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बंद नाक और माइग्रेन से जलनेति दिलाता है राहत, आयुर्वेद विशेषज्ञ ने बताया फायदे और इसे करने का सही तरीका
आजकल धूल, मिट्टी, प्रदूषण, और मौसम में बदलाव के कारण बहुत से लोग सर्दी, जुकाम, खांसी, छींक, नाक बंद होना और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करते हैं। इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए योग क्रियाओं में से एक प्रभावी उपाय है जलनेति। यह नाक शोधन की प्राचीन क्रिया है, जो नाक की सफाई और श्वसन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करती है।
जलनेति क्रिया इन समस्याओं से राहत पाने का प्राकृतिक और प्रभावी उपाय है। यह नाक की सफाई कर साइनस, एलर्जी और संक्रमण को कम करती है। साथ ही, यह श्वसन तंत्र को स्वस्थ रखने और नाक, गला, व आंखों की जलन को कम करने में मदद करती है। नियमित अभ्यास लाभकारी होता है। जयपुर स्थित राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय के आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉक्टर पीयूष त्रिवेदी से जानिए कैसे जलनेति आपके सर्दी-जुकाम से बचाता है और फेफड़ों की शुद्धि करता हैं।

जलनेति क्रिया कैसे करता है काम
जलनेति क्रिया में गुनगुने नमकीन पानी का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे नाक के एक छिद्र से डाला जाता है और दूसरे छिद्र से निकाला जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान नाक के अंदर जमी गंदगी, बैक्टीरिया और म्यूकस बाहर निकल जाते हैं, जिससे सर्दी, जुकाम, और नाक की तकलीफों से राहत मिलती है। जलनेति से न केवल नाक की सफाई होती है, बल्कि यह श्वसन तंत्र को मजबूत भी करता है और संक्रमण से बचाता है।
जलनेति क्रिया को दिन में किसी भी समय किया जा सकता है, और यदि किसी व्यक्ति को जुकाम हो तो यह प्रक्रिया कई बार की जा सकती है। यह नाक में सूजन को कम करती है, और साथ ही नासिका के क्षेत्र में रक्त प्रवाह को बढ़ाती है, जिससे जल्दी आराम मिलता है। नियमित अभ्यास से यह श्वसन प्रणाली को स्वस्थ बनाए रखता है और मौसमी बीमारियों से बचाता है।
जलनेति क्रिया की प्रक्रिया
जलनेति करने के लिए आधा लीटर गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर नेति पात्र में भरें। कागासन में बैठें और पैरों के बीच डेढ़ से दो फीट की दूरी रखें। कमर से आगे झुकें और नाक का जो छिद्र उस समय अधिक सक्रिय हो, सिर को उसकी विपरीत दिशा में झुकाएं।
नेति पात्र की नली को नाक के एक छिद्र में डालें और पानी धीरे-धीरे प्रवाहित करें। इस दौरान मुंह खुला रखें और लंबी सांस न लें। पानी नाक के दूसरे छिद्र से बाहर निकलना चाहिए। फिर इसी प्रक्रिया को दूसरे छिद्र से दोहराएं।
दोनों नथुनों की सफाई के बाद सीधे खड़े होकर सुझाए गए यौगिक अभ्यास करें। इससे नाक के अंदर का बचा हुआ पानी, बैक्टीरिया और म्यूकस पूरी तरह बाहर निकल जाता है। जलनेति श्वसन तंत्र को शुद्ध करती है और नाक की सफाई करके सर्दी, जुकाम और अन्य समस्याओं से राहत दिलाती है। नियमित अभ्यास से इसका अधिक लाभ मिलता है।
जलनेति के फायदे और सावधानियां
नाक की सफाई: जलनेति नाकशोधन प्रक्रिया हैं। यह सांस नली से संबंधित समस्याओं, पुरानी सर्दी, दमा, और सांस लेने में होने वाली परेशानियों को दूर करती है। इसके नियमित अभ्यास से नासिका क्षेत्र में कीटाणुओं का पनपना रुकता है।
आंख, कान और गले की समस्याओं में राहत: जलनेति से आंखों में पानी आना, जलन और खुजली जैसी समस्याएं कम होती हैं। यह कान और गले की बीमारियों से भी बचाव करती है। सिरदर्द, अनिद्रा और सुस्ती में भी जलनेति का अभ्यास फायदेमंद साबित होता है।
सावधानियां
- जलनेति क्रिया के बाद यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि नाक के छिद्रों में पानी बचा न हो। बचा हुआ पानी सर्दी का कारण बन सकता है।
- जलनेति के बाद एक नथुने को बंद कर दूसरे से धीरे-धीरे हवा बाहर निकालें और फिर दूसरे नथुने से यही प्रक्रिया दोहराएं।
- शुरुआत में यह क्रिया किसी योग विशेषज्ञ की निगरानी में करें ताकि इसे सही तरीके से सीखा जा सके।
- जलनेति के बाद नाक को सुखाने के लिए कपालभाति प्राणायाम करना लाभकारी होता है।
- जलनेति करने के तुरंत बाद सोना नहीं चाहिए क्योंकि इससे पानी श्वास नलिका के मार्ग से होकर फेफड़ों तक पहुंच सकता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
इन सावधानियों का पालन कर जलनेति से अधिकतम लाभ पाया जा सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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