएजर्स के माइंड के डेवलपमेंट पर पड़ता है असर, रिसर्च
एक नई रिसर्च के अनुसार, रात में बहुत देर तक सोने वाले टीनएजर्स में बिहेवियर रिलेटेड प्रॉब्लम्स होने और बाद की जिंदगी में दिमाग के विकास में देरी होने का खतरा बढ़ जाता है। द जर्नल ऑफ चाइल्ड साइकोलॉजी एंड साइकियाट्री में पब्लिश स्टडी से पता चलता है कि किशोरों के दिमाग का क्या होता है अगर वे "रात के उल्लू" बन जाते हैं। शोधकर्ताओं ने देर से सोने की वरीयता और वाइट सब्सटेंस के विकास के बीच संबंधों की जांच की है। शोधकर्ताओं ने रिसर्च के लिए 12 से 19 वर्ष के बीच के 209 किशोरों पर स्टडी किया। उन्होंने कहा कि उनमें से 49 फीसदी मेल टीनएजर्स थे।

इमोशनल और बिहेवियरल संबंधी समस्याओं का खतरा
स्टडी में कहा गया है, इन नमूनों में, शाम के लिए प्रायोरिटी 19 साल की उम्र तक अधिक प्रमुख हो गई। शाम के प्रति बड़े व्यक्तिगत स्तर के बदलाव ने एक्सट्रालाइजेशन में अधिक गंभीरता की भविष्यवाणी की, लेकिन इंटरनलाइजेशन नहीं, ये 19 साल की उम्र में लक्षण रहे।
रिसर्च में कहा गया है कि जो टीनएजर्स रात में देर से सोते हैं, उनमें शुरुआती काउंटरपार्ट की तुलना में इमोशनल और बिहेवियरल संबंधी समस्याओं का खतरा अधिक होता है। जो किशोर देर रात तक जागते हैं उनमें व्यवहार संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है और जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं उनके दिमाग का विकास में देरी होती है।

देर रात सोने से मस्तिष्क में होते हैं ये बदलाव
अध्ययन द जर्नल ऑफ चाइल्ड साइकोलॉजी एंड साइकियाट्री में पब्लिश हुआ था जहां रिसर्चर्स ने पाया है कि देर रात सोने और मस्तिष्क में वाइट सब्सटेंस के विकास के बीच एक गंभीर संबंध है। यह स्टडी 12 से 19 साल के 209 टीनएजर्स पर की गई।

नींद की महत्वपूर्ण कमी से गुजर रहे किशोर
परिणामों ने अधिकांश 17-19 वर्ष के बच्चों में देर रात रहने का एक की प्वाइंट दिखाया। इसलिए, ये कहा गया कि जो किशोर रात में बहुत देर से सोने जाते हैं, वे नींद की महत्वपूर्ण कमी से गुजरते हैं, जिससे उनके शुरुआती काउंटरपार्ट्स की तुलना में भावनात्मक और व्यवहार संबंधी समस्याओं का खतरा अधिक होता है।
(https://www.ncbi.nlm.nih.gov/)



Click it and Unblock the Notifications











