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आप भी तो नहीं हो रही सेक्सुअल हैरेसमेंट की शिकार, हां तो जानें क्या करें?

नाना पाटेकर-तनुश्री दत्ता विवाद के बाद कॉमेडी कलेक्टिव AIB के के स्टैंड-अप कॉमेडियन उत्सव चक्रवती पर भी सेक्सुअल हैरेसमेंट के आरोप सामने आए है। #metoo मूवमेंट से जुड़कर कई महिलाएं खुलकर अपने ऊपर हुए यौन उत्पीड़न के खिलाफ बोलती हुई नजर आ रही है, चाहे आम हो या नामी और सशक्त महिलाएं। इससे ये बात जाहिर है कि भारत में भी #metoo मूवमेंट के जरिए एक सकारात्मक बदलाव देखा जा रहा है।
जो महिलाएं पहले अपने साथ हुईं इस तरह की घटनाओं के बारे में बोलने से कतराती थीं वे अब अपने साथ हुई बदसलूकी के लिए खुलकर बोल रही हैं। लेकिन आज भी कई महिलाएं है जो इस बारे में बोलने से हिचकती है और कई महिलाओं को समझ ही नहीं पाती है कि उनके साथ क्या हुआ। अगर आप भी काफी समय से यौन उत्पीड़न का शिकार हो रही है तो जानिए आपका अगला कदम क्या होना चाहिए।

सेक्सुअल हैरेसमेंट पर बना एक्ट क्या कहता है?
सेक्सुअल हैरसमेंट ऐक्ट 2013 के तहत किसी कम्पनी में काम करने वाला व्यक्ति चाहे वो परमानेंट एम्प्लॉय हो फिर कोई इंटर्न सैक्सुअल हैरेसमेंट से परेशान होकर शिकायत कर सकता है। ये एक्ट सभी स्थाई और अस्थाई एम्प्लॉय पर लागू होता है। चाहे वो उत्पीड़न की शिकार हो या उत्पीड़न करने वाला।

कम्पनी में हो कमिटी
इसके अलावा ये नियम में साफ है कि अगर किसी संस्था में 10 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं तो उनके यहां इंटरनल कम्प्लेंट कमिटी होनी चाहिए।

सेक्सुअल हैरसमेंट को ऐसे पहचानें
ज्यादातर मामलों में वर्कप्लेस पर महिलाएं समझ नहीं पाती है कि उनके साथ सेक्सुअल हैरसमेंट जैसी घटना हुई है क्योंकि महिलाएं इस बारे में ज्यादात्तर अवेयर नहीं होती है। लिहाजा यह बेहद अहम है कि हर महिला को पता होना चाहिए कि कौन सी घटना सेक्शुअल हैरसमेंट के अंतर्गत आती है-
- अगर कोई व्यक्ति आपकी मर्जी के बिना आपको छू रहा है या आपका फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है।
- अश्लील फोटोज या वीडियो भेजना या दिखाना।
- सेक्सुअल फेवर के लिए किसी तरह की मांग रखता है।
- सेक्सुअल टिप्पणी करना।
- किसी भी तरह के अभद्र इशारे करना या संकेत देना, फिर चाहे वह शारीरिक रुप से हो या मौखिक रुप से।

घटनाओं को रिकॉर्ड करें
अगर आपको लगता है कि आपका यौन उत्पीड़न किया जा रहा है तो घटनाओं को रिकॉर्ड करने के लिए कुछ समय निकालिए। उन सभी घटनाओं की एक सूची बनाएं और अपने ऑफिस के एचआर विभाग के साथ आधिकारिक शिकायत दर्ज करें और उन्हें तत्काल कार्रवाई करने के लिए कहें।

मामले की जांच तक ले सकती है छुट्टियां
जब तक मामले की जांच चल रही हो अगर पीड़ित महिला को उस जगह काम करने में दिक्कत आ रही है तो सेक्सुअल हैरसमेंट एक्ट 2013 के सेक्शन 12 के तहत पीड़ित को 3 महीने तक छुट्टियां लेने का अधिकार है।

38% ने मानी सेक्सुअल हैरेसमेंट की बात
नेशनल बार एसोसिएशन की तरफ से 6 हजार 74 प्रतिभागी पर कराए गए सर्वे के अनुसार जिसमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल थे। करीब 38 प्रतिशत लोगों ने इस बात को स्वीकार किया कि उनके साथ वर्कप्लेस यानी काम करने की जगह पर कभी न कभी यौन शोषण की घटनाएं हुईं हैं।



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