Food Coma : भरपेट खाने के बाद आप भी मदहोश हो जाते हैं, ये हैं फूड कोमा के लक्षण और इससे बचने के उपाय

क्या आपको भी पेटभर के भोजन करने के बाद नींद या आलस आने की शिकायत रहती है, और ना चाहते हुए भी आपका मन आपको सोने के लिए प्रेरित करता है, तो आपको बतादें कि इसके पीछे का कारण "फूड कोमा" है, जो अक्सर नींद और ऊर्जा के स्तर में कमी की भावना को दर्शाता है, ऐसी स्थिति आमतौर पर खाने के बाद बनती है। मेडिकल भाषा में इसे प्रोस्टप्रेंडियल सोम्नोलेंस कहा जाता है।

प्रोस्टप्रेंडियल सोम्नोलेंस, जिसे बोलचाल की भाषा में फूड कोमा कहा जाता है, थकान या नींद की ऐसी भावना है जो खाना खाने के तुरंत बाद हो सकती है। पोस्टप्रांडियल सोम्नोलेंस खाने के बाद की स्थिति को संदर्भित करता है, जबकि सोम्नोलेंस नींद आने की स्थिति से संबद्ध है। वैसे देखा जाए तो यह शरीर में भोजन को पचाने की एक प्राकृतिक जैविक प्रतिक्रिया हो सकती है, जो आपके भोजन के प्रकार पर निर्भर करता है या ये किसी और चीज के कारण भी हो सकता है। शोधकर्ता अभी भी पोस्टप्रांडियल सोम्नोलेंस के कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

 फूड कोमा के लक्षण

फूड कोमा के लक्षण

प्रोस्टप्रेंडियल सोम्नोलेंस के लक्षणों में नींद या उनींदापन, ऊर्जा की कमी, ध्यान या एकाग्रता की कमी शामिल है। उल्लिखित लक्षण कुछ या अधिक घंटों के बीच रह सकते हैं।

फूड कोमा की वजह और इससे बचने के तरीके

फूड कोमा की वजह और इससे बचने के तरीके

कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन शरीर को ट्रिप्टोफैन को अवशोषित करने में मदद करता है। यह एक एमिनो एसिड है जिसका उपयोग शरीर सेरोटोनिन बनाने के लिए करता है। सेरोटोनिन एक हार्मोन है जो नींद, पाचन और मनोदशा को नियमित करने में सहायता करता है। इसे सामान्य भोजन के बाद की भावनाओं जैसे खुशी, सुस्ती और तृप्ति के लिए जिम्मेदार माना जाता है। वैसे प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट खाने से भी नींद आने का अहसास हो सकता है। अगर आप नींद और थकान से बचने के लिए अपने आहार में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का सेवन सीमित करते है तो इससे आपको इस समस्या से बचने में मदद मिल सकती है।

भोजन की मात्रा

भोजन की मात्रा

जो लोग दिन में अधिक भोजन करते हैं उन्हें अक्सर दोपहर में नींद आती है। इसका कारण यह हो सकता है कि भोजन को पचाने के लिए एक निश्चित मात्रा में प्रयास की आवश्यकता होती है, जितनी ज्यादा मात्रा में भोजन हम करेंगे, शरीर को उसे पचाने के लिए उतने ही अधिक प्रयास करने की आवश्यकता होगी।

यह शरीर की प्राकृतिक ऊर्जा की गिरावट के साथ ऊर्जा के आकस्मिक गिरावट का कारण बनता है। और यह आमतौर पर दोपहर के 2 से 5 बजे के बीच होता है। रिसर्च के अनुसार "सरकेडियन रिदम" आपकी ऊर्जा में इस जागृत गिरावट का कारण हैं, ये 24 घंटे चलने वाली वो बॉडी क्लॉक है, जो पर्यावरण के अनुरूप आपके सोने और उठने का ध्यान रखती है।

वैसे अगर आप अपने ऊर्जा के स्तर को बनाए रखना चाहते है तो कम मात्रा में भोजन करें और स्वस्थ भोजन करने की आदत ड़ालें, ऐसा करके ऊर्जा में होने वाली इस गिरावट को रोका जा सकता है।

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