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क्या होते हैं पौषबड़े? क्यों पौष माह में भगवान को लगाते हैं इसका भोग, सेहत भी है एक वजह
Paush Bada Health & Astro Benefits : पौष माह की ठंड में राजस्थान के कई इलाको में पौषबड़ा बनाने का रिवाज है। यह एक तरह का महोत्सव है। जैसा कि नाम से मालूम चल रहा है पौष यानी हिंदू पंचाग का दसवां महीना और बड़ा यानी पकौड़ा।
राजस्थान के लगभग हर गांव और शहर में यह महोत्सव मनाया जाता है। पौष महीने में बनने वाले इन बड़ो यानि पकौड़ों का स्वास्थ्य लाभ भी गजब है। इसे भोग में शामिल करने का भी यही उद्देश्य है कि ठंड में भगवान को भी गर्म तासीर वाले व्यजंन का भोग लगाया जाए और इसे प्रसाद के रुप में खाकर शरीर को पौष की ठंड से बचाया जाएं।

आइए जानते हैं कि क्यों पौष माह में मनाया जाता है पौष बड़े और कैसे ये सेहत और धर्म से जुड़ा हुआ है।
साबुत मसालों के गजब फायदे
सर्दी के मौसम में खड़े मसालों के गजब फायदे हैं। लौंग, सौंफ, काली मिर्च और दालचीनी न सिर्फ पकौड़ो का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि ये सर्दी-जुकाम में भी राहत देती है, यही वजह है कि इन सभी को बड़ो में डाला जाता है। साबुत धनिया में जिंक होता है इसकी मदद भी सर्दी की परेशानियों से बचाव होता है।
दालों के गुण
ज्यादातर जगहों पर बड़े मूंग दाल के से बनाए जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक मूंग दाल खाने से शुगर और स्टार्च को कम करने में मदद मिलती है। यह आंखों के लिए फायदेमंद है। इनमें आयरन, पोटेशियम, अमीनो एड्स और एंटी ऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं। दालों से इम्यून सिस्टम और पाचन तंत्र को सुधारने और मजबूत करने में भी मदद मिलती है। यदि सही मात्रा में मसाले डाले जाए तो ये बड़े पेट में नुकसान नहीं करते है। हां यह जरूरी है कि इन्हें एक निर्धारित मात्रा में ही खाया जाए, नहीं तो पेट संबंधी परेशानियां हो सकती है।

पौषबड़ा की सामग्री का है ग्रहों से संबंध
धार्मिक मान्यता के अनुसार पौष मास दान करने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। पोषबड़ा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का ग्रहों से संबंध माना जाता है जैसे तेल का शनि ग्रह, मिर्च का मंगल ग्रह, जीरा और धनिया का बुध ग्रह, गेंहू का चंद्रमा और पृथ्वी तथा शुक्र ग्रह का शक्कर से संबंध है।
पौष माह में लोग दान पुण्य करने के लिए और ग्रह दोष को दूर करने के लिए अपने आराध्य देव को पौषबड़ा का भोग लगाया जाता है। इसी पौषबड़ा को लोगों को प्रसाद के रुप में बांटा भी जाता है। यही कारण कि लोग अपने ग्रहों की स्थिति ठीक करने व दान पुण्य करने के लिए पौषबड़ा महोत्सव का आयोजन करते हैं। राजस्थान में कई जगह इसे तेल जलाना भी कहते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।

हिंदू पंचाग में पौष माह का महत्व
विक्रम संवत में पौष का महीना दसवां महीना होता है। भारतीय महीनों के नाम नक्षत्रों पर आधारित हैं। दरअसल जिस महीने की पूर्णिमा को चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है उस महीने का नाम उसी नक्षत्र के आधार पर रखा जाता है। पौष मास की पूर्णिमा को चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में रहता है इसलिए इस मास को पौष का मास कहा जाता है। पौष माह श्राद्धकर्म और पिंडदान के लिए भी उत्तम माना जाता है। इस महीने को छोटा पितृ पक्ष भी कहते हैं।



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