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Corona Virus: दिल्ली मॉडल क्या है, जानिए क्यों विदेशों में भी हो रही है इसकी चर्चा
भारत में भी संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन अब देश की राजधानी यानी दिल्ली की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। यहां लोग जल्दी ठीक हो रहे हैं। साथ ही संक्रमितों की संख्या भी घटती जा रही है। ऐसे में अब लोग यह जानने को उत्सुक हो रहे हैं कि आखिर दिल्ली की सरकार ने ऐसा क्या किया कि कोरोना संक्रमण के मामलों में तेज गिरावट आ गई जबकि कुछ दिन पहले इसे देश का 'सबसे बड़ा कोरोना हॉटस्पॉट' कहा जा रहा था। इसे 'दिल्ली मॉडल' नाम दिया गया है। आइए जानते हैं कि आखिर क्या है ये 'दिल्ली मॉडल', जिसकी चर्चा अब देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी हो रही है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि आज दिल्ली मॉडल की चर्चा दुनियाभर में हो रही है। जहां हर जगह मामले बढ़ते जा रहे हैं, वही दिल्ली में कम हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में रिकवरी रेट (संक्रमित लोगों के ठीक होने की दर) 88 फीसदी पहुंच गया है। इसको सीधे शब्दों में समझें तो 100 में से 88 लोग ठीक हो चुके हैं। अब सिर्फ कुछ ही फीसदी संक्रमित लोग बचे हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में तो 15,500 बेड का इंतजाम है, जिसमें 2800 पर ही मरीज हैं।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में कोरोना से मौत के आंकड़ों में भी भारी गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि रविवार को 21 संक्रमित मरीजों की मौत हुई है जबकि जून महीने में यह आंकड़ा 100 के पार हुआ करता था। केजरीवाल ने कहा कि पहले 100 लोगों का कोरोना टेस्ट होता था तो उसमें से 35 संक्रमित निकलते ही निकलते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर पांच हो गई है। जहां संक्रमण के मामले में दिल्ली देश में दूसरे स्थान पर पहुंच चुका था, वही अब वह खिसककर 10वें स्थान पर चला गया है। हालांकि इस दौरान मुख्यमंत्री केजरीवाल ने लोगों से यह भी अपील की कि वो सावधानी जरूर बरतें, मास्क हमेशा पहनें और सामाजिक दूरी का पालन करें। उन्होंने यह भी आगाह किया कि कोरोना कब बढ़ जाए, कोई नहीं जानता। ऐसे में सतर्क रहना ही बेहतर है।

इसी महीने अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली मॉडल के बारे में बताते हुए कहा था कि कलेक्टिविटी और टीम वर्क ही दिल्ली मॉडल की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि पहले हमने एक बैठक की और पूरा प्लान बनाया कि कैसे क्या करना है। चूंकि हमारे पास टेस्टिंग की उतनी व्यवस्था नहीं थी, इसलिए हमने केंद्र से मदद ली। आज के समय में कम से कम 22 हजार टेस्ट हर रोज हो रहे हैं। साथ ही हमने होम आइसोलेशन की भी शुरुआत की। इसमें डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित मरीज को समझा कर आते हैं। साथ ही उन्हें ऑक्सीमीटर भी दिया जाता है। इस होम आइसोलेशन की सुविधा के चलते टेस्टिंग का आंकड़ा भी बढ़ा है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा था, 'कोरोना से हो रही मौतों को कम करने के लिए टेस्टिंग बढ़ाई गई, क्योंकि अक्सर ऐसा होता था कि समय पर संक्रमितों की जांच नहीं हो पाती थी और जब तक बीमारी का पता चलता था, तब तक काफी देर हो जाती थी। इसके अलावा एंबुलेंस की भी दिक्कतें थीं। हमने उनकी संख्या बढ़ाई और मरीज तक उनके पहुंचने की तेजी भी। आज हर व्यक्ति के पास आधे घंटे के अंदर एंबुलेंस पहुंच जाती है।'
विशेषज्ञ भी कहते हैं कि दिल्ली में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर अधिक जोर दिया जाता है, ज्यादा घरों का दौरा किया जा रहा है, ठीक-ठाक संख्या में टेस्टिंग की जा रही है और सार्वजनिक संचार भी बेहतर है। इससे स्थिति में बदलाव आया है। इसके अलावा लोग सही समय पर सतर्क भी हो जा रहे हैं, जिसका फर्क भी काफी हद तक दिल्ली मॉडल बनाने पर पड़ा है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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