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खतरनाक यौन संचारित रोग है सिफलिस, जानिए महिलाओं में इसके लक्षण
सिफलिस एक खतरनाक यौन संचारित रोग है जो असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाने से फैलता है। पहले से किसी यौन संचारित रोग से ग्रसित पार्टनर के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाने से ये रोग महिलाओं तक पहुंच सकता है।
ये बैक्टीरियल इंफेक्शन संक्रमण योनि , मौखिक या गुदा के माध्यम से आपको संक्रमित कर सकते हैं। सिफलिस रोग की जांच ब्लड टेस्ट के माध्यम से की जा सकती है। जिसकी इलाज करके इसे ठीक किया जा सकता है। लेकिन अगर आप इसका इलाज नहीं करवाते हैं तो यह समस्या गंभीर हो सकती है। इसलिए सिफलिस के संकेतों के बारे में पता होना जरुरी होता है। तो आइए आपको यौन संचारित रोग सिफलिस के बारे में बताते हैं।
ये यौन संचारित रोग चार चरणों में विकसित होता है।

प्राइमरी सिफलिस:
प्राइमरी सिफलिस के संकेत घाव होना होते हैं। यह घाव, दाग की तरह दिखने लगते हैं। ये घाव, शरीर में बैक्टीरिया के शरीर में घुसने पर बनते हैं। कभी-कभी ये घाव सिफलिस से ग्रसित होने के कम से कम 3 हफ्ते बाद विकसित होते हैं। किसी में ये एक ही घाव देखने को मिलता है तो किसी शरीर में कई जगह ये घाव देखने को मिलता है। किसी को लोग अक्सर इन पर ध्यान नहीं देते हैं क्योंकि इन घावों में दर्द नहीं होता है। यह 3-6 हफ्ते बाद ठीक हो जाते हैं।

लेटेंट सिफलिस:
जब आप सिफलिस के लक्षणों को इलाज नहीं करते हैं तो यह थोड़े-थोड़े समय बाद दिखने लगते हैं।

टेरशरी सिफलिस:
यह सिफलिस की आखिरी स्टेज होती है। अगर आप इतने समय में इसका इलाज नहीं करा पाते हैं तो आपको दिक्कत हो सकती है।

बुखार-
आपको बुखार, गले में खराश और लिम्फ नोड्स में सूजन हो सकती है। इसके अलावा लंबे समय तक कमजोरी और बेचैनी भी हो सकती है।

बालों को झड़ना-
इसके दूसरे चरण में आपके बाल झड़ सकते हैं। इतना ही नहीं आइब्रो और पलकों के बाल भी झड़ सकते हैं।

मांसपेशियों में दर्द -
बुखार के अलावा आपको गले में खराश और शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्द और जोड़ों में भी दर्द हो सकता है।

सिफिलिटिक मेनिनजाइटिस-
सिफलिस के तीसरे चरण में यह रोग हो सकता है और इन्फेक्शन के बाद विकसित होने में कई साल लग सकता है। मेनिनजाइटिस में दिमाग और रीढ़ की हड्डी के आसपास उत्तकों में सूजन होने लगती है। अगर सिफलिस इस चरण में बढ़ जाए तो अधिक घातक साबित हो सकता है।

न्यूरोसिफिस-
अगर इसका इलाज नहीं कराया जाए, तो यह तीसरे चरण में तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। बैक्टीरिया के तंत्रिका तंत्र को संक्रमित करने को न्यूरोसिफिस (neurosyphilis) के रूप में जाना जाता है।

भूख ना लगना-
इसके सेकेंडरी स्टेज में वजन कम होने लगता है और इन्फेक्शन के फैलने से आपको भूख भी नहीं लगती है।

ह्रदय संबंधी समस्याएं-
सिफलिस बैक्टीरिया आपकी हृदय प्रणाली पर हमला कर सकता है। रक्त वाहिकाओं के संकुचन और धमनियों में सूजन की वजह से कई मामलों में यह हार्ट अटैक का कारण भी बन सकता है।



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