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Nipah Virus Infection: क्या है निपाह वायरस, जानें कैसे ये खतरनाक वायरस फैलता है और बचाव के तरीके
कोविड महामारी के बीच केरल में निपाह वायरस के मामले सामने आने से केरल अलर्ट पर है। केरल के कोझीकोड के पास निपाह से 12 साल के एक लड़के की मुत्यु हो जाने और दो स्वास्थ्य कर्मियों में संक्रमण के लक्षण दिखने के बाद से ही वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सख्त कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग का आदेश दिया गया है। इससे पहले 2018 में केरल में वायरस के प्रकोप की वजह से 17 लोगों की मौत हुई थी। आइए जानते है कि निपाह कैसे फैलता है? क्या यह घातक है? इससे बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी हैं? इस बारे में सब कुछ जानिए जो आपको जानना आवश्यक है।

कैसे फैलता है?
निपाह वायरस संक्रमण एक जूनोटिक बीमारी का एक उदाहरण है, जहां जानवरों की बीमारियों को लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। एक जूनोटिक रोग में, यदि पशु को पर्याप्त एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं, तो मनुष्य के रोग होने की संभावना कम हो जाती है।
निपाह वायरस (NiV) संक्रमण एक जूनोटिक बीमारी है, जिसका मतलब है कि जहां जानवरों से जनित वायरस इंसानों को संक्रमित करती है। ये वायरस फलों और चमगादड़ों से सीधे रुप से सूअरों जैसे अन्य संक्रमण वाहकों के माध्यम से मनुष्यों में फैलती है। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की गाइडलाइंस में बताया गया है कि अगर चमगादड़ ने किसी फल को संक्रमित किया है और उसे खाया जाता है तो निपाह फैल सकता है। संक्रमित फल या खजूर के रस का सेवन करने से आप सीधे खजूर के संक्रमण में आ जाते है।
अप्रत्यक्ष संक्रमण में किसी मध्यवर्ती संचारक के संपर्क में आने से संक्रमित होने की संभावना रहती है। जैसे जानवरों के एरोसोलिज्ड श्वसन स्राव के माध्यम से होता है। इसके अलावा, संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से भी आप संक्रमित हो सकते है, जैसे संक्रमित व्यक्ति की देखभाल करने वाले, आगंतुकों और अस्पताल के कर्मचारियों के संक्रमित होने की संभावना रहती है।

संकेत और लक्षण
निपाह वायरस का संक्रमण इंसेफेलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन) से जुड़ा होता है। इसके लक्षण सामने आने में अमूमन 5 से 14 दिन लग जाते है, इस वायरस के संपर्क में आने के 3-14 दिनों के भीतर बुखार और सिरदर्द जैसी समस्याएं होने लगती है, इसके बाद उनींदापन, भटकाव और मानसिक भ्रम जैसी समस्याएं होती है। इन लक्षणों के सामने आने के भीतर संक्रमित व्यक्ति 24-48 घंटों के भीतर कोमा में जा सकता है। कुछ रोगियों को अपने संक्रमण के प्रारंभिक भाग के दौरान सांस की बीमारी होती है, और गंभीर न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी दिखाई देते हैं।

निपाह से बचने का उपाय
- सूअरों और सुअर संचालकों के संपर्क से बचें।
- साबुन और पानी से हमेशा हाथ धोते रहें
कच्चे खजूर के फल खाने और उसके रस (ताड़ी) को पीने से बचें।
- व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ अच्छे से हाथ धोएं।
- व्यक्ति से व्यक्ति के संक्रमण से बचने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर यात्रा या काम के दौरान अधिमानतः एन 95 मास्क का उपयोग करें।
- लक्षणों दिखते ही शीघ्र निदान और उपचार के लिए तुरंत डॉक्टर को रिपोर्ट करें।
- गाइडलाइंस के मुताबिक ही निपाह से मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार पूरा किया जाएगा
फल खाने से पहले उसे अच्छी तरह से धो लें
बीमार पशुओं या जानवरों को संभालते हैं तो हाथ में दस्ताने और फेस मास्क लगाकर ही ऐसे काम करें।

इसकी जांच कैसे करें
निपाह वायरस की जांच भी कोरोना की तरह RTPCR टेस्ट की किया जाता है। इसमें खून साथ शरीर के अन्य फ्लूइड की जांच होती है, जैसे बलगम आदि से। इसमें एंटीबॉडी टेस्ट के लिए एलिजा भी किया जाता है, जिससे वायरस की पहचान होती है।

निपाह वायरस का इलाज
निपाह वायरस के लिए अभी तक कोई दवा या इंजेक्शन ईजाद नहीं किया गया है। निपाह वायरस से अगर सांस संबंधी समस्या हो रही है तो इसमें परेशानी होती है तो सपोर्टिव ट्रीटमेंट दे सकते हैं। इस बीमारी में न्यूरोलॉजिकल समस्या भी देखने को मिल सकती है, इसलिए इससे जुड़े लक्षणों की पहचान और इलाज जरूरी है।
निपाह वायरस का फिलहाल कोई निश्चित इलाज नहीं है। इसका इलाज लक्षण के आधार पर किया जाता है। जैसे कि कोरोना वायरस का किया जाता है। कोरोना में चिकित्सक लक्षणों को कम करने की दवा के साथ-साथ इम्यूनिटी बढ़ाने पर जोर देते हैं। इसमें भी यही होता है। इसलिए जिनकी इम्यूनिटी कम होती है, वो इसके शिकार जल्दी होते हैं।
निपाह वायरस की फिलहाल कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इससे बचने के उपाये ही वैक्सीन हैं, जैसे कि चमगादड़ व सुअरों से दूर रहना, संक्रमित को आईसोलेट करना आदि। हालांकि वैज्ञानिकों के अनुसार बंदरों को हेंड्रा वायरस से चाने के लिए दी जाने वाली वैक्सीन से बनने वाले एंटीबॉडी निपाह से भी लड़ सकते हैं। लेकिन फिलहाल मनुष्यों पर इस वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल अब तक नहीं किया गया है।
निपाह वायरस फिलहाल महामारी नहीं है, लेकिन हां इसमें पाये जाने वाले लक्षण किसी महामारी के जैसे ही हैं। इससे ग्रसित लोगों में जो लक्षण पाये जाते हैं, जैसे कि लक्षण दिखने में सात से 14 दिन लगना। क्योंकि अगर कोई व्यक्त संक्रमित है और लक्षण दिखने में समय लग रहा है, तो उस बीच दूसरे लोग इसके शिकार हो सकते हैं। तेज़ बुखार, सर्दी, खांसी, मानसिक भ्रम, आदि फ्लू के लक्षण हैं, जो आम तौर पर महामारी के जैसे होते हैं।
दो दशक पहले 1998 में मलेशिया के कामपुंग सुंगाई निपाह गांव के सुअरों में इस वायरस की पहली बार पहचान की गई थी। सुअरों से यह वायरस चमगादड़ (Fruit Bats) के संपर्क में आया। इसके द्वारा पशुओं और उनसे इंसानों में फैला। यह एक जूनोटिक बीमारी है।
मलेशिया में जब यह पहली बार पहचान में आया तो इससे संक्रमित करीब 50 प्रतिशत मरीजों की मौत हो गई। उसी दौरान यह संक्रामक बीमारी सिंगापुर में भी फैली। उसके बाद 2004 में बांग्लादेश में यह फैली। फिर 2018 में केरल में इस वायरस से जुड़े मामले देखने को मिले।
निपाह वायरस, जिसे बार्किंग पिग सिंड्रोम भी कहा जाता है, दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाने वाला एक आरएनए वायरस है जो मनुष्यों में एक गंभीर और अक्सर घातक न्यूरोलॉजिकल बीमारी का कारण बनता है। इसकी वजह से संक्रमित व्यक्ति कोमा की स्थिति में जा सकता है। इस वायरस से संक्रमित व्यक्तियों में मृत्यु दर 60 से 70% है।
निपाह वायरस का प्रकोप हर वर्ष एशिया के कुछ हिस्सों में देखने को मिलता है, मुख्यतः बांग्लादेश और भारत में। बीमार सूअरों और चमगादड़ों के संपर्क से दूरी बनाना ही निपाह वायरस से बचने का सबसे आसान तरीका है, इसके अलावा ऐसी जगह का फल खाने से भी बचना चाहिए।



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