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सुबह के समय ही सबसे ज्यादा क्यों आते हैं हार्ट अटैक? जानिए कारण और बचाव के उपाय
Morning Heart Attack Risk: दुनिया में तेजी से हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। आज के समय में केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि कम उम्र के लोग भी हार्ट अटैक के कारण अपनी जान गवां रहे हैं। हार्ट अटैक तब आता है, जब हृदय में ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है या फिर अवरुद्ध हो जाता है। ऐसे में, अगर पेशेंट को वक्त रहते हॉस्पिटल ना ले जाया जाए, तो उसकी जान भी जा सकती है। वैसे तो दिल का दौरा किसी भी समय पड़ सकता है। लेकिन आपने अक्सर सुना होगा कि हार्ट अटैक का खतरा ज्यादातर सुबह के समय ज्यादा होता है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की एक स्टडी बताती है कि सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच हार्ट अटैक का रिस्क लगभग 40% ज्यादा रहता है। अब सवाल है कि आखिर हार्ट अटैक अक्सर सुबह-सुबह ही क्यों आता है। चलिए, डॉ समीर क़ुब्बा, डायरेक्टर एंड हेड- कार्डियोलॉजी, धर्मशीला नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल (दिल्ली) से जानते हैं इसका कारण -

ब्लड वेसल्स पर दबाव पड़ना
शरीर की एक अपनी बायोलॉजिकल घड़ी होती है, जिसे सर्कैडियन रिदम कहा जाता है। यह घड़ी हमारे शरीर में हार्मोन के स्तर, ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन को नियंत्रित करती है। वैज्ञानिकों ने पाया कि सुबह 6 बजे से लेकर 12 के बीच शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर सबसे अधिक बढ़ जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और दिल की धमनियों पर दबाव पड़ता है। इससे दिल को ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। ऐसे में, यदि धामनिया पहले से संकरी हों, तो हार्ट अटैक का खतरा काफी बढ़ जाता है।
रक्त का गाढ़ा होना
एक वजह यह भी है कि सुबह के समय हमारे शरीर का रक्त गाढ़ा हो जाता है। साथ ही, इससे शरीर में खून के थक्के बनने लगते है। ऐसे में, अगर धमनियों में पहले से फैट जमा हो और इसके ऊपर थक्का बन जाए, तो खून फ्लो होने में परेशानी होती है, जिससे दिल को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है। इसके कारण हार्ट अटैक आने की संभावना और बढ़ जाती है।
प्लेटलेट्स का एक्टिव होना
सुबह के समय हमारे शरीर में प्लेटलेट्स यानी रक्त के थक्के बनने वाली कोशिकाएं और ज्यादा एक्टिव हो जाती हैं, जिससे दिल को ऑक्सीजन सही मात्रा में नहीं मिल पाता है। साथ ही, रक्त में कुछ ऐसे प्रोटीन बढ़ जाते हैं, जो थक्का बनने से रोकने वाले सिस्टम को धीमा कर देते हैं। ऐसे में, जिन लोगों को पहले से दिल की धमनियों में रुकावट की समस्या हो, तो उनके लिए यह स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो जाती है। ऐसे लोगों में हार्ट अटैक के चांस और ज्यादा बढ़ जाते हैं।
किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है?
जिन लोगों को पहले से ही हाई बीपी, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और डायबिटीज की समस्या होती है, उनमें हार्ट अटैक का खतरा काफी अधिक होता है। ऐसे लोगों को अपनी सेहत का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। इसके अलावा, सुबह अचानक भारी एक्सरसाइज करना, नींद पूरी न होना, तनाव या ठंडे मौसम में बाहर निकलना भी हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा सकता है।
हार्ट अटैक के लक्षण
सीने में दर्द और भारीपन
बाईं बांह या जबड़े में दर्द
ठंडा पसीना आना
अचानक सांस फूलना
चक्कर आना
मतली और उल्टी
अत्यधिक थकान
हार्ट अटैक से बचाव के आसान उपाय
सुबह उठते ही धीरे-धीरे स्ट्रेचिंग करें और शरीर को एक्टिव होने का समय दें।
रात में पर्याप्त नींद लें और देर रात तक न जागें।
सुबह उठने के बाद हल्का गुनगुना पानी पिएं ताकि ब्लड फ्लो सुचारू रहे।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए रोज हल्की सैर या योग करें।
धूम्रपान और शराब से दूर रहें।
तनाव कम लें।
अगर पहले से हृदय रोग है तो दवाइयां समय पर लें।
सीने में दर्द या असामान्य थकान होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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